Summary: गर्भावस्था में बदलते शरीर और मन की कहानी
गर्भावस्था में शरीर के बदलाव महिलाओं के आत्मविश्वास, पहचान और भावनाओं को प्रभावित करते हैं, जिससे बॉडी इमेज क्राइसिस जन्म लेता है, जिसे समझ और सहारे की ज़रूरत होती है।
Pregnancy Body Image Crisis: किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था का समय शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों का समय होता है। इन्हीं बदलावों के कारण महिला के मन में अपने शरीर के प्रति डर, असमंजस, अपराधबोध और शर्म की भावना भी उठाती है। महिला के मन में अपने शरीर के प्रति उठ रहे इस भावना को बॉडी इमेज क्राइसिस कहते हैं। महिला अक्सर इस तरह की क्राइसिस को चुपचाप सहती है।
बॉडी इमेज क्राइसिस, गर्भावस्था में इसका करण
बॉडी इमेज क्राइसिस, इसका अर्थ है अपने शरीर के प्रति नकारात्मक सोच रखना। अपने रंग, रूप, वजन से संतुष्टि ना रखना। गर्भावस्था के दौरान अपने शरीर में हो रहे बदलावों के प्रति असंतोष दिखाना बॉडी इमेज क्राइसिस कहलाता है।
गर्भावस्था में इसके होने का करण
वजन का बढ़ना: गर्भावस्था में शिशु के बढ़ते वजन के साथ महिला का भी वजन बढ़ता है। इस समय शिशु के पोषण और विकास के लिए महिला का वजन बढ़ाना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इसके कारण कई बार गर्भवती महिला बॉडी इमेज क्राइसिस से गुजरती है।

स्ट्रेच मार्क्स: त्वचा के अधिक खिंचाव वाली जगह पर स्ट्रेच मार्क्स हो जाते हैं। जिसके कारण महिला खुद को आकर्षित नहीं समझती।
चेहरे में बदलाव: गर्भावस्था के दौरान चेहरे के ग्लो में कमी या पिगमेंटेशन के कारण महिला स्ट्रेस में आ जाती है।
इन शारीरिक बदलाव के कारण महिला खुद को पहले जैसी आकर्षित नहीं समझती और वह बॉडी इमेज क्राइसिस को सहती है।
महिला इस समय क्या महसूस करती है
खुशी: वह अपने शिशु के ग्रोथ को देखकर खुश होती है। उसके स्वस्थ होने की जानकारी उसके भावनाओं को अधिक बढ़ा देती है।
डर: एक तरफ महिला अपने शिशु के लिए खुशी महसूस करती है तो दूसरी तरफ वह अपने शारीरिक बदलावों के प्रति डर महसूस करती है। जैसे अब मैं पहले जैसी आकर्षक नहीं हूं। मेरे चेहरे का ग्लो कम हो गया है। मैं पहले जैसी फिट भी नहीं हूं। दिन प्रतिदिन मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा है।
चिंता: अपने शारीरिक बदलावों के कारण जो डर महिला के मन में आता है, वही डर उसके भविष्य की चिंता का कारण बनता है। जैसे, क्या मैं डिलीवरी के बाद फिर से पहले जैसी हो पाऊंगी। क्या मैं फिर से पहले जैसी आकर्षक दिख सकती हूं। कहीं लोग मेरे बढ़ते वजन के कारण मेरा मजाक तो नहीं बनाएंगे।
आत्मविश्वास की कमी: अपने शरीर के प्रति असंतोष महिला में सिर्फ डर और चिंता का कारण नहीं बनता, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी कम करता है।
पार्टनर और परिवार कैसे करें मदद
पार्टनर का व्यवहार: एक गर्भवती महिला के लिए उसके प्रति उसके पार्टनर के क्या विचार हैं बहुत मायने रखते हैं। ऐसे में पार्टनर को चाहिए कि वह गर्भवती महिला के शारीरिक बदलाव की आलोचना न करें। उसकी भावनाओं को समझे। अगर महिला खुद को कमतर समझने लगे तो उससे कहे, तुम अब भी पहले जैसी खूबसूरत हो। यह बदलाव स्थाई नहीं है इसके लिए इतनी चिंता मत करो।
परिवार का व्यवहार: परिवार की महिला हर वक्त गर्भवती महिला की तुलना अपने समय से ना करें। जैसे हमारे समय में ऐसा था, मुझे यह परेशानी नहीं हुई, तुम अनोखी हो जो इसके लिए इतना परेशान हो रही हो। यह वाक्य बहुत छोटे हैं पर गर्भवती महिला को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए काफी है।
गर्भावस्था के दौरान हो रहे शारीरिक बदलावों के कारण महिला में बॉडी इमेज क्राइसिस होना बिल्कुल सामान्य है। इससे उत्पन्न डर, चिंता या अपराधबोध महिला के लिए खतरनाक ना बने इसके लिए जरूरी है पार्टनर और परिवार महिला को सकारात्मक माहौल दे।
