googlenews
Why it is important to get pregnant at the right time

Why it is important to get pregnant at the right time

सही समय पर मां बनाना कितना जरूरी है! यह बात फर्टिलिटी टेस्ट करवाने के बाद ही समझ आती है। जब डॉक्टर आईवीएफ करवाने की सलाह देते हैं। देखा जाए तो शादी की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। जबकि बच्चे को जन्म देने की एक सही उम्र है, जिसे प्रकृति ने तय की है।

एक समय था जब अधिक उम्र में भी महिलाएं आसानी से गर्भवती हो जाती थीं। कई बार तो 40 से 42 की उम्र तक उनके बच्चे होते रहते थे। ऐसे में उन्हें न तो मेनोपॉज का ही पता रहता था और न किसी फर्टिलिटी टेस्ट के बारे में वे जानते थे। अकसर बुजुर्ग महिलाओं को कहते सुना होगा कि उनकी शादी के वक्त, उनकी मां गर्भवती थी। कई जगहों पर सास और बहू दोनों एक साथ गर्भवती हो जाते थे और फिर बहू को अपने बच्चे के साथ देवर या ननद की भी देखभाल करनी पड़ती थी।

अनुमान लगाइए कि भाई अपनी बड़ी बहन से 16-17 छोटा है तो कहीं चाचा-भतीजा में बस सालभर का अंतर रहता था। जबकि आज स्थिति एकदम उलट है। नये जमाने की लड़कियां स्वावलंबी हो गई हैं। वे पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहती हैं। ऐसे में 25 से 30 की उम्र तक वे कब पहुंच गई हैं, पता ही नहीं चलता है। देर में शादी करना और फिर थोड़ा रुक कर बच्चे की प्लानिंग करने में 35 से 38 साल की उम्र हो जाती है। इन सबके बीच उन्हें इनफर्टिलिटी की दिक्कतें कब शुरू होती हैं, पता ही नहीं चलता है। बेहतर है कि समय पर सचेत हो जाएं।

गर्भधारण करने की सही उम्र

आपने कभी इस पर विचार किया है कि इन दिनों इनफर्टिलिटी के मामले क्यों बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है- तनाव! कभी ऑफिस की चिंता तो कभी घर को व्यवस्थित करने की फिक्र में घुले जा रहे शादीशुदा जोड़े, फैमिली शुरू करने के बारे में सोच ही नहीं पाते हैं। बाद में यही तनाव उनके शरीर के ‘बॉडी क्लॉक को गड़बड़ कर देता है।

बॉडी क्लॉक यानी जैविक घड़ी का अर्थ है, सही समय पर सही काम। शायद इसलिए कहा जाता होगा कि शादी और बच्चा सही वक्त पर हो जाए तो अच्छा रहता है। डॉक्टर भी गर्भधारण करने की सही उम्र 25 से 30 साल मानते हैं। हालांकि, जिस तेजी से हमारी जीवनशैली बदल रही है, उससे आने वाले समय में गर्भधारण को लेकर चुनौतियां पहले अधिक हो जाएंगी।

गर्भधारण के लिए जरूरी टेस्ट

वर्तमान समय में देर से शादी करना चलन कम और जरूरत ज्यादा बन गई है। देखा जाए तो यह एक समय का प्रवाह है, जिसे आप रोक नहीं सकते हैं! हां, इससे बचने के तरीके जरूर निकाले जा सकते हैं। यदि आपके आसपास या आप खुद गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं तो आप जल्द ही कुछ जरूरी टेस्ट करवा लें। इससे आप जल्द ही कोई निर्णय ले पाएंगे कि अब आपको क्या करना चाहिए।

आईवीएफ करवाना चाहिए या फिर प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करना अभी संभव है! मुख्यत: गर्भधारण न करने की वजह महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब का बंद होना या हार्मोन में कमी आना होता है। इसके लिए दो बड़े टेस्ट होते हैं- एएमएच और एचएसजी टेस्ट।

एएमएच टेस्ट (एंटी मुलेरियन हार्मोन)

यह एक ब्लड टेस्ट है, जो केवल महिलाओं में ही किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि गर्भाशय में कितने अंडे बचे हैं। यह एक पर्याप्त मात्रा में ही सही माने जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब कोई बच्ची मां की कोख में होती है, तभी से उसके शरीर में अंडे बनने शुरू हो जाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जन्म लेने के बाद से ही ये अंडे कम होने शुरू हो जाते हैं।

इस तरह हर बार माहवारी के समय इनकी संख्या कम होती चली जाती है। यह समझने वाली बात है कि कम होने के साथ यह अंडे पुराने भी होने लगते हैं। फिर मेनोपॉज तक आते-आते यह बिलकुल कम हो जाते हैं। इनकी गुणवत्ता में भी काफी गिरावट आ जाती है। यानी कि उनका जेनेटिक मटेरियल पूरी तरह खराब हो जाता है।

जिनका अकसर दूसरे या तीसरे महीने में गर्भपात हो जाता है, उनमें कई बार एएमएच का स्तर बहुत कम देखा गया है। आमतौर पर एएमएच का वैल्यू 0 से लेकर 9.5 से शुरू माना गया है। जबकि गर्भधारण के लिए एक महिला में एएमएच का स्तर 2 से 4 नेनोग्राम प्रति मिलीलीटर के बीच होना चाहिए। यदि वैल्यू 1 और 2 के बीच आती है तो समझ लीजिए कि आपके पास समय बहुत कम बचा है। जल्द से जल्द आप फैमिली प्लान कर कीजिए।

