Regular Check-Ups Importance: आमतौर पर देखा गया है कि लोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही हेल्थ चेकअप करवाते हैं या फिर कोई गंभीर लक्षण दिखने पर ऐसा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने से आप किसी भी गंभीर समस्या से बच सकते हैं। जी हां, यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है या किसी बीमारी की शुरुआत हुई है तो आप नियमित हेल्थ चेकअप से उसके बारे में जानकर समय पर इलाज करवा सकते हैं। चलिए जानते हैं, नियमित हेल्थ चेकअप के क्या फायदे हैं। साथ ही जानेंगे रेगुलर हेल्थ चेकअप कब, किस उम्र में करवाना शुरू कर देने चाहिए और कौन-कौन से चेकअप रेगुलर करवाने चाहिए।
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नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित स्वास्थ्य जांच से आप सेहतमंद रह सकते हैं और आने वाली किसी भी गंभीर चुनौती से समय से पहले सुरक्षा के लिए रेगुलर हेल्थ चेकअप जरूरी हैं। इतना ही नहीं, नियमित हेल्थ चेकअप से रोग को बढ़ने से रोक सकते हैं, समय से पहले इलाज करवा सकते हैं। छोटी बीमारी को बड़ा बनने से रोका जा सकता है। बेशक, आप बहुत हेल्दी हो लेकिन आपको उम्र, लिंग, व्यवसाय, जातीयता और संस्कृति की परवाह किए बिना नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि मेडिकल हेल्थ चेकअप महंगे होंगे और अनावश्यक खर्चा बढ़ेगा। लेकिन लोग ये भूल जाते हैं कि किसी बीमारी को शुरूआती चरण में निदान करने से खर्चा कम होता है जबकि बामारी बढ़ने पर चेकअप, इलाज और अन्य खर्चे दोगुना बढ़ जाते हैं।
स्वास्थ्य जांच कब और कितनी बार करवानी चाहिए
स्वास्थ्य जांच कितनी बार और कब-कब करवाएं यहां ये जानना भी जरूरी है। उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम कारक और शरीर में दिख रहे लक्षणों के आधार पर स्वास्थ्य जांच का समय अलग-अलग हो सकता है। लेकिन फिर भी आप इसका अनुकरण कर सकते हैं –
20 से 30 की उम्र: इस उम्र में सामान्य स्थितियों की जांच के लिए साल में एक बार जांच की सिफारिश की जाती है।
30 से 50 की उम्र: इस उम्र में डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी स्थितियों के लिए अतिरिक्त जांच की आवश्यकता होती है तो हर साल एक से दो बार जांच करवानी चाहिए। लेकिन यदि आपका पारिवारिक इतिहास इन बीमारियों का शिकार हो चुका है तो आपको डॉक्टर की सलाह पर साल में 2 बार जांच करवानी चाहिए और डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी लाइफस्टाइल डिजीज के लिए गर तीन महीने में जांच करवानी चाहिए।
50 से 60 की उम्र और उससे अधिक: बढ़ती उम्र से शरीर में कई परिवर्तनों की जांच के लिए, पुरानी बीमारियों के प्रबंधन और इलाज क लिए सालाना फुल बॉडी चेकअप होना चाहिए।
कौन-कौन से परीक्षण करवाएं

अब यहां ये सवाल उठता है कि आखिर कौन-कौन से टेस्ट करवाना जरूरी है। सामान्य जांच में कुछ परीक्षण शामिल किए गए हैं। जैसे –
उच्च रक्तचाप: उच्च रक्तचाप के लक्षण बेशक दिखाई नहीं देते लेकिन ये हृदय स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। नियमित रक्तचाप जांच से हाई या लो ब्लड प्रेशर की पहचान करने में मदद मिलती है, जिससे शीघ्र प्रबंधन होना संभव है और हृदय रोग और स्ट्रोक की संभावना को कम किया जा सकता है।
कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग: बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल स्तर हृदय के लिए गंभीर खतरा है, जो व्यक्तियों को हृदय रोग और स्ट्रोक का शिकार बनाता है। नियमित कोलेस्ट्रॉल जांच ये पता लगाने में मदद करता है कि कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में है या नहीं। इससे जोखिमों को कम करने के लिए आहार और जीवनशैली में समय पर बदलाव किया जा सकता है और डॉक्टर की सलाह पर दवाएं भी शुरू की जा सकती हैं।
रक्त ग्लूकोज परीक्षण: मधुमेह, एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों से लेकर बड़ी उम्र तक किसी को भी हो सकती है। यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो ये स्वास्थ्य पर कहर बरपाता है। नियमित रक्त ग्लूकोज परीक्षण शीघ्र इलाज में मदद करता है, तंत्रिका क्षति, गुर्दे की बीमारी और अंधापन जैसी समस्याओं को रोकने के लिए रक्त ग्लूकोज परीक्षण बहुत जरूरी है।
कैंसर स्क्रीनिंग: मैमोग्राम, पैप स्मीयर, प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) परीक्षण और कोलोनोस्कोपी जैसे स्क्रीनिंग कई तरह के कैंसर और उसकी स्टेज पता लगाने में मददगार होते हैं, समय से पहले बीमारी का निदान होने पर प्रभावी इलाज किया जा सकता है और असमय मृत्यु से बचा जा सकता है।
बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) माप: बीएमआई की निगरानी से वजन की स्थिति का आकलन करना और मोटापे की पहचान करना आसान होता है। बढ़ा हुआ वजन मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के लिए एक जोखिम कारक है। अनियंत्रित वजन होने पर समय रहते स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
नियमित स्वास्थ्य जांच के लाभ
प्रारंभिक जांच और हस्तक्षेप: नियमित स्वास्थ्य जांच स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाने में मदद करती है, जिससे बीमारियों को बढ़ने और उनसे होने वाली जटिलताओं को रोकना संभव हो पाता है।
समय से पहले देखभाल: नियमित स्वास्थ्य जांच से लोगों को बीमारी को समय पर दूर करने या उचित इलाज लेने और किसी पुरानी बीमारियों के विकास के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है और ओवरऑल सेहतमंद रहने में मदद मिलती है।
स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देना: स्वास्थ्य जांच हेल्दी जीवनशैली में बदलाव के लिए प्रेरित करने का काम करती है। रेगुलर हेल्थ चेकअप से नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और धूम्रपान बंद करने जैसी आदतों को बढ़ावा देती है, जो इष्टतम स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक होती हैं।
जीवन की गुणवत्ता में सुधार: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जल्दी समाधान ढूंढकर और बचाव के उपायों को अपनाकर, नियमित स्वास्थ्य जांच जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में योगदान करती है।
संक्षेप में समझे तो, नियमित स्वास्थ्य जांच संपूर्ण स्वास्थ्य की आधारशिला है, जो बीमारी का जल्दी पता लगाने और इलाज के साथ बचाव के उपाय ढूंढने में महत्वपूर्ण योगदान करती है। उम्र और जोखिम कारकों के अनुरूप हेल्थ चेकअप करवाकर, व्यक्ति उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसेखतरों से बचाव कर सकते हैं। इतना ही नहीं, नियमित हेल्थ चेकअप स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
