Hindi Vyangya: हर राजनीतिक दल गारंटी का पहाड़ उसी प्रकार खड़ा कर रहा है जैसे हर शहर में कूड़े का अंबार खड़ा हो रहा है।
गा रंटी शब्द की उत्पत्ति स्पेन में हुई थी। टहलते हुए यह शब्द कई भाषाओं के शब्दकोश के साथ-साथ अंगरेजी के शब्दकोश का भी भ्रमण कर आया। जहां-जहां इसने भ्रमण किया वहां-वहां अपना एक रूप छोड़
आया। अब यह शब्द प्राय: हर भाषा के शब्दकोश में पाया जाता है। इसका अर्थ है किसी विशेष स्थिति में आश्वासन देना। वैसे आश्वासन देना भारतीय राजनीति में कई दशकों से है। बल्कि कहें तो पहले ही चुनाव से है। वर्तमान में यह शब्द सबसे ज्यादा भारत में प्रयुक्त हो रहा है। भारत में भी विशेष रूप से राजनीति में इसका
प्रयोग प्रचुर मात्रा में हो रहा है। हर राजनीतिक दल गारंटी का पहाड़ उसी प्रकार खड़ा कर रहा है जैसे हर शहर में कूड़े का अंबार खड़ा हो रहा है। इन गारंटियों को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। एक दल ने जो गारंटी दी है उसे एम-10 के नाम से जाना जा रहा था।
दूसरे दल ने के-10 गारंटी लॉन्च कर दी थी। गारंटी में मुफ्त का बड़ा प्रभाव रहता है। बिजली, पानी, अनाज, कपड़ा, मकान आदि मुफ्त में देने की गारंटी सभी राजनीतिक दलों के द्वारा दी जाती है।
इसका कारण यह है की राजनेता जनता को वह सब देना चाहते हैं जो उन्हें उपलब्ध होता है। सत्तासीन होते ही उन्हें इतने प्रकार की सेवाएं मुफ्त में मिलती है कि इससे प्रभावित होकर वे जनता को सबकुछ मुफ्त में देने की इच्छा से संक्रमित हो जाते हैं। रोजगार भी बहुत बड़ा मुद्दा होता है गारंटी में। कई दल तो अपनी जनसभा से ही रोजगार की गारंटी का आरंभ कर देते हैं। जनसभा में आना भी अपने आप में रोजगार का ही स्वरूप है।
क्योंकि जनसभा में आने के लिए तो प्रतिलाभ उन्हें मिलता है उसे रोजगार की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए। दो घंटे के लिए जनसभा में उपस्थित होने के लिए अगर गांधी छाप कागज और कंठतर तरल दिया जाए तो यह भी रोजगार का ही एक प्रकार है। जिस सत्तासीन दल को राज्य में लोकसभा चुनाव में कम सीट मिली है वह
आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर रही है। आनेवाले समय में राजनीति में एक विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाने वाला है। यह पाठ्यक्रम का नाम क्या होगा अभी निश्चित नहीं है परंतु इसकी पाठ्य सामग्री स्पष्ट है। इसमें विरोधी दल के उन गारंटियों पर विशद वर्णन की जाएगी जिसे उसने पूरा नहीं किया है। इस क्रम में कुछ ऐसी गारंटियों को भी शामिल किया जाएगा जो विरोधी दल ने दी ही
नहीं है। साथ ही अपने दल की गारंटी का महिमा मंडन किया जाना इस पाठ्यक्रम का एक अध्याय होगा। विरोधी दल के सत्ता में आने से क्या नुकसान होने की गारंटी है इसका भी इसमें उल्लेख होगा।
यथा संविधान नहीं रहेगा, लोकतंत्र आत्महत्या कर लेगा, आतंक का राज हो जाएगा आदि-आदि।
अपने दल के आने से क्या लाभ होने की गारंटी है इसका उल्लेख भी इसमें विस्तृत रूप से होगा। वैसे किसी राज्य में किसी पार्टी के मुख्यलाय पर महिलाएं एक लाख रुपये प्रतिमाह की दर से महीने का आठ हजार तीन सौ तैंतीस रुपये तैंतीस पैसे लेने गईं तो उन्हें वापस भेज दिया गया। शायद तैंतीस पैसे खुले नहीं होने के
कारण ऐसा हुआ होगा। जो भी हो आप तो तैयार रहें इस नए पाठ्यक्रम के अध्ययन के लिए ताकि राजनीति में
आपका सुखद प्रवेश हो सके।
