Hindi Love Story: पन्द्रह-बीस मिनटों की मुलाक़ात के लिए कलेक्टर कोर्ट कैम्पस का यूज़ हम पहले भी कर चुके थे। नीम पेड़ के नीचे वह अपनी स्कूटी और मैं अपनी बाइक पर बैठे नींबू और मसाले वाली तीन-चार कलकतिया चाय पी जाते थे। चाय से इतना देना-लेना भी किसे था, वह लोगों की आँखों में धूल झोंकने का बंदोबस्त भर थी।
“एक बात पूछूँ?” उसने थोड़े फूले मुँह से पूछा।
“एक क्यों चार पूछो।” मैंने वातावरण की बोझिलता हटाने की कोशिश की।
“तुम्हें लगता है, अब भी तुम्हें मुझसे प्यार है?”
“मेरे लगने न लगने से क्या होता है, तुम्हें जो लग रहा है वह बताओ।”
“आजकल कितनी जल्दी चिड़चिड़ा जाते हो ना, फोन पर भी थोड़ी देर हुई नहीं और कुछ काम आ जाता है तुम्हें। चैट में भी गुड नाइट बोलने की इतनी जल्दी में रहते हो।”
“प्यार कोई करने-कराने की चीज़ नहीं; वह तो व्यक्ति की दशा हो जाती है। पहले-पहल के जानने-समझने, चाव और वक़्त में फ़र्क तो आएगा ना; और हो सकता है किसी वक़्त ज़्यादा फ़्री रहा होऊँ, अब थोड़ा बिजी हूँ। क्यों यह सब बेकार में सोचती हो?”
“देखो, बिजी होना तो कोई रीज़न होता ही नहीं। हम जिस काम को ज़रूरी समझते हैं, उसके लिए हमारे पास हमेशा टाइम होता है; और जिसे ग़ैरज़रूरी या सेकेण्ड्री समझते हैं उसके लिए एक्सक्यूज।”
“तुम्हें लगता है, तुम अब मेरे लिए ज़रूरी नहीं रही?”
“मैंने ऐसा तो नहीं कहा।” उसके चेहरे से ज़ाहिर यही था कि, उसने यही कहा है।
“देखो डियर, तुम्हें अगर लाइफ़ हमेशा रोलरकॉस्टर पर चाहिए तो यही उपाय है, कि दो-चार महीनों में बॉयफ्रेण्ड बदलते रहा करो। वही समय होता है, जब हम अपनेपन का ज़्यादा एहसास दिखाने की कोशिश करते हैं और यह भी समझ लो, हमेशा अपनेपन का एहसास दिलाते रहने से ही कोई अपना नहीं होता। तर्कों से प्यार मरने लगता है और सहजता प्यार को सींचती है।” उसने ठीक ही तो कहा था, मैं आजकल चिड़चिड़ा हो गया हूँ।
कभी यूँ भी सोचता हूँ, अच्छी नींद ला सकने वाले ख़्वाब सजा-संवार कर मुँह पर दे मारूं; काश! ज़ीनत इतनी भर होती, तो कोई बात ही ना थी। उस जीभ का क्या करूँ, जिसने ज़िंदगी के और भी ज़ायके चखे हैं?
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
