मिस्टर ह्विट कोम्ब के चेहरे पर थोड़ी-सी राहत दिखाई देने लगी। उसका ख्याल था कि एलिस ने वह सब सुन लिया है जो कुछ उस लड़की ने कहा था। उसकी उंगलियां जल्दी-जल्दी हिलने लगीं। उसने एलिस से उंगलियों के इशारे से जल्दी-जल्दी बात करनी शुरू कर दी।
‘धीरे-धीरे।’ एलिस ने उंगलियों के इशारे से कहा, ‘मैंने-तो अभी-अभी इस तरह बातचीत करना सीखा ही है।’  
मिस्टर ह्विट कोम्ब ने उपेक्षा से अपने कंधे उचकाए और काउण्टर के नीचे की दराज खोलकर एक फार्म निकाला और फार्म एलिस के सामने रखकर लड़की की ओर मुड़ गया।
एलिस जब उस फार्म को पढ़ रहा था तो उसने लड़की को कहते सुना, ‘अगर तुम मुझे नौकरी नहीं दिला सकते तो मेरा पैसा वापस कर दो।’
‘मुझे पता नहीं कि तुम किसके बारे में कह रही हो। तुमने पैसों की रट क्यों लगा रखी है। मैं तुमसे पैसा नहीं लूंगा।’ मिस्टर ह्विट कोम्ब ने कहा।
‘लेकिन आपने पैसा लिया हैं मैं उसी पैसे को वापस मांग रही हूं। आपने मुझे नौकरी दिलाने का वायदा किया था। मैं आपके आदमियों को बताऊंगी।’ लड़की ने अपने शब्दों पर जोर देकर कहा।
‘यह बकवास बंद करो। तुम्हारी बात पर कौन विश्वास करेगा।’ मिस्टर ह्विट कोम्ब ने अपनी उंगलियों से काउण्टर को रगड़ते हुए कहा, तुम चोर हो। यह अलग बात है कि तुम जेल से बाहर हो। क्या मैं गलत कह रहा हूं? तुम पर कौन विश्वास करेगा? यहां से फौरन चली जाओ वरना मैं पुलिस को बुलाकर तुम्हें गिरफ्तार करा दूंगा।’ ‘मैं अपनी रकम वापस चाहती हूं।’ लड़की ने दृढ़ता से कहा, ‘मेरे पास अब फूटी कौड़ी भी नहीं है। क्या तुम यह समझते नहीं हो?’
 ‘मैं तुम्हारी इस मामले में कोई मदद नहीं कर सकता।’ मिस्टर ह्विट कोम्ब ने कहा, ‘लगातार एक ही बात को कहते रहने से कोई लाभ नहीं। अगर तुम यह चाहती हो कि मैं तुम्हारी सहायता करूंगा तो यह मत कहो कि मैंने तुमसे पैसा लिया है, तुम्हें झूठ नहीं बोलना चाहिये। झूठ बोलकर कभी कुछ नहीं मिलता।’
 ‘मैंने तुम्हें यह रकम उधार दी है।’ लड़की ने गुस्से से कहा, ‘तुमने ही कहा था कि उधार है और अगर वह उधार नहीं था तो रिश्वत थी।’
 मिस्टर ह्विट कोम्ब मुंह करके हंसे। वह अब अपने आपको पूरी तरह से सुरक्षित समझ रहा था। उसे पूरा-पूरा इत्मीनान हो चुका था कि एलिस यह सब कुछ नहीं सुन सका होगा।
 ‘कोई भी तुम्हारी इस बात पर विश्वास नहीं करेगा कि मैंने तुमसे कुछ लिया है। क्या तुम सोचती हो कि जेल की गूंगी चिड़िया को कोई नौकरी पर रख लेगा। यहां से फौरन चली जाओ। अगर तुम यहां फिर आई तो मैं पुलिस को बुला लूंगा।’
 एलिस ने देखा, लड़की के हाथ घूंसा मारने के लिए मजबूत मुट्ठी के रूप में बंधे हुए थे। फिर उसने काउन्टर थपथपाया और दरवाजे की तरफ बढ़ गई।
 एलिस उस लड़की का चेहरा नहीं देख पाया। लड़की दरवाजा खोलकर तेजी से बाहर निकल गई।
