एलिस दरवाजे की तरफ लपका। उसने लड़की को दरवाजे से दूर हटा दिया और उसे चुप रहने का इशारा करके, दरवाजा थोड़ा-सा खोल दिया।
 दरवाजे के बाहर मिसेज व्हीलर खड़ी थी।
 ‘नमस्ते।’ मिसेज व्हीलर ने कहा।
 ‘क्या है?’ एलिस ने बड़ी उपेक्षा से पूछा।
 वह मुस्कराने लगी। उसकी आंखें चमक रही थी। उसने मुस्कराते हुए पूछा, ‘शाम का अखबार देखा?’
 मिसेज व्हीलर ने अखबार उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘जरा ‘छपते-छपते’ कॉलम को पढ़ो।’
 एलिस ने छोटा-सा कॉलम पढ़ा। उसका दिल मुंह को आने लगा। उसने मन-ही-मन कहा, ‘अब क्या करना चाहिये।’
 उस कॉलम में कुछ पंक्तियां थीं। लेकिन पर्याप्त थीं।
 उस कॉलम में उसका और उस लड़की का पूरा-पूरा हुलिया दिया गया था। लड़की का तो नाम तक दे दिया गया था। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए पूछताछ कर रही थी।
 उसने चुपके से अखबार मिसेज व्हीलर को वापस देते हुए कहा, ‘इस सिलसिले में मुझे क्या करना है?’
 ‘तुम गिरफ्तार हो सकते हो।’ मिसेज व्हीलर ने कहा और उंगली से अंदर की ओर इशारा करके बोली, ‘क्या विचार है?’
 ‘सोच समझकर बात करो। तुम नहीं जानती कि तुम क्या कर रही हो।
 ‘इस तरह की धमकी से तुम लोग मुसीबत में पड़ सकते हो। वह तो यहीं है। मैंने तुम दोनों को बातें करते सुना है।’ मिसेज व्हीलर ने कहा। ‘कुल सात पौंड की ही तो बात है। उसने इतनी रकम ही तो चुराई है। वह मुझे दे दो और अपना रास्ता नापो। मैं कुछ नहीं बोलूंगी।’
 ‘तुम अपने आपको बहुत होशियार समझती हो।’ एलिस ने गुस्से से दांत पीसते हुए कहा और दरवाजा खोल दिया, ‘जाओ, वह सामने खड़ी है चोर।’
 मिसेज व्हीलर ने व्यंग्य भरी मुस्कराहट के साथ उस लड़की को देखते हुए कहा, ‘देखने में तो विशेष सुन्दर नहीं है। फिर भी तुम्हारे लिए ठीक है। तुम भी तो सुन्दर नहीं हो। खैर, पैसे निकालो और यहां से फौरन चले जाओ। मैं तुम जैसे लोगों को अपने घर में देखना नहीं चाहती।’
 लड़की एलिस की ओर देखने लगी।
 ‘इसे रकम दे दो। सारी की सारी रकम। और फिर यहां से चली जाओ। यह तुम्हारी तलाश में थी।’
 मिसेज व्हीलर ने बिना सोचे-समझे कहा। ‘और नौजवान उसकी जगह तुम्हें…?’
