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ग्रीन कॉफी

Benefits of green coffee: समय के साथ- साथ चाय के अलग- अलग फ्लेवर्स जैसे- ब्लैक टी, लेमन टी, ग्रीन टी के बाद अब ग्रीन कॉफी भी बहुत अधिक चलन में आ रही है। हालांकि अभी इसके लाभ और नुकसान को लेकर अभी कई तरह के शोध कार्य चल रहे हैं। लेकिन फिर भी जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके बीच ग्रीन टी की ही तरह ग्रीन कॉफी भी बहुत लोकप्रिय है।

क्या है ग्रीन कॉफी 

ग्रीन कॉफी असल में कच्चे, बिना सिके हुए कॉफी के बीज होते हैं। इन बीजों को इसी रूप में पीसकर काम में लाया जाता है। इन्हें इनके प्राकृतिक और कच्चे रूप में इस्तेमाल करने के कारण इसे ग्रीन कॉफी कहा जाता है।

वजन घटाने में है असरदार

इनमें अधिक मात्रा में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है, जो पेट और कमर के आसपास विसरल फैट को जमा होने से रोकता है। साथ ही यह शरीर के मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाता है, जो वजन कम करने में मदद करता है। क्लोरोजेनिक एसिड भोजन के स्टार्च से शुगर को और फैटी कंपाउंड को एब्जोर्ब कर लेता है जिससे शरीर की चर्बी कम होने लगती है जो वजन कम होने का कारण बनता है। शोधों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से ग्रीन कॉफी का सेवन करते हैं, वे महीने में करीब डेढ़ से दो किलो वजन कम कर सकते हैं। ग्रीन कॉफी पीने वाले लोग, इसे न पीने वालों की तुलना में 7-8 किलो तक वजन ज्यादा कम कर सकते हैं।

जबकि सामान्य या ब्राउन कॉफी में भुने या सिके हुए बीज होते हैं। कॉफी को भूनने से हैल्दी और प्राकृतिक रसायन जैसे क्लोरोजेनिक एसिड नष्ट हो जाते हैं। इसलिए जो लोग वजन कम करना चाहते हैं वे अपनी डाइट में ग्रीन कॉफी को शामिल कर सकते हैं।

कब और कैसे पियें

इसे सुबह खाली पेट या ब्रेकफ़ास्ट के साथ ले सकते है, एकसरसाइज़ करने से पहले या बाद में ग्रीन कॉफी लेना वजन घटाने में मदद करता है। इसे दोपहर खाने के पहले या शाम को स्नेक्स के साथ भी ले सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें जरूरत से ज्यादा कोई भी चीज बुरी होती है इसलिए दिन में 2-3 कप से ज्यादा न पिएँ।

यदि इसका ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो यह फायदे की जगह नुकसान भी कर सकती है। आइये जानते है ज्यादा पीने से कौन से साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते है 

  • इसे ज्यादा मात्रा में लेने से पेट खराब या इससे जुड़ी और समस्यायें हो सकती हैं। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
  • कभी- कभी सिर- दर्द, चक्कर या एन्जाइटी की समस्या देखी जा सकती है।
  • हाई ब्लड प्रैशर, डिप्रेशन, ओस्टिओपोरेसिस और इरीटेबल बाउल सिड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह नुकसानदायक हो सकती है।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

 

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