शरीर में होने वाली सूजन को गर्भवती महिलाएं कैसे करें दूर: Swelling in Pregnancy
Swelling in Pregnancy

Swelling in Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनमें से एक है-शरीर के विभिन्न अंगों खासकर हाथ-पैरों में आने वाली सूजन। गर्भवती महिलाओं के पैरों में सूजन गर्मी के मौसम में ज्यादा होेती है। सुबह सोकर उठने पर कम होती है, दिन में काम करने या घूमने-फिरने से पैरों सूजन बढ़ती है। लेकिन आराम करते समय तकिये पर पैरों को शरीर से ऊपर की तरफ रखने से सूजन कम होने लगती है। हालांकि यह सूजन डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओं के अंग सूजकर इतने भारी हो जाते हैं कि हाथ में पहनी जाने वाली चूड़ियां या अंगूठियां, पैर के चप्पलें-जूते टाइट होने लगते हैं। पैरों में दर्द की शिकायत रहती है, उनका चलना या एक्टिविटी करना काफी मुश्किल हो जाता है। आंकड़ों की माने तो गर्भावस्था में तकरीबन 75-80 प्रतिशत महिलाएं सूजन की समस्या से जूझती है।

सूजन के होते है दो कारण

गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन होने के मूलतया दो कारण हैं- पहला गर्भ में विकसित हो रहे बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए शरीर में फ्ल्यूड रिटेंशन ज्यादा होना। दूसरा-गर्भावस्था में रक्त संचरण धीमा होना। गर्भावस्था की पहली तिमाही में शरीर मे प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने की वजह से पूरे शरीर मे हल्की सूजन होती है जिसे पफीनेस कहा जाता है। दूसरी तिमाही में महिला के शरीर का ब्लड वाॅल्यूम दुगना हो जाता है जिसकी वजह से शरीर में वाॅटर रिटेंशन होने लगती है और हाथ-पैर में सूजन काफी बढ़ जाती है।

तीसरी तिमाही में सूजन सबसे ज्यादा आती है। तीसरी तिमाही में यूटरस और बच्चे का आकार काफी बड़ा हो जाता है जिससे महिलाओं हमारे पैरों की रक्त कोशिकाओं में सबसे ज्यादा दवाब पड़ता है। जिससे रक्त संचरण बाधित हो जाता है यानी पैरों से डीऑक्सीजनेटेड रक्त वापस ऊपर हृदय की तरफ नहीं जा पाता और पैरो में बने रहने के कारण सूजन का कारण बनता है।

क्या है खतरा

असल में गर्भावस्था में महिलाओं के हाथ-पैर में सूजन आना आम बात है। लेकिन कभी अचानक सूजन बहुत ज्यादा बढ़ रही हो, पूरे शरीर में सूजन आने लगे तो डाॅक्टर को कंसल्ट करना जरूरी है। कई बार यह सूजन शरीर में कुछ बीमारियों की वजह से भी होती है जिसका असर गर्भावस्था में ज्यादा देखने को मिलता है जैसे- ब्लड प्रेशर बढ़ने से होने वाला प्री-एक्लेमसिया या प्रेगनेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन, थायराॅयड। समय पर उपचार न किया जाए तो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

Swelling in Pregnancy

सूजन दूर करने के लिए क्या करें- अगर आपके साथ या आपके जानकार किसी महिला को ऐसा हो रहा तो घबराएं नहीं, घर पर कुछ उपाय करके इस समस्या में आराम पा सकती हैं-

नमक का कम सेवन आहार में सोडियम कम मात्रा में लें क्योंकि ये शरीर में फ्ल्यूड रिटेंशन का कारण है। आहार, सलाद या रायते में ऊपर से नमक कम से कम डालना चाहिए। कैन और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करना चाहिए।

पोटेशियम से भरपूर आहार लें- पोटेशियम शरीर में फ्ल्यूड को बैलेंस करता है। शरीर में पोटेशियम की कमी से सूजन बढ़ती है। अपने आहार में पोटेशियमयुकत खाद्य पदार्थो को शामिल करना चाहिए, जैसे-नारियल पानी, कीवी, पालक आलू, बीन्स, शकरकंदी, गाजर, केला, संतरा, अनार आदि।

पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं- शरीर में वाॅटर रिटेंशन के बावजूद पानी ज्यादा (10-12 गिलास या 3-4 लीटर) पीना चाहिए। पेशाब खुल कर आता है, उसके साथ शरीर से सोडियम निकल जाता है और सूजन कम होती है।

पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार लें- आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर ताजे फल, सूखे मेवे, बेरी ज्यादा से ज्यादा शामिल करें। प्रोटीन और विटामिन सी से भरपूर साइट्रस फल खाएं।

हैड-लो पोजीशन में लेटें- पैरों में ज्यादा सूजन होने पर हैड-लो पोजीशन में लेटें यानी सिर नीचे और पैर के नीचे तकिया रख कर ऊंचे हों। पैर दिल के लेवल से ऊपर होने चाहिए। डीऑक्सीजनेटेड ब्लड पैर से हृदय तक वापस आने में मदद मिलती है और पैरों की सूजन कम होती है।

पैरों को बाॅडी लेवल से ऊपर करके बैठें- पैरों से हृदय तक जाने वाले रक्त संचार सुचारू रूप से चलाने के लिए बिस्तर पर बैठतेे समय कोशिश करें कि अपने पैर तकिये पर रखें। ज्यादा देर पैर लटकाकर या खड़े होकर काम न करें। टेबल पर काम करते समय पैरों के नीचे स्टूल रखें या पैर सामने रखी कुर्सी पर टिकाएं। लगातार काम न करें, बीच-बीच में उठकर वाॅक करें या थोड़ी देर के लिए आराम करें।

कपड़े ढीले-ढाले पहनें- ध्यान रखें कि कपड़े टाइट फिटिंग के न पहनें। खासकर आपकी कमर, कलाई और टखनों के आसपास कसे हुए या इलास्टिक न हों। टाइट जींस, लैगिंग नही पहनने चाहिए। क्योंकि टाइट कपड़ों की वजह से भी डीऑक्सीजनेटेड रक्त हृदय तक नहीं जाता है, पैरों में बना रहता है जिससे सूजन आती है।

आरामदायक जूते-चप्पल पहनें- बहुत कसे हुए या हील वाले जूते पहनने से बचें। इससे सूजन के साथ पीठ दर्द की समस्या भी हो सकती है।

अपने शरीर को कूल रखें- गर्मियों के मौसम में घर में एसी, कूलर चलाकर कमरे का तापमान ठंडा रखें। धूप में जाने से बचें। अगर जाना जरूरी हो तो सिर और आंखों ढंककर जाएं।

हल्के व्यायाम या वाॅक करें- ज्यादा आराम करने या बैठे रहने के बजाय एक्टिव रहें। रोजाना कम से कम 20-25 मिनट जरूर टहलें। डाॅक्टर के मशवरे पर नियमित प्री-एंटेनेटल एक्सरसाइज और एंटेनेटल योगा करें। इससे नाॅर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

बाॅडी मसाज करना फायदेमंद- गर्म नारियल या ऑलिव ऑयल से बाॅडी मसाज भी कर सकती हैं। खासकर पैरों की मसाज नीचे से ऊपर की दिशा में मसाज करें।

करें सिकाई-गर्म पानी की सिकाई करने से मसल्स में लचीलापन आएगा और दर्द से राहत मिलेगी। टब में गर्म पानी में 1-2 चम्मच सेंधा नमक डाल कर पैर डुबो कर रखें। गर्म पानी में तौलिया भिगोकर पिंडलियों की सिकाई करें।

वेस्ट-हाइट कम्प्रेशन स्टाॅकिंग्स – सूजन ज्यादा होने पर दिन के समय वेस्ट-हाइट कम्प्रेशन स्टाॅकिंग्स पहनना फायदेमंद है। ध्यान रखें कि ये स्टाॅकिंग्स घुटने तक की लंबाई की न हो क्योंकि घुटनों पर टाइट होने से रक्त संचार बाधित होगा और सूजन ज्यादा बढ़ सकती है।

बाईं करवट लेकर सोएं- कोशिश करें कि बाईं करवट लेकर सोएं। इससे यूटरस का प्रेशर बड़ी धमनियों पर कम पड़ता है। रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है और शरीर की सूजन कम होती है। दिन में कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लें।

कैफीन से करें परहेज- कैफीन डायूरेटिक का काम करता है यानी शरीर से पसीने-मूत्र के जरिये पानी की कमी ज्यादा होती है। जिससे ज्यादा प्यास लगती है, वाॅटर रिटेंशन या सूजन होने की संभावना रहती है। काॅफी-क्रेविंग कम करने के लिए हर्बल टी या ग्रीन टी पीना बेहतर है।

(डाॅ अंशु जिंदल, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिंदल अस्पताल, मेरठ)