 एलिस के शरीर में एक सनसनी-सी दौड़ गई। उसने ग्रेस क्लार्क का अपना पर्स खोलते हुए सुना। उसके मन में मिसेज व्हीलर को समाप्त कर डालने की इच्छा जाग उठी। उसने दीवार पर लटके सुनहरी नीले पॉट को खींच लिया। और मिसेज व्हीलर जब रकम लेने अंदर आई तो अवाक् रह गई। लेकिन इससे पूर्व कि वह चीख पाती एलिस ने वह पॉट उसके सिर पर दे मारा। पॉट उसके सिर से टकराकर फूट गया। मिसेज व्हीलर धड़ाम से जमीन पर जा गिरी। उसका सिर खून से लथपथ हो गया।
 एक पल एलिस उसके पास खड़ा उसे ताकता रहा। फिर दरवाजे की ओर लपका। ग्रेस ने झपटकर उसका हाथ थाम लिया।
 ‘इसे इस तरह छोड़कर मत जाओ। तुमने इसे चोट पहुंचाई है।’ ग्रेस ने घबराकर कहा।
 एलिस ने उसकी ओर देखा। उसका सारा ध्यान नीचे गली से आते हुए शोर की ओर था। उसने खिड़की से झांककर देखा जिस लड़की ने होटल में उसकी सेवा की थी वह हाथ में अखबार लिए गली में खड़ी थी। उसके साथ एक कॉन्स्टेबल भी था। उसे वह छोटा घर दिखा रही थी। उसका चेहरा काफी उत्तेजित दिखाई दे रहा था। कॉन्स्टेबल उसकी बातों में काफी दिलचस्पी लेता दिखाई दे रहा था।
 एलिस ने ग्रेस का हाथ कसकर पकड़ लिया, ‘हम दोनों मुसीबत में फंस गए हैं। इस मुसीबत में हम इकट्ठे हैं। समझती हो? चलो, यहां से निकल चलें।’
  * * *
 
 जिस घाव के कारण वह वेलसन से आया था अब वहीं घाव उसके लिए जानलेवा बन गया था। अब उसका पूरा हुलिया सारे समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुका था।
 उसने निश्चय किया कि जब तक स्थिति का अच्छी तरह अध्ययन न कर लिया जाए तब तक उसे कहीं छिप जाना चाहिये।
 उसे ग्रेस के साथ छोटे से मकान से भाग निकलने में कोई कठिनाई नहीं हुई थी। जिस समय कॉन्स्टेबल आगे के दरवाजे की घंटी बजा रहा था वे दोनों पिछले दरवाजे से निकल कर भाग गए थे। सड़क पर आकर उन्होंने एक टैक्सी ले ली थी और विंग क्रास स्टेशन पर पहुंच गए थे और फिर वहां से अंडर ग्राउंड ट्रेन से बेकर स्ट्रीट चले गये थे।
 टैक्सी ड्राइवर ने एलिस के घाव को बड़ी दिलचस्पी से देखा था। एलिस जान गया था कि वह घाव के उस निशान को भूलने वाला नहीं है। अगर उसने शाम का अखबार पढ़ा होता तो वह पुलिस को सूचित कर देता कि उसने इस हुलिया के एक लड़के-लड़की को विंग क्रॉस जाते हुए देखा है जिसकी पुलिस को तलाश है लेकिन उसे इस बात की कोई चिन्ता नहीं थी। उसने इसीलिए वहां तक जाने के लिए टैक्सी की थी। वह यही चाहता था कि पुलिस यही सोचे कि वह उत्तर की ओर जा रहा है।
 उसने ग्रेस से कहा कि वह बेकर स्ट्रीट की टिकट खरीद लाए और वह स्वयं एक ओर खड़ा रहा। ट्रेन में उसने अपने मुंह पर रूमाल रखे रखा। जैसे उसके दांतों में दर्द हो।
 गाड़ी जब सुरंग से गुजर रही थी जो अचानक उसे एक योजना सूझ गई। वह जानता था कि वह अपने पीछे निशान छोड़े जा रहा है और पुलिस उसके पीछे है। उसे किसी ऐसे स्थान पर जाना चाहिये जहां पर इस स्थिति पर गंभीरतापूर्वक विचार कर सके। लन्दन से बाहर चले जाना उसे आवश्यक दिखाई दे रहा था। लंदन में पुलिस अधिक थी। क्या पता कब कोई कॉन्स्टेबल उस पर आ झपटे। उसे यह घटना याद आ गई। जब उसकी मां मृत्यु शैया पर थी और वह रास्ते में था। उसके पिता ने उसे ईस्टवुड में एक वृद्धा स्त्री के पास रहने के लिए कहा था। वहां वह दो महीने तक खेतों में भटकता रहा था। वहां की एक-एक गली-गली और एक-एक रास्ते से परिचित था। ट्रेन में बैठे-बैठे वह सोचने लगा कि जब तक कोई योजना न बन जाए छिपने के लिए ईस्टवुड ही सबसे सुरक्षित स्थान रहेगा।
