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छैला सांदु-नवरी का प्रेम-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड: Hindi Love Story
Chela Sandu-Navri ka Prem

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Hindi Love Story: लवगा पंचायत के पानसकाम गांव में सांदु मुंडा रहता था। वह बहुत ही अच्छे स्वभाव का था। उसकी नाच-गाने का जवाब नहीं था। वह विभिन्न गांवों के प्रत्येक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। उसके बिना उसके गांव का कोई भी संगीत का आयोजन अधूरा था। सदा उसके फेंटे में बांसुरी बंधी रहती थी। वह अपनी बांसुरी पर ऐसा धुन बजाया करता कि सब मंत्रमुग्ध होकर सुनते। सदा उसके हाथ में एक मुर्गा भी रहता। वह अपने मर्गे के साथ इधर-उधर भटकता रहता। रात भर नाचने-गाने के समय भी मुर्गा उसके साथ रहता। वह नाचने-बजाने में इतना निमग्न हो जाता कि कोई भी बात उसका ध्यान भंग नहीं कर पाती थी। सवेरा होने पर मुर्गा बांग देता, तभी उसकी तंद्रा टूटती।

उसके छैल छबीले स्वभाव के कारण सब उसे छैला सांदु कह कर पुकारते थे। उसकी एक प्रेमिका भी थी। वे खूटी के तारुप गांव में मिले थे। वह पूरी गहराई से उसके प्यार में डूबा था। वह रात के अंधेरे में हर दिन नवरी से मिलने जाता था। दशम फॉल के अथाह जल की बेचैनी की तरह उसके प्यार में तड़प थी। वह नवरी से मिले बिना एकदम नहीं रह पाता था। इतनी दूर बसी नवरी से मिलने के लिए उसने एक नया और अनोखा रास्ता निकाला था।

दशम फॉल के दोनों छोर को मिलाने वाली बेल की सहायता से वह झूलता हुआ खतरनाक दर्रे को पार करता था और तारुप में नवरी से मिलता था। नीचे लहराती नदी और ऊपर एक मजबूत लता के सहारे अपनी प्रेमिका से मिलने जाता हुआ प्रकृति प्रेमी!

उसकी विधवा भाभी भी उससे प्यार करने लगी थी। कम उम्र में विधवा हुई उसकी भाभी के मन में कब प्यार के अंकुर फूटे, उसे पता नहीं चला। पर वह उसे अपना बनाने के लिए जोर डालने लगी थी। उसने लाख कोशिश की लेकिन छैला सांदु को अपना न बना सकी। उसकी भाभी को भी इन लोगों के मिलन के इस अनोखे अंदाज का पता चला। वह बारंबार प्रयास करती रही कि छैला नवरी से मिलने नहीं जाए, पर नवरी से छैला को दूर कर पाना किसी तरह संभव न हुआ। लता अपना धर्म निर्वाह करती रही। प्यार अब बदले की भावना में बदल रहा था। उसके मन में एक भयानक ख्याल जन्म ले रहा था।

भाभी ने चुपके से देखा कि आज भी सांदु नवरी से मिलने जा रहा है। उसकी कमर में बांसुरी है। वह बड़ा छैला बना हुआ है। बेल के सहारे सांदु तारुप की ओर चल पड़ा। उसकी भाभी जल-भून गई। उसके कानों में छैला की बांसुरी की धुन अपने आप गूंजने लगी। उस मीठी धुन में उसे अपने जी का हाहाकार सुनाई दिया।

उसने एक तीखा चाकू उठा लिया और चल पड़ी नदी की ओर। वह गुस्से में बेल को काटने लगी। आधा काट लेने के बाद चुपचाप घर लौट गई।

रात में प्रेम-धुन गुनगुनाते हुए सांदु ने लता को थामा और दशम फॉल को पार करते हुए वापस अपने गांव की ओर आने लगा। बीच में ही बेल टूट कर लटक गई। कुछ समझने से पहले ही छैला सांदु दशम फॉल में गिरकर डूब गया। सब कुछ पल भर में खत्म हो गया।

तब से आज भी सन्नाटे में बांसुरी की आवाज दशम फॉल में सुनाई पड़ती है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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