Hindi Story: कितनी मस्त और खूबसूरत लड़की थी सिया,जो भी देखता दीवाना हो जाता उसका,बातें इतनी मीठी करती
कि लोग चिपक के रह जाते उससे।बात बात पर ठहाके लगाना और हर मुसीबत को चुटकियों में सुलझाना
उसे खूब आता था।अपनी इन्हीं सब विशेषताओं की वजह से पूरे कॉलेज में सब की जुबान पर बस एक ही
नाम था…सिया…सिया।
नया नया कॉलेज ज्वाइन किया था उसने लेकिन बहुत जल्दी पॉपुलर हो गई थी,कितनी ही टैलेंटेड लड़कियों
से घिरी रहती वो,लड़के उससे एक बात करने को तरसते।
पहले ही कॉलेज के फंक्शन ने मिस फ्रेशर का ताज उसके सिर पर सज गया था,जहां वो मिस फ्रेशर थी,वहीं
वरुण मिस्टर फ्रेशर बना।उसने मुस्करा के सिया को बधाई दी और सिया ने भी उसे मुबारकबाद दी।
दोनो की दोस्ती बढ़ने लगी और वो करीब आ गए,उन्हें करीब लाने वाली थी वरुण की चचेरी बहन अदिशा
जो साधारण फीचर्स वाली एक चुलबुली सी लड़की थी जिसने ये महसूस कर लिया था कि सिया की
कमजोरी अच्छा संगीत है और उसका भाई वरुण बहुत अच्छा गायक है।वो क्लासिकल, रैप,डिस्को सभी गाने
बहुत कुशलता से गाता है,साथ ही उसका गिटार बजाना अच्छों अच्छों को अपना बना लेता है।
सिया भी वरुण के प्रोग्राम देखकर उसकी फैन बन गई थी और अनजाने ही उसके इतने करीब आ गई थी कि
उन्होंने हमेशा साथ
जीने मरने की कसमें भी खा लीं।
आदिशा अक्सर कहती, “सिया!तुझे तो मेरा भाई वरुण मिल गया लेकिन मुझे कौन पसंद करेगा?मुझमें तो
कोई ऐसा गुण ही नहीं जो मैं लोगों को प्रभावित करूं?न गाने का हुनर है तेरी तरह,न ही खूबसूरत हूं मैं!”
“तेरा दिल सोने सा चमकीला और दूध सा उजला है…देखना!तुझे कोई बहुत प्यार करने वाला ही मिलेगा।”
सिया कहती तो वो मुस्करा के रह जाती।
फिर कॉलेज स्पोर्ट्स डे में दूसरे कॉलेज की टीम्स आई थीं,वरुण बहुत अच्छा फुटबाल प्लेयर भी था ,कई मैच
उसने कॉलेज को अकेले अपने दम पर जिताए थे,वो अपनी टीम का हीरो था।
“सुना है,गवर्नमेंट कॉलेज का कोई प्लेयर शायद सुजीत नाम है उसका,बहुत कमाल खेलता है,उसे लोग” मैसी”
कहते हैं अपनी टीम का। “आदिशा ने बताया।
“हमारे वरुण के आगे सब भीगी बिल्ली बन जाते हैं ,चाहे मैसी हो या रोनाल्डो!” सिया ठहाका लगा के हंसी
अदीशा की बात पर।
निश्चित दिन,उनका मैच हुआ,सुजीत बहुत ही हैंडसम और कुशल प्लेयर था,वो अपनी टीम का कैप्टन और
गोल कीपर था।उसके गोल पर होते कोई गोल कर दे,ये लगभग असम्भव था।इतना फुर्तीला, चौकन्ना और
बाज सा झपटता फुटबाल पर कि विरोधी खिलाड़ी भी उसकी प्रशंसा किए बिना न रह सके।
सिया को तो शायद पहली बार कोई इतना पसंद आया था,क्या खिलाड़ी है!जितना हसीन दिखने में,उतना ही
गजब खेलने में!उसने ठंडी आह भरते हुए कहा।
“ए मिस!वरुण चहका,क्या इरादे हैं!तुमने किसी और को देखा तो आंखें फोड़ दूंगा।” वो हंसते हुए बोला।
“न न…जानू!तुम्हारे सिवा अब कोई नहीं लेकिन कसम से अगर पहले मिल गया होता तो तुम्हारी तो छुट्टी कर
देती।”
“ऐसा??” उसने आंखें तरेरी और सिया खिलखिला दी।
दूसरी तरफ अदिशा, सुजीत पर अपना दिल हार चुकी थी,”क्या खेलता है!क्या दिखता है! हाय! मै तो सच में
मर मिटी इस पर।”
खेल खत्म होने के बाद,दोनो टीम के प्लेयर्स ने हाथ मिलाया।वरुण ने सुजीत की खुल कर तारीफ की और ये