 बेकर स्ट्रीट पहुंचकर उसने ग्रेस से कहा कि वह ईस्टवुड जाने के लिए दो टिकट ले आए।
 उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि ग्रेस कुछ समझने की कोशिश कर रही है। वह उससे जैसा करने के लिए कहता था वह वैसा ही करती चली जाती थी। उसके चेहरे की भाव-भंगिमा देखकर उसे आश्चर्य भी होता और क्रोध भी आता। वह इस बात को समझ नहीं पाया था कि जब से ग्रेस ने उसे मिसेज व्हीलर पर आक्रमण करते हुए देखा था तभी से वह अपनी शक्ति खो बैठी थी। उसे विश्वास हो गया कि मिसेज व्हीलर की मृत्यु हो चुकी है। यदि वे पकड़े गये तो उसे भी दोषी मान लिया जाएगा और एलिस के साथ उसे भी फांसी पर लटका दिया जायेगा। इस विचार से उसकी सोचने की शक्ति समाप्त हो गई थी। वह जैसे पत्थर की मूर्ति बन गई थी। एलिस से भयभीत होते हुए भी उसे एलिस पर दृढ़ विश्वास था कि यदि उसे दलदल से कोई निकाल सकता है तो वह एलिस ही है। उसने उसके साथ रहने का निश्चय कर लिया।
 जब ट्रेन उन्हें लेकर लंदन से बाहरी क्षेत्र से गुजर रही थी तो एलिस सोच रहा था कि अब उसे ग्रेस को अपने साथ रखना ही होगा। अपने बचाव के लिए उसे अपने साथ ग्रेस को रखना आवश्यक था। अखबारों के आधार पर उसे कोई नहीं पकड़ पायेगा। वह बहुत ही सीधी-सादी लड़की थी।
 एलिस ने अपना हाथ चेहरे के घाव पर रखा जैसे इस घाव के रूप में उसका नाम चेहरे पर लिखा हो। उसे अपनी आवाज बदलनी होगी। चेहरे के इस घाव को छिपाना होगा।
 उसने ग्रेस की सहायता ली थी। जब उसने उस औरत के पर्स में से रुपए निकाले थे तो उसी ने उसे बचाया था। जब वह भूख से बिलबिला रही थी तो उसे खाना दिया था और अब ग्रेस की बारी थी। देखना था कि वह उसकी कितनी सहायता करती है।
 उसने देखा, ग्रेस भयभीत और चकित-सी उसकी की ओर देख रही थी।
 ‘तुम्हें उसे इस तरह नहीं मारना चाहिये था।’ ग्रेस ने धीरे से कहा।
 मिसेज व्हीलर का चित्र उसकी आंखों के आगे नाच उठा।
 वह जमीन पर पड़ी थी और उसके सिर से खून बह रहा था।
 ‘तुमने ऐसा क्यों किया?’ ग्रेस ने उसके बाजुओं को देखते हुए पूछा, ‘उसे वह रकम दे देनी चाहिये थी।
 एलिस खिड़की से बाहर की ओर देखने लगा। वह जानता था कि वह अपने इस स्वभाव को अपने वश में रख पाने में हमेशा असमर्थ रहा है।
 खेतों की कतारें पीछे भागती चली जा रही थीं। एलिस को स्टेशन से दूर टेलेतम गोल्फ कोर्स की याद आ गई जहां वह खूब भागता-दौड़ता था। खेला करता था। उसने वहां जाने का निश्चय कर लिया। वहां से क्लब में सो जाया करेंगे और अगर भाग्य ने साथ दिया तो ग्रेस को औरतों के लॉकरों से कुछ-न-कुछ निकालने में सफलता भी मिल जाएगी।
 यह विचार उसे बहुत पसन्द आया। उसने आगे झुककर ग्रेस के घुटनों को थपथपाया। ग्रेस ने उसकी ओर देखा और शरमा गई।
