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Exercise for C Section

C Section: मां बनना किसी भी स्त्री के लिए दोबारा जन्म लेने के बराबर होता है। इस दौरान महिला को असहनीय दर्द होता है। कभी-कभी महिलाएं इस दर्द से बचने के लिए तो कभी मेडिकल कॉम्पलीकेशन के कारण सिजेरियन डिलीवरी का ऑप्शन चुनती हैं। सिजेरियन डिलीवरी एक ऐसी सर्जरी है जिसमें बच्चे को जल्दी और सुरक्षित रूप से मां के गर्भ से बाहर निकालने के लिए एब्डामिनल वॉल पर चीरा लगाया जाता है।

सी-सेक्शन के बाद महिला को रिकवर होने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, जिसके कारण आवश्यक सभी सावधानियां बरती जानी बेहद आवश्यक है। अगर सी-सेक्शन के बाद आप अपनी फिटनेस के लिए एक्सरसाइज करने का मन बना रही हैं तो ऐसे में जरूरी है कि कुछ आसान टिप्स को जरूर फॉलो किया जाए। जिसके बारे में आज हम आपको इस लेख में बता रहे हैं-

सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक्सरसाइज करना कब सुरक्षित है?

C Section: exercise
Caesarean section

यदि आपकी सी-सेक्शन डिलीवरी हुई है, तो हो सकता है कि आपके मन में यह कशमकश हो कि आपके लिए एक्सरसाइज करना सही है या नहीं। यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन डिलीवरी के बाद आपको कम से कम छह सप्ताह तक इंतजार अवश्य करना चाहिए। आपकी बॉडी को रिकवर होने में थोड़ा समय अधिक भी लग सकता है, इसलिए एक्सरसाइज से पहले एक बार डॉक्टर से मिल लेना आवश्यक होता है। यहां यह भी याद रखें कि सी-सेक्शन के बाद एक्सरसाइज आपके गर्भावस्था से पहले की एक्सरसाइज से बहुत अलग हो सकती है, लेकिन एक्सरसाइज करने में कोई समस्या नहीं है।

सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद एब्डॉमिनल एक्सरसाइज

side plank
Abdominal Exercise

सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद एब्डॉमिनल वॉल की मसल्स को मजबूत करना आवश्यक होता है। जिसके लिए कुछ एक्ससाइज की जा सकती हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि आप शुरुआत में क्रंचेज, सिट-अप्स और रेगुलर प्लैंक करने से बचें।

पेल्विक टिल्ट्स एक्सरसाइज – प्रसव के बाद एब्डॉमिनल वॉल मसल्स को मजबूत करने के लिए यह सबसे सुरक्षित व्यायामों में से एक है। इसके लिए, आप एक मैट पर अपनी पीठ के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। इस दौरान, आपके पैर फर्श पर मजबूती से टिके होने चाहिए। अब, अपने कूल्हों को अपने ऊपरी शरीर की ओर झुकाएं और अपने बट को फर्श से लगभग एक इंच ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें, फिर छोड़ दें। 10 बार या अपनी क्षमतानुसार इसे दोहराएं।

मॉडिफाइड या फुल साइड प्लैंक एक्सरसाइज – साइड प्लैंक आपकी आंतरिक कोर की मसल्स को एंगेज करता है। साइड प्लैंक के लिए आप मैट पर एक साइड लेट जाएं। अब आप अपने हाथों को घुटने से मोड़ते हुए उपरी हिस्से को उपर उठाने की कोशिश करें। क्षमतानुसार इस पोजिशन में रूकें और फिर सामान्य अवस्था में लौट आएं।

वॉल सिट एक्सरसाइज – यह एक्सरसाइज क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग, पेल्विक फ्लोर मसल्स और लोअर बैक को मजबूत बनाने का काम करती है। दीवार से एक या दो फीट की दूरी पर खड़े हो जाएं, अपनी पीठ की ओर। दीवार के खिलाफ झुकें और बैठने की स्थिति में अपने घुटनों को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। अपने पेट और पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों और स्थिति को यथासंभव लंबे समय तक एंगेंज करें। इस एक्सरसाइज को पांच बार दोहराएं।

सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज

C Section:: squats
Pelvic Flor Exercise

गर्भावस्था पेल्विक फ्लोर की मसल्स पर बहुत अधिक दबाव डालती है। यह मसल्स मूत्राशय, आंतों और गर्भाशय को सहारा देती हैं। इसके अतिरिक्त, सर्जरी के दौरान, इन मसल्स पर बहुत अधिक असर पड़ता है, इसलिए उन्हें मजबूत करने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद आप इन पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज को आजमा सकती हैं-

स्क्वाट्स एक्सरसाइज – स्क्वाट को सही ढंग से करने के लिए, अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा चौड़ा करके खड़े हों। अपने घुटनों को मोड़ें और अपने कूल्हों को पीछे धकेलते हुए बैठ जाएं, जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठने वाले हों। एक बार जब आपकी जांघें जमीन के समानांतर हों, तो स्थिति में रूकें। आपका वजन आपकी एड़ी में होना चाहिए। अपने पैरों को सीधा करें और 15-20 बार दोहराएं।

ब्रिज एक्सरसाइज – ब्रिज ग्लूटस और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के लिए एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। एक मैट पर अपनी पीठ के बल लेटकर शुरुआत करें, आपके घुटने 90 डिग्री के कोण पर मुड़े हुए हों और पैर फर्श पर मजबूती से टिके हों। अब, अपने कूल्हों को फर्श से ऊपर उठाएं, अपनी ग्लूटस मसल्स को इनवॉल्व करें। आपके शरीर को आपके कंधों से आपके घुटनों तक एक सीधी रेखा बनानी चाहिए। कुछ सेकंड के लिए रुकें, फिर छोड़ें। 10-15 बार दोहराएं, फिर एक मिनट के लिए आराम करें और 10-15 का दूसरा सेट करें।

एक्सरसाइज से पहले जरूरी टिप्स

C Section: exercise
Exercise tips

अगर आपने एक्सरसाइज करने का मन बनाया है तो इन छोटे-छोटे टिप्स पर अवश्य ध्यान दें।

  • कभी भी खुद से एक्सरसाइज शुरू ना करें। सबसे पहले अपनी गायनेकालॉजिस्ट से सलाह अवश्य लें। हर महिला की बॉडी अलग होती है और हो सकता है कि आपको अन्य महिलाओं की अपेक्षा रिकवर होने में अधिक समय लगे।
  • एक्सरसाइज की शुरूआत में कभी भी इंटेंस वर्कआउट ना करें। शुरूआती कुछ दिन आप हल्के व्यायाम करें। मसलन, आप वॉकिंग से लेकर प्राणायाम आदि को अपने वर्कआउट रूटीन में शामिल करें।
  • कभी भी वीडियोज देखकर वर्कआउट ना करें। अगर आप कोई नई एक्सरसाइज करना चाहती हैं या फिर कोई वर्कआउट प्लॉन फॉलो करने का मन बना रही हैं तो फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह और उनकी देखरेख में ही ऐसा करें।
  • प्रेग्नेंसी के बाद कुछ मसल्स की एक्सरसाइज करना जरूरी हो जाता है। मसलन, मिडलाइन के चारों ओर रीढ़, पेल्विक मसल्स फ्लोर और पेट और पीठ के निचले हिस्से की मसल्स पर काम करना चाहिए। ऐसे में आप एक्सपर्ट की मदद से अपनी बॉडी के इन पार्ट्स को मजबूती प्रदान कर सकती हैं।

नोट- यह सभी एक्सरसाइज केवल सुझाव के लिए बताई गई हैं। किसी भी एक्सरसाइज को कभी भी खुद से शुरू ना करें। हर महिला की बॉडी व हेल्थ कॉम्पलीकेशन अलग होती हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह और एक्सपर्ट की देखरेख में ही एक्सरसाइज करें।

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