बदलता मौसम भी हमें कई तरह की एलर्जी से दो-चार करवा सकता है। अस्थमा से लेकर ब्रान्काइटिस, जुकाम, सांस लेने में परेशानी, आंख में पानी आना जैसी एलर्जी इस समय में आम हैं। लेकिन इस एलर्जी के कई कारण हैं जैसे-

फल
सच तो यह है कि फल हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि ये हमारे लिए एलर्जी का भी सबब हैं। हमने सब्जी वाले के पास से फल लिया, उसे धोया भी लेकिन ध्यान नहीं दिया कि उस पर अभी भी कुछ लगा हुआ है। इसमें पोलेन काउंट इतने ज्यादा होंगे कि आपको बीमार पडऩे में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पोलेन फूड एलर्जी सिंड्रोम अमूमन तभी होता है, जब आप साबुत फल खा लेते हैं। इसमें उसका छिलका भी शामिल है। बेहतर तो यह होगा कि इस मौसम में आप फल को छीलकर या हल्का पका कर ही खाएं।

हल्की बौछारें
इस मौसम में प्री-मानसून आ जाता है। कहने को तो हल्की बौछारें पोलेन काउंट्स को तो कम कर देती हैं लेकिन सच तो यह है कि इससे पोलेन यानी परागकण चारों ओर फैल जाते हैं। छोटे कणों के तौर पर हवा में व्याप्त हो जाते हैं और शरीर पर बुरा असर करते हैं। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान अस्थमा रोगियों की संख्या वहां बढ़ जाती है। बेहतर तो यह होगा कि आप बलदते मौसम में घर के अंदर ही रहें और खिड़कियों को बंद करके रखें।

उमस
हल्की बारिश उमस को काफी हद तक बढ़ा देती है। यही वजह है कि धूल में व्याप्त छोटे कीट पनप जाते हैं। घर के अंदर फैलकर ये कीट छींक, खुजली वाली नाक, पानी भरे आंख और अन्य कई तरह की एलर्जी का कारण बनते हैं। इन्हें डस्ट माइट्स भी कहते हैं। बेहतर तो यह होगा कि आप डिह्यूमिडिफायर का प्रयोग करके उमस के स्तर को कम रखें।

पौधे
कई बार रोजाना पौधों में पानी डालना भी अच्छा नहीं होता, खासकर तब जब वे पहले से गीले हों। पौधों में ज्यादा पानी डालने से उनमें पानी जनित कीड़े पनपने की आशंका रहती है। ये घर के साथ ही बाहरी मौसम में भी व्याप्त होकर हमें कई तरह की एलर्जी का शिकार बनाते हैं। बेहतर तो यह होगा कि आप किसी जानकार व्यक्ति से यह जान लें कि किस पौधे को कितने पानी की आवश्यकता पड़ती है। अपने घर में हवा को शुद्ध करने वाले कुछ पौधे भी लगा लें। स्पाइडर प्लांट, गोल्डन पोथोज जैसे पौधे अंदरूनी हवा की गुणवत्ता को बढ़ाने में समर्थ हैं।

सीलिंग फैन
एलर्जी के लिए बाहरी हवा से ज्यादा जिम्मेदार घर के अंदर की हवा होती है। घर के अंदर तो बाहर की हवा भी घुस जाती है। इस तरह से हमें एलर्जी होने के दोगुने चांसेज रहते हैं। इस बदलते मौसम में सीलिंग फैन के चलने से हवा में व्याप्त सारे कीटाणु फैल जाते हैं। बेहतर तो है कि आप घर में एसी ही चलाकर रहें और सीलिंग फैन के ब्लेड्स को साफ करते रहें.

एलर्जिक अस्थमा
इसके लक्षण अमूमन नाक को प्रभावित करते हैं। यदि आपको किसी विशेष चीज से एलर्जी है तो आपको एलर्जिक अस्थमा होने के चांसेज रहते हैं। नाक को धोने से म्यूकस निकल जाता है। इससे बचने के लिए बाहर से आने पर स्नान जरूर करें। बागवानी के दौरान चेहरे को ढक कर रखें। तूफान, आंधी, बारिश के दौरान घर से बाहर न निकलें। घास पर बिल्कुल न चलें।

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
आंखें लाल हो जाती हैं। इनमें खुजली के साथ ही पानी खूब आता है। इनसे बचने के लिए यात्रा के दौरान सनग्लासेज पहनना चाहिए। कार में बैठे हैं तो प्रदूषण से बचने के लिए कार का शीशा चढ़ाकर रहना बेहतर है। आंखों को लगातार धोते रहें। खाली समय में आंखों पर खीरा रखें। इससे आंखों को ठंडक मिलेगी। आंखों को रगडऩे से बचें, स्टेरायड आई ड्रॉप्स न डालें। बिना डॉक्टर से बात किए कोई भी दवा न लें।