Grehlakshmi ki Kahani: ‘बड़े-बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं सैनोरिटा’ राहुल ने सिमरन से कहा तो वो मुस्कुरा उठी। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे अपनी फेवरेट फिल्म में खोई निलंजना सोफे पर बैठी थी कि तभी, पीछे से गले में हाथ डाल कर झूल गई तानी ‘मॉम, आज विनय ने मुझे प्रपोज किया’ खुशी जैसे उसके रोम-रोम से छलक रही थी। ‘यह तो बहुत अच्छी खबर है! देखो टेलीपैथी हो गई थी मुझे, तुम्हारा पसंदीदा गाजर का हलवा बनाया है आज।’
विनय और तानी पिछले 1 साल से एक-दूसरे को जानते हैं पर नीलंजना जी ने कुछ 3 महीने पहले ही विनय का नाम सुना, बहुत तो नहीं जानती यह पता है तानी की कंपनी में ही काम करता है एक ही पद है दोनों का।
शाम को डिनर टेबल पर छुटकी राशि व पति साकेत को यह खबर सुनाई तो दोनों उछल पड़े, ‘अरे वाह! इसका मतलब दीदी की जल्द ही शादी होगी और मैं करूंगी शादी में… डांस!’
माता-पिता दोनों खिलखिला दिए वहीं तानी शर्मा गई।
‘देखो! ना मां।’
‘राशि अपना खाना खत्म करो बेटा! कहकर उन्होंने पति की ओर देखा इस इतवार हमें विनय के परिवार से मिलना चाहिए शादी की बातचीत के लिए।’
‘हां बिल्कुल।’
शनिवार की रात बड़े जोर-शोर से तैयारी शुरू हो गई निलंजना की, तानी की भावी सास से मिलना था। बेटी ने तो इंप्रेशन जमा दिया अब उनकी बारी थी पैडिक्योर, मेनीक्योर, फेशियल और सबसे जरूरी हेयर कलर, दिनभर उन्होंने यही सब करने में बिताया।
जब उन्होंने पहली बार अपना एक सफेद बाल देखा था तो बड़ी मायूस हुई थी। उम्र हो गई थी पर हेयर कलर ने खूब साथ दिया। आज भी ज्यादातर लोग उन्हें तानी की बड़ी बहन ही समझते हैं।
सज-संवर कर जब आईना देखा तो बेहद खूबसूरत लग रही थी।
खूबसूरत-सी शिफॉन की साड़ी, पतली सी चेन में पान के आकार का एक डायमंड पेंडेंट और हाथ में खूबसूरत सा सोने का कड़ा, सब बिल्कुल परफेक्ट था।
पति साकेत ने चुटकी काटते हुए कहा, ‘तानी की शादी हो जाने दो, हम भी हनीमून पर चलेंगे।’
‘धत्! राशि का क्या होगा?’
‘उसे ननिहाल भेज देंगे।’
‘अभी तो चलिए देर हो रही है।’
एक बड़ा सा पैकेट गिफ्ट का लेकर वह कार में बैठ गई।
उत्सुकता चरम पर थी विनय के परिवार से मिलने की, कुछ ही देर में कार एक डुप्लेक्स बंगले के पास रुकी। घर के बाहर खूबसूरत-सा बगीचा था, जिसमें लगे बड़े-बड़े सुर्ख गुलाब इस बात की गवाही दे रहे थे कि उनकी देखरेख अच्छे से की जाती है।
बेल बजाई तो दरवाजा विनय ने खोला, ‘नमस्ते आंटी! नमस्ते अंकल! हाय राशि!’ फिर नजरें बचाकर उसने तानी की तरफ एक चुंबन हवा में उछाल दिया जिसे देख वह लाज से दोहरी हो गई।
सब बैठक की तरफ चल पड़े, बैठक ना सादा, ना भव्य थी और ना ही बेतरतीब, बल्कि सुरुचिपूर्ण तरीके से सजाई गई थी। थोड़ी हरियाली की छंटा इनडोर प्लांट से बिखेरी गई थी जो आंखों को सुकून दे रही थी।
कुछ ही देर में विनय के माता-पिता आ गए। ‘नमस्कार! आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?’