यदि एएमएच 1 से भी कम आता है तो इसका अर्थ है कि आपके अंडे की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। ऐसे में आप अपने अंडे से प्रेगनेंसी प्लान न करके किसी एग डोनर से एग लेकर गर्भधारण करने के बारे में विचार करें।

यदि एएमएच का स्तर 4.5 से ऊपर जैसे 6.5 या 9.5 आता है तो भी यह सही नहीं माना जाता है। यह स्थिति पॉली सिस्टिक ओवेरियन में ज्यादातर देखी जाती है। जब हर महीने माहवारी नहीं आती है तो ऐसे में अंडे इस्तेमाल ही नहीं हो पाता है। यानी कि उनके पास जरूरत से ज्यादा अंडे बच जाते हैं।

ये अंडे पूरी तरह से मैच्योर नहीं हो पाते हैं। यदि इन अंडों से गर्भधारण हो भी जाता है तो गर्भपात होने का डर अकसर बना रहता है। कुल मिलाकर एएमएच टेस्ट किसी के गर्भधारण करने की क्षमता को बताता है। यदि मात्रा कम तो हम अनुमान लगाते हैं कि अंडे की गुणवत्ता खराब होगी। यदि ये ज्यादा होते हैं तब भी हम यही मानते हैं कि अंडे अच्छे नहीं होंगे।

एचएसजी टेस्ट (हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी)

फैलोपियन ट्यूब की जांच के लिए ट्यूब में डाई डालकर एक्सरे किया जाता है। इस टेस्ट को एचएसजी कहते हैं। इस टेस्ट में थोड़ा दर्द होता है इसलिए कुछ लोग इसे एनेस्थीसिया (बेहोशी) के साथ कराना पसंद करते हैं। यदि ट्यूब बंद होती है तो लेप्रोस्कोपी से इसका इलाज किया जाता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूब कितनी बंद है। यदि यह पूरी तरह बंद होती है तो इस स्थिति में गर्भधारण करने के लिए आईवीएफ ही एक मात्र विकल्प रह जाता है।

एफएसएच टेस्ट (फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन)

यह एक हॉर्मोनल टेस्ट है। इस टेस्ट में सुनिश्चित किया जाता है कि अंडा, अंडाशय से कब निकल रहा है। यदि खून में इसका स्तर सही पाया जाता है तो महिला आसानी से गर्भधारण कर सकती है। महिलाओं में एफएसएच का स्तर मासिक धर्म के अनुसार समय-समय पर बदलता रहता है। इसी से महिलाओं में ओवेल्युशन का समय निर्धारित रहता है। यदि इसका स्तर सही है तो
उचित अवधि पर ओवेल्युशन होता है।

एलएच टेस्ट (ल्यूटीनाइजिंग टेस्ट)

यह टेस्ट मासिक धर्म के तीसरे दिन होता है। यह अंडाशय में फॉलिकल्‍स के विकास के लिए जिम्मेदार होता है। यदि खून में एलएच की मात्रा सही होती है तो मासिक धर्म एक निश्चित साइकिल पर आता है। अतिरिक्त थाइरॉयड, एलएफटी (हेपेटाइटिस की जांच के लिए लीवर का टेस्ट) और सीमन एनालिसिस भी करवाया जाता है।

एग फ्रीज से सुरक्षित रखें प्रेगनेंसी

यदि आप नौकरी और करियर के चलते अभी शादी नहीं करना चाहती हैं तो यह तकनीक अपना सकती हैं। इसके माध्यम से आप अपने अंडे संरक्षित कर सकती हैं। हालांकि, अंडों को संरक्षित करने की सही उम्र 20 से 30 साल ही है। इस समय आपके अंडे की गुणवत्ता काफी अच्छी होती है। एग फ्रीज की कीमत सभी जगह अलग-अलग है। यह प्रक्रिया दो तरीके से काम करती है। पहली- एग निकालना, जिसके कम से कम एक से डेढ़ लाख रुपये लग जाते हैं और दूसरी- एग निकालने के बाद उन्हें फ्रीज करना। इसकी कीमत 40 से 50 हजार तक है।

अंडे की मात्रा बढ़ाने के लिए नहीं कोई दवाई

डॉक्टर पूजा दीवान का कहना है कि अंडे की मात्रा या गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कोई वाजिब दवाई नहीं है। हां, अंडे की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कुछ दवाइयां जरूर हैं लेकिन इन दवाइयों से बहुत ही मामूली फर्क पड़ता है। यदि किसी लड़की के शरीर में जन्म से ही अंडे कम हों या फिर उसे कैंसर हो तो भी बहुत जल्दी मेनोपॉज हो जाता है। वहीं एक्सरे या सीटी स्कैन के विभाग में काम करने वाली लड़कियों की अंडेदानी पर भी नेगेटिव रेडिएशन के दुष्प्रभाव से अंडे बहुत तेजी से कम होने लगते हैं। कई बार यह अनुवांशिक भी होता है।
(स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ पूजा दीवान से बातचीत पर आधारित।)

Leave a comment