Hindi Lond Story: दिसंबर खत्म होने को थी। उत्तर भारत पूरी तरह बर्फ और कोहरे के आगोश में आ रहा था।
न्यूज चैनलों पर आते हुए मौसम के अपडेट्स मुझे पुरानी जख्मों की याद दिलाने लगे थे।
फिर से पुरानी यादें…, मेरे भीतर दबे हुए सफेद कब्रों को खोदने का काम फिर से शुरू हो गया था…!
खिड़की से बाहर मैंने देखा पत्तों पर ओस की बूंदें झिलमिलाने लगी थीं।
मैंने अपने मोबाइल से शिमला के लिए टिकट बुक करवा लिया।
“यह क्या, तू फिर से शिमला जा रही है?”मेरी बहन माया ने मुझसे कहा
“हां!” मैंने संक्षिप्त स्वर में जवाब दिया। अपने वार्डरोब से मैंने अपने सारे कपड़े अरेंज कर लिए थे। वूलन कुर्तियां,स्वेटर, मफलर, जैकेट्स, टोपी दस्तानें और वूलन बूट्स।
“दुनिया ठंड से मरी जा रही है…लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं और यह मुई ना जाने उन बर्फ की दुनिया में क्या ढूंढने जाती है?पता नहीं क्या लगाव है इसे उस ठंडे बर्फ से….!!!!
शेफाली…तू सुन भी रही है ना….!मैं क्या कह रही हूं…?”
“हाँ…!”
“फिर …. तेरा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है…।मुझे लगता है कि तुम्हें इस तरह से अकेली शिमला के बर्फ़बारी में भटकना नहीं चाहिए। आखिर तुम्हें वहां क्या मिलता है?”
मैं चुप ही रही….।
माया अनवरत बोलती रही।
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लगभग चार दिन रुकना था वहां। चार दिन के हिसाब से मुझे अपने सारे कपड़े अरेंज करने थे।
“पता नहीं इसे क्या हो गया है…!!न जाने क्या सोचती रहती है…!!! माया अभी भी बुदबुदा रही थी।
“शेफाली, मैं चाय बनाने जा रही हूं तुझे चाय पीनी है क्या?”
“ येप्पी…. पी लूंगी।”मैं मुस्कुराई।
“ तो फिर नीचे आ जाना। नीचे धूप में ही बैठकर पीते हैं।”
“ठीक है।”
मैंने सारे सामान अरेंज कर लिए और नीचे जाकर ग्राउंड पर लगे टेबल पर बैठ गई। मेरे आते आते माया भी चाय लेकर आ चुकी थी और साथ में भुने मुरमुरे भी।
वह चाय पीते हुए लगातार मुझे घूर रही थी मैं उससे नज़रें बचा रही थी।
आखिरकार उसने मुझे टोका।
“ शेफाली, मुझे लगता है कि तुम्हें इस समय शिमला नहीं जाना चाहिए !”
“क्यों?”मैंने पूछा।
“तुमने पढ़ा था ना वेदर अपडेट!”
“ अरे मुझे कुछ भी नहीं होगा। तू टेंशन मत ले ।
तुम चलोगी क्या साथ?”मैं मुस्कुराई।
“ कम से कम मुझे पागल कुत्ते ने नहीं काटा है… माया चौंकी ,तुझे जाना है तो चले जा बस मैं तेरे भले के लिए बोल रही थी।
शेफाली, वह रुक कर बोली… इस बड़ी सी कोठी में अब हम दोनों ही बच गए हैं अगर तुझे कुछ हुआ तो मैं रो भी नहीं पाऊंगी। बहन तेरे बिना अब मेरा कोई नहीं रहा।”उसकी आँखें भर आईं थीं।
“ तुम चिंता मत करो दीदी, मुझे कुछ नहीं होगा।”
“ऐज यू विश!” माया ने कहा।
दो दिन बाद मेरी ट्रेन थी।पहले दिल्ली और दिल्ली से शिमला।
जैसे-जैसे शिमला पास आ रही थी। हवा में ठंड बर्फीली खनक पैदा कर रही थी।
ऊपर से नीचे तक गर्म कपड़ों के नीचे मैं दबी थी। अपनी आंखों पर मैंने काला चश्मा लगा लिया था ताकि इस बर्फीले रेत पर मेरी पिघलती आंखों के कोर किसी को ना दिख जाए… क्योंकि उनमें से गर्म आंसू के बूंदें आज भी छलक आए थे!