‘ना, कोई परेशानी नहीं, कितनी बार तो विनय को मैं यहां ड्रॉप कर चुकी हूं।’ अनायास ही तानी के मुंह से निकल गया।
और सब खिलखिला उठे मगर निलंजना जी ने अपनी नजरों का कैमरा जूम कर दिया।
पहले कमरे के हर कोने का मुआयना किया फिर भावी समधी राजेश जी पर फोकस कर दिया गोरे, लंबे, हष्ट-पुष्ट थे, ना ज्यादा मोटे, ना पतले चेहरे पर मुस्कान उन्हें सरल स्वभाव का बता रही थी।
भावी समधन श्वेता गेहूंए रंग की थी पर तीखे नैन-नक्श चेहरे पर आत्मविश्वास की आभा।
परंतु नीलांजना जी को उनकी साधारण वेशभूषा कुछ ज्यादा पसंद नहीं आई, गुलाबी रंग का सूती कुर्ता पहने हुए थी। उसी रंग के दुपट्टे के साथ, एक हाथ में कड़े जो शायद लाख के थे। गले में पतली सी चेन छोटे-छोटे कान के टॉप्स उस लिहाज से नीलंजना जी कुछ ज्यादा ही टिपटॉप थी। उन्हें सबसे ज्यादा जो बात खटकी वह थी उनके खिचड़ी नुमा, ज्यादा सफेद व कम काले बाल!
मन ही मन वह सोचने लगी हर पंद्रह दिन में डाई कर लेना चाहिए ऐसा भी क्या आलस?
कितने बुरे दिख रहे हैं…
‘लीजिए मुंह मीठा कीजिए’ सामने श्वेता जी थी मिठाई की प्लेट उनकी तरफ बढ़ाती हैं।
राजेश जी ने बात शुरू की देखिए, ‘जब लड़का-लड़की राजी, तो क्या करेगा काजी, हम तो खुश हैं इस रिश्ते से!’ ‘और हम भी’ निलंजना व साकेत एक स्वर में बोले।
‘ऐसा करते हैं सगाई की तारीख पक्की कर लेते हैं मैं पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकलवा लेता हूं’ तानी के पिता ने कहा। इस बात से सबसे ज्यादा विनय व तानी के चेहरे पर रौनक छाई।
राशि भी उत्साहित होकर विनय से बोली, ‘अब आप ऑफिशियली मेरे जीजू होने वाले हैं।’
विनय भी कहां पीछे रहने वाला था, बोला ‘हां! हां! और आप मेरी साली यानी आधी घरवाली।’ एक बार फिर ठहाकों की गूंज से कमरा गुलजार हो गया।
एक भव्य होटल में सगाई का कार्यक्रम था जितनी तैयारी तानी व राशि ने इस आयोजन के लिए की थी उससे कम तो निलंजना जी ने भी नहीं की। अपनी उम्र को लगभग 20 साल पीछे धकेलते हुए एक खूबसूरत से नीले इवनिंग गाउन में गजब की लग रही थी, मैचिंग ज्वैलरी व कलर्ड किए हुए घुंघराले बाल।
उत्सुक-सी विनय व उसके परिवार का इंतजार कर रही थी, यूं तो कम ही लोगों को निमंत्रण दिया था मगर हॉल फिर भी धीरे-धीरे भरने लगा था हल्के बादामी रंग की साड़ी में खिचड़ी वालों ने उनका ध्यान आकर्षित किया
‘हें आज भी, इतने बड़े फंक्शन में भी।’
मन में उनके अजीब सी उथल-पुथल मच गई।
उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि श्वेता जी ने आज भी बाल रंगे नहीं थे वैसे ही प्राकृतिक रूप में छोड़ दिए थे, उनके बाल सीधे, लंबे, खुले थे और काफी हद तक सफेद।
श्वेताजी, निलंजना की तरफ ही बढ़ रही थीं।
पास आकर बड़ी विनम्रता से उन्होंने नमस्ते किया निलंजना जी के पास उनकी बहन शीला खड़ी थी तो उन्हें परिचय करवाना पड़ा। निलंजना जी ने हिचकिचाते हुए उन्हें मिलवाया, ‘यह तानी की होने वाली सास श्वेता जी।’
‘अच्छा!’ मगर उनकी बहन भी उन्हीं की तरह हक्की-बक्की श्वेता जी को देख रही थी।
श्वेता जी अभ्यस्त थी इस तरह की प्रतिक्रिया की। वह उसी सहजता के साथ स्टेज की तरफ जाने लगी।
मगर इधर तो फुसफुसाहटों का दौर शुरू हो गया था। इतनी सफेद बाल फिर भी कलर नहीं, मैंने तो 30 साल से शुरू कर दिया था आखिर कौन बूढ़ा दिखे?