माना कि वो बहुत अच्छा खेलता है।
अदिशा ने सुजीत से ऑटोग्राफ लिया,वो मुस्कराया, “मैम! मैं इतना भी बड़ा प्लेयर नहीं कि आपको
ऑटोग्राफ दूं।”
“मेरे लिए तो आप इंडिया के सबसे बड़े प्लेयर हैं”,बेबाकी से वो बोल पड़ी और सुजीत उसकी आंखों में देखकर
मुस्करा दिया।
वरुण ने बताया कि ये लड़की उसकी छोटी चचेरी बहिन है तो सुजीत मुस्काया,फिर तो इनसे मुलाकात होती
रहेगी।
सुजीत को आदिशा की मासूमियत भा गई थी और वो तो उस पर फिदा थी ही।
अदिशा, सिया के पीछे लगी थी,”तू तो बहुत स्मार्ट है,हर लड़का तेरे चक्कर में आ जाता है,कुछ टिप्स मुझे भी
दे जिससे मै सुजीत का ध्यान खुद की ओर खींच सकूं।”
सिया मुस्करा कर कहती,”तेरे बस का ये रोग नहीं,सच पूछो तो वो बहुत सुंदर लड़की डिजर्व करता है,तू बुरा मत
मानना पर वो तेरे से नहीं पटेगा।”
बेचारी आदिशा अपना सा मुंह लेकर चुप रह गई,उसे लगा,ये गलत तो नहीं कह रही, मै हूं ही साधारण।
लेकिन होनी तो होकर ही रहती है।सुजीत वरुण से मिलने आता और अदिशा से जरूर मिलता,उसे वो बहुत
सीधी और मासूम लगी और एक दिन उसने वरुण के साथ जाकर,उसके चाचा जी से अदिशा का हाथ मांग
लिया।
बहुत जल्दी कॉलेज खत्म होते ही,उनकी खिलाड़ी कोटे से बढ़िया जॉब लग गई और वरुण और सिया,
अदिशा और सुजीत विवाह बंधन में बंध गए।
सिया को हमेशा ही अदिशा से एक डाह रहती कि ये इतनी साधारण है और उसे इतना खूबसूरत दूल्हा मिला
है जबकि मैं सुंदरी हूं,इतनी रूपसी हूं और मुझे वरुण मिला पर घर गृहस्थी में फंसकर वो धीरे धीरे ये सब भूलने
लगी।
समय के चलते, सिया और वरुण एक प्यारे से बेटे के मां बाप बन गए।उनका बेटा रेहान बड़ी प्यारी बातें
करता और उसकी बुआ फूफा की वो आंखों का तारा था।
दरअसल सुजीत और अदिशा के कोई बेबी नहीं हुआ था और उन दोनो को ही बच्चो से बहुत प्यार था।उन्होंने
हर जगह जाकर मन्नत मांगी,दुआएं की पर भगवान को उन्हें इस खुशी से नहीं नवाजना था शायद। वो दोनो
रेहान को ही अपने बच्चे जैसा प्यार देते,उसके लिए मंहगे खिलौने लाते,काफी काफी वक्त उनके घर ही
गुजारते।
सुजीत के यूं आसपास रहने से सिया भी खुश रहती,कहीं बहुत गहरे मे उसे एक अनजान खुशी मिलती दिल
में,सुजीत ने अदिशा से शादी की जो उसे एक बच्चा भी न दे पाई।उसे लगता कि कभी न कभी उसका दिल
अपनी पत्नी से भर ही जायेगा इसी वजह से।
लेकिन सुजीत अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था,उसे कभी महसूस नही होने देता कि वो बच्चे की चाह में
घुलता है।
अदिशा उससे कहती,”तुम दूसरी शादी कर लो,तुम्हें बच्चों का कितना शौक है और वो उससे नाराज हो
जाता,कहा न!, तुम ही मेरे लिए मेरा बच्चा हो!” वो उसे दुलारता हुआ कहता तो वो उसके सीने से लग जाती।
अक्सर सिया उन्हें सलाह देती कि वो बच्चा गोद ले लें,उसकी जानकारी में दो एक बच्चे थे पर सुजीत को
अपना ही बच्चा चाहिए था,वो दूसरे के बच्चे के लिए तैयार न था।
फिर वरुण ने सुजीत को बताया एक नई,पॉपुलर तकनीक के विषय में और वो थी सरोगेसी के माध्यम से
बच्चा पैदा करना।
क्या बात कर रहा है तू यार!सुजीत चहका,क्या सच में ये संभव है?