कुछ यादें ऐसी होती है… कुछ लगाव ऐसा होता है जो बर्फ में भी गर्माहट का एहसास दिला देता है और फूलों में भी कांटों की चुभन ।
“ऋषभ….!!!!”मेरे मन का कोना दरक सा गया। तुम्हें याद करते ही मैं तुम्हारे प्यार की गर्माहट से भर जाती हूं…। यही वह जगह है ना…जहां हमने एक दूसरे का साथ निभाना का वादा किया था…! याद है ना तुम्हें!!”
“टैक्सी मॉल रोड….चलोगे!”मैं अपनी आभासी दुनिया से बाहर निकली।
थोड़ी देर बाद मैं उस होटल के नीचे थी, जहां कभी मेरे मन के गुलाबी सपने अंकुरित हुए थे।
उन बर्फीली वादियों में प्यार भरे दो दिलों की खुशबू अभी भी तैर रहे थे।
सब कुछ अब सफेद हो चुका है। एक सफेद कब्र की तरह!!
हमेशा की तरह रिसेप्शन में रिसेप्शनिस्ट ने मुझे पहचान लिया।
“अरे आप आ गए बहन जी! आपका अपना कमरा खाली है।” उसने मुझे कमरे की चाबी पकड़ाते हुए कहा।
“ थैंक यू !”
“आपका सामान भिजवा दूं?”
“नहीं नहीं मेरे पास बस एक बैग ही है।”
होटल के उस कमरे में पहुंचकर मैंने अपनी बहन माया को फोन कर बता दिया मैं सकुशल पहुंच गई हूं ताकि वह चिंता ना करें।
“शेफाली, अपना ध्यान रखना।”
“हाँ दीदी।”
अकेले इस कमरे में बैठकर मैं कई यादें, कई जिंदगी जी सकती हूं। अपने आप को जिंदा रखना भी तो जरूरी है।
सामने शीशा लगा हुआ खिड़की था। उसके पार कई चीज दिख रही थीं।
माल रोड के कई दुकानें आज भी सजीं थीं!…. ऐसा लग रहा था, जैसे वह कल की ही बात हो..।
“शेफाली आज ऐसा करते हैं हम लोग मॉल रोड चलते हैं… सबसे छुपकर। थोड़ा मार्केटिंग किया जाएगा और वहां कुछ खाया पिया जाएगा।”
मैं और सोनम दोनों चुपचाप मॉल रोड के लिए निकल गए थे।
ढेर सारी शॉपिंग के बाद जब हमलोग लौट रहे थे तब अचानक ही किसी से मैं टकराकर गिर गई और मेरा सारा सामान बिखर गया।
“ डिस्गस्टिंग!,देख कर नहीं चल सकती थी क्या?” सामने वाले इंसान ने कहा।
यही बात मैं भी तो कर सकती हूं मि. ,….!”
आसपास भीड़ इकट्ठी होने लगी थी तो सोनम ने कहा
“शेफाली, जाने दे न यार क्यों बात बढ़ा रही है। कहीं मैम को पता चल गया ना तो हमारी क्लास लगेगी अलग!”
उस नवयुवक ने मुस्कुराते हुए मेरे वॉलेट्स और बैग मेरे हवाले किया और कहा
“तुमलोग कॉलेज स्टूडेंट हो न।अपने टीम से छुपकर यहां आई हो?”
हम दोनों का चेहरा फक्क हो गया।
गिरने के कारण मेरी हथेलियों पर खून की बूंदें चमकने लगीं थीं।
वह देख कर थोड़ा घबरा गया।
उसने फौरन कहा
“आय एम सॉरी…आपको तो चोट भी लग गई है।
चलिए कॉफी शॉप में चलते हैं…!”वह जिद कर कॉफी शॉप में ले गया।फिर जल्दी से एक केमिस्ट के पास से डेटॉल की पट्टी लेकर आया और बहुत ही प्यार से मेरी हथेलियों पर चिपका दिया।
आधे घंटे में ही हम दोनों दोस्त बन गए। बातचीत के दौरान ही पता चला कि वह आर्मी जॉइन किया हुआ है। अभी छुट्टियों में शिमला घूमने आया है।
हम लोग आधे घंटे के भीतर उससे छुट्टी लेकर अपने होटल लौट गए। किसी को ज्यादा शक नहीं हुआ था।
संयोग से उसी होटल में वह भी रुका हुआ था।
रात के डिनर के बाद ऊपर जाते हुए मैं फिर से उससे टकरा गई।
वह फिर से चौंक गया “अरे तुम?”
हमारे ग्रुप की लड़कियां आश्चर्य से पूछने लगीं
“ शेफाली, तुम इन्हें कैसे जानती हो?”
मैं डर गई। मैं बहाने बनाने लगी।
मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या बोलूं? ऋषभ मेरे कानों में धीरे से फुसफुसाया और कहा
“तुम्हारी प्रिंसिपल को बता दूं?”