‘सच! अब तो विनय की उम्र पर भी शक हो रहा है, देखना कहीं ज्यादा अंतर तो नहीं तानी और विनय की उम्र में।
ऐसे समय जब लोगों को तानी व विनय के खुशहाल जीवन की कामना करनी चाहिए थी तो बेकार की बात यानी बाल ना रंगने के विषय को तूल दे रहे थे। इस सब का प्रभाव सबसे ज्यादा निलंजना जी पर ही पड़ रहा था।
रात के दो बज रहे थे, तानी के दिल में मीठी-मीठी गुदगुदी हो रही थी। अभी भी वह उन पलों को जी रही थी। जब विनय ने उसकी नाजुक उंगली में बड़ी-सी हीरे की अंगूठी पहनाई और अपने होंठ उसके कान के पास लाकर धीरे से कहा था, ‘मेरी होने वाली घरवाली मुबारक हो!’ उसने गर्दन घुमाई और गरम होंठ उसके गालों पर थे, सोच कर एक बार फिर उसके कान गरम हो गए दिल में धुकधुकी शुरू हो गई।
नींद तो आज निलंजना जी को भी नहीं आ रही थी ‘कैसी है! इतने बड़ी फंक्शन में भी बिना कलर के चली आई, लोग कितनी बातें बना रहे थे, मूड ऑफ हो गया यार! शादी तक तो कुछ करना पड़ेगा नहीं तो ना जाने और कितनी बातें सुननी पड़ेगीं।’ मन ही मन कुछ जैसे तय किया उन्होंने। अगले दिन अपने पति से बात कर विनय व उसके परिवार को इतवार को खाने पर बुला लिया।
इतवार के दिन खाने के बाद कॉफी का दौर चला, तभी साकेतजी ने बात शुरू की, ‘देखिए हम तो शादी भव्य समारोह में करना चाहते हैं आपकी कोई विशेष इच्छा हो तो हमें बताएं।
राजेश जी तुरंत बोले, ‘नहीं! नहीं! हम तो इन सब के खिलाफ हैं।’
‘रस्मो रिवाज के हिसाब से हम बारातियों का उचित सत्कार करना अपना कर्तव्य समझते हैं आप निसंकोच होकर हमें बताएं, निलंजना ने जोर देकर कहा।
‘नहीं’ इस बार श्वेता जी ने कहा, ‘हमें समारोह सादा ही पसंद है, हम छोटे से फंक्शन में शादी कर लेते हैं फिर रिसेप्शन दोनों मिलकर दे देंगे यानी खर्चा आधा-आधा तो कैसा रहे?’
बात निलंजना जी को ज्यादा अच्छी नहीं लगी मगर फायदा उनका ही था तो मान लिया।
‘चलिए! आपको अपना घर दिखा दूं’ बड़ी कोठीनुमा घर था उनका। जैसे ही गैलरी में पहुंचे निलंजना जी ने बात शुरू की, ‘एक बात पूछूं?’
‘हां! हां! बिल्कुल निसंकोच पूछिए? अब आप मेरी होने वाली समधन हैं मगर मैं आपको अपना दोस्त बनाना चाहती हूं’ श्वेता जानती थी बात क्या होगी इसलिए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
‘आप अपने बाल क्यों नहीं रंगती? सगाई के फंक्शन में भी आप ऐसे ही आ गईं।’
‘क्या बाल कोई पेंटिंग है जो रंगू’ उन्होंने उसी लहजे को पकड़ा। मगर जब निलंजना के चेहरे की हवाइयां उड़ते देखी तो बात संभाली, ‘मैं मजाक कर रही थी, पर मुझे जरूरी नहीं लगता बस इसलिए।’
‘आपको बूढ़ा दिखने का डर नहीं लगता?’
‘उम्र के साथ बाल सफेद होना तो प्राकृतिक प्रक्रिया है, उसे रंगे या ना रंगे आपकी अपनी मर्जी होती है।’ उन्होंने बड़े-बड़े गुलदान में लगे नकली रबड़ व प्लास्टिक के पौधों की तरफ इशारा करके कहा यह अपनी पसंद है जैसे आपने नकली पौधों से घर सजाया लेकिन मैं अपनी बैठक को असली पौधों से सजाती हूं।
मैं यह समझती हूं कि बाल रंगना कोई जरूरी नहीं यह तो डाई कंपनियों की साजिश है जो विज्ञापन में सफेद बालों वाली स्त्रियों को आंटी के संबोधन से डराते हैं।
‘अगर जीवन के इस पड़ाव में भी हमें अपने व्यक्तित्व पर आत्मविश्वास नहीं होगा तो किस वक्त आएगा? आप ही बताइए?’
‘मुझे बाल रंगने से ज्यादा अपने जीवन में खुशियों के रंग भरने का शौक है, मैं अपना वक्त उन चीजों को करने में लगाती हूं जिससे मुझे खुशी मिलती है मैं लिखती हूं, पढ़ती हूं, बागवानी करती हूं, पेंटिंग करती हूं, इन सब में मेरे बाल रंगने ना रंगने से कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं खुश हूं, यही सबसे जरूरी बात है।’ लज्जित सी निलंजना जी जमीन की तरफ देखती रह गई
‘अब आप बताइए मैं शादी में भी ऐसे ही रहूंगी और लोग बातें बनाएंगे तो मैं आऊं या नहीं?’
इस बार निलंजना ने उनका हाथ पकड़ कर कहा, ‘बड़े-बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती है सेनोरिटा।’ दोनों खिलखिला कर हंस पड़ीं।