 एलिस ने उसे अपनी योजना बताई। मैं तुम्हें कपड़े ला दूंगा। इस समय तो तुम्हें कोई भी पहचान लेगा। नई पोशाक में तुम्हें कोई पहचान न सकेगा।
 वह चुपचाप बैठी सुनती रही।
 ‘हिम्मत से काम लो।’ एलिस ने कहा, ‘पानी तुम्हारे गले तक पहुंच गया है। इस समय हम दोनों को इकट्ठा ही रहना होगा, समझीं। वरना हम दोनों की खैर नहीं।
 कुछ क्षणों के बाद ट्रेन वेलसन स्टेशन पर पहुंच गई। यहां से गोल्फ कोर्स के लिए सीधा रास्ता जाता था।
 ‘आओ।’ एलिस ने कम्पार्टमेंट का दरवाजा खोलते हुए कहा। ‘जल्दी करो ग्रेस।’
 वह खतरे से पूरी तरह सावधान था। हो सकता था कोई उन्हें पहचान लेता। लेकिन यदि उन्हें किसी ने न पहचाना तो वे गोल्फ कोर्स में दो-चार दिन आराम से रह सकेंगे।
 वे दोनों एक सूने स्थान पर उतरे और प्लेटफार्म से बाहर की ओर चल दिए। गेट पर कोई टिकट कलक्टर नहीं था। एलिस ने नोटिस बोर्ड पर नजर डाली। उस पर लिखा था-‘अपनी टिकट बुकिंग क्लर्क को दे दीजिये।
गोल्फ का एक खिलाड़ी जिसके कंधे पर गोल्फ का बैज लगा था बुकिंग ऑफिस की खिड़की पर खड़ा था और प्लेटफार्म पर खड़ी गाड़ी की ओर बड़ी बेचैनी से देख रहा था। बुकिंग क्लर्क टिकट की लिस्ट देखने में व्यस्त था। एलिस ने ग्रेस को कसकर पकड़ा और उसे लेकर तेजी से स्टेशन से बाहर निकल गया। उसका ख्याल था कि पीछे से उन्हें कोई आवाज लगाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गोल्फ के खिलाड़ी को टिकट देने में बुकिंग क्लर्क इतना व्यस्त था कि उसने उनकी ओर ध्यान ही नहीं दिया। वे दोनों सीधे गोल्फ कोर्स की ओर चल दिये।
 एलिस सोचने लगा, रात को गोल्फ कोर्स क्लब खुला तो होगा। गोल्फ का कोई-न-कोई खिलाड़ी वहां मौजूद तो होगा और फिर जैसे ही वे क्लब के निकट पहुंचे उन्हें एक खिड़की में रोशनी दिखाई दी। किन्तु जैसे ही उन्होंने उस रोशनी की ओर देखा रोशनी बुझ गई।
 वह ग्रेस को झटका देकर सुनसान में ले गया। ग्रेस की हैरानी से चीख निकल गई। एलिस की ओर देखते हुए वह अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करने लगी।
 एलिस ने डपट कर कहा, ‘मैं तुम्हारी जान नहीं ले रहा। बेवकूफ, कोई आ रहा है। चुपचाप खड़ी रहो।’
 वे दोनों एक ओर छिपकर खड़े हो गये। थोड़ी देर के बाद एक आदमी उधर से गुजरा। उसकी टोपी पीछे की ओर थी। उसका चौड़ा चेहरा बहुत चमकदार था। वह सीटी बजाता चला जा रहा था।
 एलिस ने उसकी बगल में अखबार दबा देखा।
 जब वह आदमी दूर निकल गया तो वे दोनों क्लब हाउस की ओर चल पड़े।
 ‘तुम यहीं ठहरो ग्रेस। लेकिन अपनी आंखें खुली रखना और सावधान रहना। अगर तुम किसी को आते देखो तो मुझे तत्काल सूचित कर देना। मैं अंदर जा रहा हूं। तुम कोई शरारत मत करना और चुपचाप यहीं खड़ी रहना। अगर तुमने कोई शरारत की तो अच्छा न होगा।
 ग्रेस को वहीं छोड़कर क्लब हाउस की ओर चल दिया। इधर-उधर देखते हुए वह धीरे-धीरे बिल्डिंग के पास पहुंच गया। उसने अंधेरे कमरों में झांक कर देखा। अंदर कोई नहीं था।
 फिर एलिस ने पीछे के दरवाजों को देखा। दरवाजे अच्छी तरह से बंद थे। वह एक खिड़की के पास चला गया। उसने मुक्का मारकर शीशा तोड़ दिया और अंदर हाथ डालकर कुंडा खोल लिया। फिर वह खिड़की खोलकर अंदर चला गया।