“ नहीं नहीं!, मैं घबरा गई।
“तो फिर एक कप कॉफी चलेगी ना।”
हम लोग लगभग चार-पांच दिन के लिए वहां रुके हुए थे। उतने ही दिनों के लिए वह भी रुका हुआ था।
इन चार-पांच दिनों में हम दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए थे।
ऋषभ बहुत ही सिंपल और मिलनसार लड़का था। उसकी सादगी और सिंपलीसिटी ही मुझे उसकी तरफ आकर्षित कर रही थी।
वापस लौट के बाद भी हम दोनों की मुलाकात अब व्हाट्सएप और फोन के जरिए होने लगे थे। हम दोनों की दोस्ती अब प्रेम में बदल चुकी थी।
ऋषभ और मैंने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया था।
ऋषभ का यह कहना था कि जैसे ही उसकी ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी, वह शादी के लिए तैयार हो जाएगा। वह आकर मेरा हाथ मांग लेगा।
मैंने कहा
“घर पर मेरी बड़ी दीदी है जब तक उनकी शादी नहीं होगी हमारी कैसे हो सकती है?” ऋषभ हंसता था ।
वह कहता “कोई बात नहीं मैं तुम्हें ऐसे ही उठा कर ले आऊंगा, शादी की जरूरत ही नहीं है।”
अपनी जर्नलिज्म के स्पेशल प्रोजेक्ट के कारण एक बार में फिर से शिमला की वादियों मे आ चुकी थी।
बहुत मुश्किल से ऋषभ ने एक रात की छुट्टी लेकर मेरे से मिलने आया था। हम दोनों उसे मॉल रोड में उसी कॉफी शॉप में बैठकर पुरानी बातें याद कर रहे थे।
इस बार मेरे कॉलेज का ग्रुप नहीं था बल्कि ऋषभ का प्यार भरा साथ, खुमारियों से भरी हुई बातें और जीवन भर जीने मरने की बातें थीं।
कॉफी पीते हुए ऋषभ ने मेरे हाथों पर अपना हाथ रख दिया और कहा
“ आई लव यू शेफाली!”
मैं हंसी।
“ जहांपनाह कोई प्रूफ है,हमारे प्यार का… किसी को आपने गारंटर बनाया है…?”
तभी बाहर बर्फ गिरनी शुरू हो चुकी थी। “शेफाली देखो, यह चारों तरफ फैली भी बर्फ की वादियाँ,यह गिरते हुए बर्फ, यह सभी मेरे प्यार के निशानियां हैं…! मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूं..शेफाली…. और जिंदगी भर करूंगा… यहां तक की मरने के बाद भी!”ऋषभ रोमांटिक हो चुका था।
“यह क्या कह रहे हो ऋषभ…!मरने की बात मत किया करो…!”मेरी आंखों में आंसू आ गए।
ऋषभ हंसा
“ शेफाली, मेरी जॉब प्रोफाइल ही ऐसी है। मौत मेरे साथ साथ चलती है, ना जाने कब क्या हो जाए आफ्टर ऑल आई एम ए सोल्जर! बस मैं इस बार आऊंगा तो तुम्हारा हाथ तुम्हारे माता-पिता से मांग लाऊंगा।प्लीज शेफाली मेरा इंतजार कर लेना….!!”
“ ऋषभ, मैं जिंदगी भर तुम्हारा इंतजार करूंगी।” मैंने कहा।
मगर…. वह इंतजार कुछ लंबा हो गया। कुछ दिनों बाद ऋषभ की पोस्टिंग कश्मीर में हो गई। अज्ञात हमलावरों ने जिस सैनिक छावनी को अपना निशाना बनाकर उन पर गोलीबारी और बम विस्फोट किया था, उसमें शहीद होने वालों में ऋषभ भी था।
मेरा प्यार खो गया था …उन वादियों में… बर्फीली वादियों में जहाँ आज भी उसकी आवाज में गूंज रही थी…!
” शेफाली आई लव यू !शेफाली आई लव यू !ये बर्फ मेरे प्यार के गवाह हैं…!मैं मरने के बाद भी तुमसे प्यार करता रहूंगा!!!”
मेरी आंखें अनवरत बह रही थीं। तभी नीचे से शोर होने लगा।
अपनी पुरानी यादों से बाहर निकल कर मैंने अपनी आंखें पोंछी। बरफबारी शुरू हो गई थी। बच्चे बाहर निकल बर्फ से खेल रहे थे।
मैं भी नीचे आ गई।
बर्फ की रूई मेरे ऊपर गिरने लगी और मैंने उन्हें अपनी हथेलियों में पकड़ लिया और कहा
“ऋषभ आई लव यू!!!”