 मिस्टर ह्विट कोम्ब ने गुस्से से दांत पीसे और एलिस के सामने आ खड़े हुए।
 ‘क्या तुमने फार्म की पूरी खानापूरी कर दी?’ मिस्टर ह्विट कोम्ब ने उंगलियों के इशारों से पूछा।
 ‘गन्दा चूहा।’ एलिस ने मन-ही-मन उसे गाली दी और सोचने लगा कि उसके साथ भी उन लोगों ने ऐसा ही किया था। वह फार्म को पढ़कर ही समझ गया था कि मुझे यहां नौकरी नहीं मिलेगी। उस फार्म में स्पष्ट लिखा था जब तक फार्म में तीन संभ्रान्त व्यक्तियों का विवरण नहीं दिया जायेगा उस पर विचार नहीं किया जायेगा। यदि उसने इस बूढ़े से कहा कि वह किसी व्यक्ति का विवरण नहीं दे सकता तब वह उस लड़की की तरह मुझसे भी रकम मांगेगा और फिर मेरे लिए कुछ नहीं करेगा।
 ‘मैंने सुना है कि तुम नौकरी की खोज में आने वाले लोगों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते हो?’ एलिस ने पूछा, ‘उस लड़की के साथ तुम्हारी जो बातचीत हुई थी मैंने सुनी थी।’
 यह कहकर वह काउन्टर के पीछे खड़े ह्विट कोम्ब पर तेजी से झपटा। ह्विट कोम्ब गूंगे की तरह चीखा, लड़खड़ाया और काउन्टर के पीछे जा गिरा। एलिस ने उसकी कोई परवाह नहीं की। लड़की ने इसे चालीस शिलिंग दिए हैं लेकिन बदले में उसे खाली वादों के सिवाय और कुछ नहीं मिला था। उसे अपने आप पर आश्चर्य हो रहा था कि वह उस लड़की के लिए दुखी था। उसके मन में उसके प्रति आकर्षण पैदा हो गया था। एक बहुत ही विचित्र बात थी। बहुत वर्षों से नारी का उसके जीवन में कोई महत्व नहीं रह गया था। लेकिन इस लड़की ने उसके मन में उथल-पुथल मचा दी थी।
 जैसे ही उसने आखिरी सीढ़ी से कदम नीचे रखा वह सोचने लगा कि यह ‘गूंगा-बहरा मैत्री संघ’ कितना बड़ा धोखा है। वह इस संघ का विज्ञापन पढ़कर ही यहां आया था। विज्ञापन पढ़ने पर उसे पता चला कि व्यावसायिक क्षेत्र में गूंगे-बहरों की अत्यधिक आवश्यकता है। यह मैत्री संघ व्यावसायिक फर्मों के संपर्क में था और ट्रेड तथा अनट्रेंड गूंगे-बहरों को काम दिलाता था। मैत्री संघ के सदस्यों ने इस बूढ़े गूंगे को इसका इंचार्ज बना रखा था।
एलिस को नौकरी की जरूरत थी। क्योंकि उसका सारा धन खर्च हो चुका था। अपना मुंह खोलना खतरे से खाली नहीं था इसलिए गूंगे-बहरे की नौकरी ही उसके लिए उचित थी।
जैसे ही वह नीचे पहुंचा उसने उस लड़की को दरवाजे की ओर बढ़ते हुए देखा। फिर उस लड़की ने शीशे के दरवाजे को धक्का दिया और गली में चली गई।
एलिस को उस लड़की में दिलचस्पी पैदा हो गई थी। वह उसका पीछा करने लगा। बाहर भीड़ थी और गर्म हवा बह रही थी। उसके पास कुल बारह शिलिंग और दस पैंस थे। नौकरी पाने के लिए उसने ये पैसे किसी तरह बचा रखे थे। वह सोचने लगा कि अगर इस्क्रेगर मिल जाए तो वह उसकी अवश्य सहायता करेगा।
लेकिन इस्क्रेगर को कहां खोजा जाए?