क्यों नहीं,हमारे बॉलीवुड के कितने अभिनेता,अभिनेत्री इसे अपना चुके हैं और स्वस्थ,सुंदर बच्चे पा चुके हैं
फिर वो चाहे शाहरूख खान हों या तुषार कपूर,करण जौहर हो या आमिर खान।
लेकिन ऐसी स्त्री हमें कहां से मिलेगी,फिर बच्चे में हम अपने संस्कार कैसे डालेंगे?वो उलझन से बोला।
देखो!जेब भरी हो तो क्या काम संभव नहीं,उसे पूरे प्रेग्नेंसी साथ रख लेना, आदिशा जैसा चाहे ढाल लेगी उस
अनजान औरत को फिर तुम उससे ये काम फ्री में तो करवा नहीं रहे,मुंह मांगी कीमत दोगे उसे इसकी।
पता नहीं,मेरा मन नहीं मान रहा,आखिर बच्चे
में मां का प्रभाव तो बहुत ज्यादा होता है ,अगर मां ही ठीक न हो तो ऐसी औलाद का क्या फायदा?सुजीत खुद
को तैयार नहीं कर पा रहा था इस बात के लिए।
मतलब तुम चाहते हो कि इस काम के लिए कोई जानकर लेडी हो,अब ऐसे भी कहां मिलेगी?ज्यादा सोचो मत
और मेरी बहन को ये खुशी दे दो सुजीत!तुम तो खुद उसे बहुत प्यार करते हो।
शायद इसीलिए मै तैयार जिन किसी ऐरी गैरी लड़की से ये काम करवाने के लिए…सुजीत बोला और चल
दिया घर की तरफ।
घर पहुंचते ही,अदिशा उसके पास आई…कोई मिला इस काम के लिए? मैं बहुत एक्साइटेड हूं,कब मां बन
पाऊंगी मैं भी इस काम के बाद।
“तुम्हें क्या हो गया है अदीशा?कोई औरत मेरे करीब रहेगी तुम बर्दाश्त कर लोगी?” सुजीत भावुक होता बोला।
“लेकिन इसमें औरत तुम्हारे करीब क्यों आयेगी?वो काम तो डॉक्टर कर लेंगे,कई केसेज में तो वो औरत
उसका चेहरा भी नहीं देखती जिसका अंश अपनी कोख में पालती हैं।”
“बहुत जानकारी हासिल कर रखी है तुमने!क्या बात है!”
“तो तुम नहीं मानोगे?” अदिशा रुआंसी हो गई।
प्लीज रो मत, मै कुछ सोचता हूं,सुजीत सोचने लगा था।
उसे सोच में पड़ा देखकर, सिया बोल पड़ी,अगर तुम्हें आपत्ति न हो तो क्या ये काम मैं करूं?
तुम पागल हो गई हो सिया?वरुण कभी तैयार नहीं होगा इस काम के लिए,फिर मैं इतनी भी स्वार्थी नहीं।
इसमें क्या बात है? कहो ना सुजीत,तुम ही कुछ समझाओ इसे। सिया बोली।उसके मन में इस विचार से ही लड्डू
फूट रहे थे,सुजीत का साथ नसीब न हुआ तो क्या,उसका अंश अपनी कोख में तो पालूंगी मै!कितना प्यारा
एहसास है,वो लाल पास गई ये सोचकर ही।
पर सुजीत परेशान हो गया,वरुण क्या सोचेगा?कहीं वो रिएक्ट न करे इस बात पर।उसने शंका जताई।
उसकी फिक्र छोड़ दो,उसे मै मना लूंगी,फिर वो अपनी बहिन की खुशी के लिए ये भी नहीं कर सकता क्या?
सिया तुरुप का इक्का चल चुकी थी और वो सफल भी हुआ।वरुण तिलमिला गया था लेकिन सिया ने उसे
बुरी तरह फंसा दिया था।
वो बहुत नाराज़ था सिया से,उसने उसे अकेले में बहुत समझाया भी,पर वो न मानी।
तुम तो रेहान के पैदा होने पर अपनी फिगर को लेकर इतनी परेशान थीं अब क्या हो गया,दूसरा अटेम्प्ट और
वो भी किसी दूसरे के लिए?बात गले नहीं उतर रही मुझे…
आदिशा दूसरी नहीं हमारे लिए,वो बेशर्मी से बोली।
अदिशा या सुजीत?वरुण भड़क गया था, तुम ठीक नहीं कर रही हो सिया…देख लेना,इसके दुष्परिणाम न
भुगतने पड़े तुम्हें फिर?
