maanaveey vikaar
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Heart Touching Story: भारत वर्ष में समुद्रगुप्त काफी प्रतापी सम्राट हुए थे। उनकी शौर्य गाथाएं दूर-दूर तक थी। बावजूद इसके चिंताओं से वे भी नहीं बच सके। चिंताएं तरह-तरह की और विचित्र थी। इन्हीं चिंताओं के कारण वे परेशान से रहने लगे। चिंताओं का चिंतन करने के लिए एक दिन वे वन की ओर निकल पड़े। वह रथ पर थे, तभी उन्हें एक बांसुरी की आवाज सुनाई पड़ी। वह मीठी आवाज सुनकर उन्होंने सारथी से रथ धीमा करने को कहा और बांसुरी के स्वर के पीछे जाने का ईशारा किया। कुछ दूर जाने पर समुद्रगुप्ता ने देखा कि झरने और उनके पास मौजूद वृक्षों की आढ़ से एक व्यक्ति बांसुरी बजा रहा था। पास ही उसकी भेड़ें घास खा रही थी। राजा उस बांसुरी बजाते हुए व्यक्ति को एकटक देखे जा रहे थे क्योंकि वह एकदम मग्न होकर बांसुरी बजा रहा था। राजा उसे मग्न देखकर हैरान भी थे। राजा ने कहा कि “आप तो इस तरह प्रसन्न होकर बांसुरी बजा रहे हैं, जैसे कि आपको किसी देश का साम्राज्य मिल गया हो।”

युवक बोला कि “श्रीमान आप दुआ करें कि भगवान मुझे कोई साम्राज्य ना दे क्योंकि अभी ही मैं सम्राट हूं। लेकिन साम्राज्य मिलने पर कोई सम्राट नहीं होता। बल्कि सेवक बन जाता है।”

अत्याधिक सहजता के साथ युवक की कही उस बात को सुनकर राजा हैरान रह गए। तब युवक ने कहा “सच्चा सुख स्वतंत्रता में है। व्यक्ति संपत्ति से स्वतंत्र नहीं होता बल्कि भगवान का चिंतन करने से स्वतंत्र होता है। तब उसे किसी भी तरह की चिंता नहीं होती है। भगवान सूर्य जो किरणें सम्राट को देते हैं और प्रकृति जो जल उन्हें देती है मुझे भी वही मिलता है। ऐसे में मुझमें और सम्राट में बस मात्र संपत्ति का ही फासला होता है। बाकी तो सब कुछ तो मेरे पास भी है।”

यह सुनकर युवक को राजा ने अपना परिचय दिया। युवक ये जानकर हैरान था। लेकिन राजा की चिंता का समाधन करने पर राजा ने उसे सम्मानित किया। बेशक चिंता मानव मस्तिष्क का ऐसा विकार है जो पूरे मन को झकझोड़ कर रख देता है।

शिक्षा : इसलिए चिंता नहीं चिंतन कीजिए, ये सोचिए आप औरों से बेहतर क्यों हैं? इस सवाल का जवाब यदि आप स्वयं से पूछते हैं तो आपकी चिंताओं का निवारण स्वयं ही हो जाएगा।

ये कहानी ‘दिल को छू लेने वाली कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंDil Ko Chhoo Lene Wali Kahaniyan (दिल को छू लेने वाली कहानियाँ)