akbar birbal mom ka shaahajaada
mom ka shaahajaada

mom ka shaahajaada Story in Hindi : एक बार अकबर और बीरबल बाग में घूम रहे थे। अकबर अपनी गोदी में पोते को लिए हुए थे।

तभी अकबर ने बीरबल को चिढ़ाने के लिए कहा, ‘बीरबल, तुम हिंदुओं के भगवान सचमुच अजीब हैं।’

बीरबल ने सोचा कि बादशाह अकबर इस्लाम की जितनी इज्जत करते हैं, उतना ही हिंदू धर्म का भी आदर करते हैं। ये मुझे चिढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी उन्होंने बादशाह से पूछा, ‘क्या हुआ महाराज, कुछ हम भी तो सुनें।’

‘तुम अपने कृष्ण को देख लो। जब भी उनके भक्त उनसे सहायता माँगते हैं, वे खुद दौड़े चले आते हैं। क्या उनके पास सेवक या नौकर नहीं हैं?’

बीरबल ने बादशाह की बात का कोई उत्तर नहीं दिया। लेकिन मन-ही-मन एक योजना बनाई। वह पुतला बनाने वाले एक कलाकार के पास गए और बोले, ‘तुम मोम का एक पुतला तैयार करो। वह देखने में एकदम जहाँपनाह के पोते जैसा होना चाहिए।’

शीघ्र ही पुतला तैयार हो गया। बीरबल ने उसे वैसे ही कपड़े और गहने पहना दिए। अब वह एकदम जहाँपनाह के पोते जैसा दिखाई दे रहा था। इसके बाद बीरबल ने पोते के नौकर को बुलाया और कहा, ‘तुम इस पुतले को अपनी बाहों में उठाकर महल के बगीचे में ले जाओ। वहाँ तालाब के पास पैर फिसल जाने का बहाना करना, जिससे पुतला पानी में गिर जाए।’

बादशाह अकबर बगीचे में पहुँचे। उनके साथ बीरबल भी थे।

नौकर ने ठीक वैसा ही किया, जैसा बीरबल ने कहा था। बादशाह ने देखा कि उनका पोता पानी में गिर गया है। वे दौड़े और स्वयं तालाब में कूद गए। उन्होंने पुतले को उठाया और कहा, ‘अरे, अल्लाह का शुक्र है, यह तो मोम का पुतला है।’

बीरबल भी तालाब के पास पहुँच गए। उन्होंने अकबर से कहा, ‘लेकिन जहाँपनाह, आप खुद तालाब में क्यों कूद पड़े? मदद के लिए आपके पास कोई आदमी या नौकर नहीं है?’

‘सैकड़ों हैं बीरबल! लेकिन अपना पोता मुझे इतना प्यारा है कि मैं किसी को बुलाने तक इंतजार नहीं कर सकता था।’ अकबर ने बताया।

‘आपने बिल्कुल ठीक फरमाया, जहाँपनाह! इसी तरह भगवान कृष्ण को भी उनके भक्त बहुत प्यारे हैं।’ बीरबल ने कहा।

अकबर ने बीरबल की बात का समर्थन किया, ‘तुम ठीक कहते हो बीरबल।’

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