Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: “तुम कभी पूछते नहीं कि किसका कॉल था, कौन-कौन है मेरी लाइफ़ में?” उसने किसी से हँसते-मज़ाक करते हुए फोन पर बात ख़त्म की और मेरी ओर देखते हुए पूछा।

“मुझे उससे क्या फ़र्क पड़ता है?”

“थोड़ी-बहुत मिर्ची तो लगनी चाहिए।”

“हा…हा…हा…उन सबको तो कब का जलाकर मार डाला, जिनसे मुझे जलन होती थी।”

“कहीं ऐसा तो नहीं कि, तुम मुझसे प्यार ही नहीं करते?”

“ये किस चिड़िया का नाम है? और वैसे भी मुझे तुम्हारी बॉडी पसंद है; गद्देदार! इसलिए हूँ तुम्हारे साथ।”

“बस बकवास। कभी ढंग से नहीं कह सकते कि, मुझसे तुम्हें प्यार है।”

“समझदारी नाम की भी कोई चीज इसी दुनिया में इग्ज़िस्ट करती है डियर!”

“हाँ ना, नहीं हूँ समझदार। सीधे-सीधे सुनना है मुझे।”

“मुझे बॉडी चाहिए होती तो तुम्हारे ही पीछे क्यों टाइम ख़राब कर रहा होता? कितनी सस्ती पड़ती वो बॉडी, जिन्हें रोज आराम से बदला जा सकता है।”

“वो तो मुझे पता है।”

“तो शक वाला सवाल क्यों किया मुझसे?” मेरी आवाज़ थोड़ी तेज़ हुई।

“माफ़ कर दो भगवान। बच्चों से कभी-कभी गलती हो जाती है।” उसकी हथियार डालने वाली इस अदा से ख़ालिस नातेदारी रही है मेरी।

“ठीक है, कर दिया माफ़। लेकिन बच्चा! यह गलती बार-बार नहीं चलेगी, इतना याद रखना।”

“जी प्रभु! मुझे तो बस यही लगता है कि, जब किसी और के साथ तुम्हें देखकर मुझे आग लग जाती है, तो थोड़ी गरमी तो तुम्हें भी लगनी चाहिए जब मेरे साथ किसी और के होने की कोई भी गुंजाइश हो।”

“पगली! मैं तुम्हें बाँधता इसलिए नहीं कि, मैं ख़ुद भी नहीं बँधना चाहता। सीधी बातें सुन सको तो सुनो। मैं अपनी किसी भी नीड के लिए तुम पर डिपेन्ड नहीं हूँ; तुमसे कभी यह प्रॉमिस नहीं किया कि, तुम्हारे अलावा कोई और मेरी ज़िंदगी में नहीं है और ना आएगी। मेरी ज़िंदगी मेरी शर्तों पर चलेगी यह तय है, और मैं तुमसे कोई धोखा नहीं कर रहा। तुम हमेशा आज़ाद हो, मेरे साथ होने या ना होने के लिए।”

“तो मैं तुम्हारी ज़िंदगी में कुछ भी मायने नहीं रखती?” उसके चेहरे पर फिर हेरफेर हुआ।

“हा…हा…हा…फिर वही बकवास। तुम्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि, मैं तुम्हारी ज़िंदगी में तब तक ही रहूँ, जब तक मेरे कुछ मायने हों। जो मुझे सोचना चाहिए, वह तुम क्यों सोच रही हो?”

“बस पूछ रही हूँ।”

“महाभारत देखी है तुमने टीवी में?”

“काहे को?”

“द्रौपदी को पाँच पति इसलिए मिले कि, उसने शिव आराधना से चौदह गुणों वाले वर की कामना की थी; जो किसी एक इंसान में मिल नहीं सकते थे, तो भगवान ने उसे छप्पर फाड़कर पति दे दिए।”

“मतलब?”

“मतलब यह कि, मुझे तो इतनी ज़्यादा क्वालिटीज़ और डिसक्वालिटीज़ चाहिए कि, भगवान मेरे ऊपर कितना मेहरबान होगा, यह मैं कैसे बता सकता हूँ?”

“द्रौपदी के नाना! जिन्दा रहने से मन भर गया है ना तुम्हारा। ढिशूम…” उसने आवाज़ निकालते हुए मेरे पेट में इस तरह मारा कि, मुझे चोट ना लगे। मुझे उसके दाँत उसकी आँखों की तरह ही पसंद हैं, जब वे मुस्कान बिखेरते हुए मुझे काटने को बेक़रार हों।