 
 
उसने भूरे की स्कर्ट वाली लड़की को विलीरस स्ट्रीट में देखा। वह इस लड़की के लिए कुछ नहीं कर सका था और वह लड़की अपरिचित लोगों की भीड़ में नितान्त अकेली थी। वह लड़की का पीछा करने लगा। उसकी आंखें लड़की की टांगों पर जमी हुई थीं। ‘मैंने इतनी सुन्दर टांगें शायद पहले कभी नहीं देखी।’ वह सोचने लगा। उसने भद्दी टांगों वाली अनेक औरतें देखी थीं। वह सोचने लगा कि यह लड़की कौन है? बूढ़े आदमी ने उसे जेल की गूंगी चिड़िया कहा था। उसका विचार था कि वह इस लड़की से बात कर सकेगा और वह उसकी आवाज नहीं पहचान सकेगी। वह उसकी आवाज नहीं सुनेंगी केवल उसके होंठों पर बनने वाले सांकेतिक शब्दों को पढ़ेगी। उसने सोचा कि यह विचार बहुत ही अच्छा है, कोई भी पुरुष जीवन भर अकेला नहीं रह सकता। स्त्री की उसे आवश्यकता रहती ही है। न तो इस लड़की के पास पैसा है और न स्वयं उसके पास ही पैसा है। वह लड़की जेल की चिड़िया थी तो वह एक शरणार्थी था।
चेरिंग क्रॉस वाले बगीचे में बैंड बज रहा था और सुनने वालों की भीड़ लगी हुई थी।
लड़की लोहे के गेट से निकलकर बगीचे में चली गई। वह कंकड़-पत्थर के रास्ते पर धीरे-धीरे चलने लगी। एलिस भी उसके पीछे-पीछे चल दिया। उसने सोचा था कि बगीचे में पहुंचकर लड़की कहीं बैठेगी लेकिन वह खड़ी ही रही। उसके कंधे झुके हुए थे और उसका छोटा-सा जर्जर टोप सूर्य की रोशनी की चमक में जैसे उसका मजाक उड़ा रहा था।
वह लड़की बैंड से कुद दूर सेवाय होटल के सामने खाली एक सीट पर जा बैठी और सेवाय होटल की खिड़की के पास खड़े वेटर की ओर देखने लगी जो रात के खाने की प्रतीक्षा कर रहा था।
एलिस लड़की से सीट दूर आ बैठा। उसने लड़की का अध्ययन किया तो उसे निराशा हुई। लड़की एकदम सीधी-सादी थी। उसका चेहरा भी मामूली-सा ही था। उसके बाल ब्राउन रंग के थे। लेकिन शायद कई दिनों से धोए नहीं गए थे। उसकी आंखें गहरी थीं। उसने अनुमान लगाया लड़की की उम्र बीस साल के लगभग है। अब वह उसे अच्छी तरह देख रहा था। उसे आश्चर्य हुआ कि उस लड़की ने उसे कैसे उत्तेजित कर दिया था। वह नारी की आकृति के अतिरिक्त और कुछ नहीं उसने ये दिन लंदन में अकेले ही बिताए थे। लेकिन इस लड़की के सम्बन्ध में वह स्वयं को परेशान नहीं कर सकता था।
वह लड़की वहां थोड़ी देर ही बैठी। अधिकांश समय वह घूमती ही रही। उसकी आंखें खिड़की की ओर ही टिकी रहीं जहां एक वेटर खड़ा था।
एलिस उस लड़की को भूलकर सिगरेट पीने लगा। और सोचने लगा कि इस्क्रेगर को कहां ढूंढ़ा जाए? काफी देर तक सोचते रहने के बाद वह उठा तो उसने देखा वह लड़की एक बेंच पर बैठी आराम कर रही थी।
तभी अच्छे कपड़े पहने उधेड़ उम्र की एक औरत उस लड़की के पास आ बैठी और सायंकालीन अखबार पढ़ने लगी। उसने अपना हैंडबैग उस लड़की के पास रख दिया।
एलिस ने सहसा देखा कि वह लड़की उस औरत का हैंडबैग खोल रही थी। वह उस औरत के धंधे का समय था इसलिए उसका ध्यान बगीचे में घूमते हुए आदमियों की ओर था। लड़की ने जल्दी से उसका हैंडबैग खोला और उसमें से कई पौंड के नोट निकाल लिए।
एलिस ने उस लड़की को नोट निकालते हुए देखा लेकिन खामोश बैठा रहा।
और तभी अचानक ही उस औरत ने अखबार एक ओर फेंक कर उस लड़की की कलाई पकड़ ली और जोर से चिल्लाई, ‘तुम चोर हो।’
एलिस ने सोचा कि इस समय इस लड़की पर अहसान करके इस बड़ी आसानी से काबू किया जा सकता है। वह तेजी से उठकर उस औरत के पास पहुंच गया।
उसने उस औरत की बाहें थपथपाकर कहा, ‘इस लड़की को छोड़ दो।’
वह औरत एलिस के पतले और घाव के निशान वाले चेहरे को देखने लगी। उसने लड़की की कलाई छोड़ दी और फिर एलिस के चेहरे को देखते हुए ठहाका मार कर हंस पड़ी।
एलिस ने झपटकर लड़कर लड़की की बांह थाम ली और उसे खींचते हुए गुर्राया, ‘आओ।’
और फिर उसकी बांह अपनी बांह से जकड़े हुए बाग की ओर भाग गया। 
 
 
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