आई डोंट केयर!वो लापरवाही से बोली और इस काम को अंजाम दे ही दिया।
ज्यादातर वक्त ,अब अदिशा और सुजीत उसके आसपास रहते,वरुण और सिया के बीच एक अजीब सी
दीवार खिंचती जा रही थी,वो उसके पास आना चाहता तो सिया उसे सुजीत के सपनों मे खोई नजर आती हर
वक्त,उसकी फोटो अपने पास रखती थी वो,कहती बच्चे की शक्ल बिलकुल उसकी जैसे खूबसूरत होगी
फिर।
“बढ़िया बहाना ढूंढा है इस मक्कार ने”,वरुण उसे देख किलस जाता और अपने ही साथ काम करने वाली रूपा
के करीब जाने लगा।कभी शराब को हाथ न लगाने वाला वो आजकल पीने भी लगा था।
ऐसा नहीं है आदिषा कुछ समझती नहीं थी पर मां बनने का लालच उसके सिर चढ़ कर बोल रहा था,फिर उस
सुजीत के प्यार पर विश्वास था,वो उसे कभी धोखा नहीं देगा,ऐसा वो जानती थी।
नियत समय पर सिया के दर्द शुरू हो गए थे,सुजीत आकर उसे नर्सिंग होम ले गया था।बड़े ऑपरेशन से उसने
एक स्वस्थ ,सुंदर गुडिया को जन्म दिया।वो एकदम सुजीत और उसके खुदकी शक्ल का सुंदर मिश्रण
थी।गोल मटोल ,दूध सी गोरी,घुंघराले बालों वाली बेटी को देखकर,सिया का दिल मचल उठा।उसके सीने में
ममता का सागर लहरा उठा और उसके अंतःवस्त्र गीले हो गए लेकिन बच्ची उसके पास नहीं थी।
उसने बेचैनी से नर्स से पूछा,मेरी बेटी कहां है सिस्टर?मुझे उसे फीड कराना है।
वो तो उसके पेरेंट्स ले गए अपने साथ..सिस्टर ने बताया,आपके लिए वो ये पत्र दे गई हैं।
एक पत्र और एक ब्लैक चेक था एक लिफाफे में
सिया
हम अपनी बच्ची गुड्डी को लेकर यहां से बहुत दूर जा रहे हैं,देखो!हम तुम्हारा एहसान इस जन्म तो क्या,अगले
कई जन्मों तक भूल नहीं पाएंगे पर हमारे बीच यही तय हुआ था,तुम अपनी मनपसंद राशि चैक में भर
लेना,प्लीज जो तुमने किया ये उसका मुआवजा नहीं है बल्कि पिछले नौ महीने में तुम जॉब पर भी न जा सकी
उसकी भरपाई करने की एक छोटी सी कोशिश है,उसे गलत न समझना।तुम्हें बिना बताए जा रहे हैं,इसका
अफसोस है पर तुम राजी भी तो न होती आसानी से,फिर वरुण भैया भी कम नाराज़ नहीं तुमसे इस बात को
लेकर,उन्हें मना लेना,वो बहुत अच्छे हैं, मान जायेंगे जल्दी।
अदिशा
सिया अवाक थी,ये क्या हो गया?उसके टांके अभी कमजोर थे,सिस्टर ने मना किया उसे ऐसे में घर जाने को
लेकिन वो मचल गई,वरुण और रेहान मुझे मिलने भी नहीं आए कितने दिनों से? मै हर हालत में आज ही घर
जाऊंगी।
वो लड़खड़ाते हुए घर गई,वहां लॉक था,पड़ोस वाली शांता ने उसे चाबी दी और एक पत्र।
कांपते हाथों और धड़कते दिल से उसने पत्र खोल कर पढ़ना शुरू किया
सिया
आज से हमारे रास्ते अलग हो रहे हैं, मै रेहान को ले जा रहा हूं यहां से दूर और अपनी साथी डॉली से शादी कर
रहा हूं।तुमने मेरे प्यार का मजाक उड़ाया,अब मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा,तुम अपने नए परिवार के साथ खुश रहो।तुम
जैसी आज़ाद ख्यालात वाली लड़की से अब मेरी और नहीं निभेगीं।
वरुण
सिया वहीं चकरा कर गिर गई। आज उसे दो तरफ से झटका मिला था और ऐसा झटका कि वो कहीं की न
रही,न घर की न घाट की।उसकी आंखों के सामने घना अंधेरा छा गया था।
