Overview:गर्भावस्था में सिरदर्द का कारण क्या है, डॉक्टर से जानिए 7 वजहें और आराम के तरीके
गर्भावस्था में सिरदर्द एक सामान्य समस्या है, जो हार्मोनल बदलाव, थकान, नींद की कमी, पानी की कमी, तनाव, लो ब्लड शुगर और कभी-कभी हाई ब्लड प्रेशर के कारण हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, सही भोजन, पूरी नींद, आराम और तनाव कम करना इससे राहत देता है। तेज़ या लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना ज़रूरी है।
Pregnancy Headaches Causes and Relief: गर्भावस्था का समय जितना खूबसूरत होता है, उतना ही बदलावों से भरा भी होता है। इस दौरान शरीर और ब्रेन में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनका असर रोज़मर्रा की सेहत पर दिखता है। सिरदर्द ऐसी ही एक परेशानी है, जो बहुत आम है लेकिन अक्सर महिलाएं इसे हल्के में ले लेती हैं। कभी हल्का दबाव, कभी भारीपन और कभी तेज़ दर्द—ये सभी प्रेग्नेंसी हेडेक के अलग-अलग रूप हो सकते हैं।
ज़्यादातर मामलों में गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द कोई गंभीर समस्या नहीं होता, लेकिन जब यह बार-बार होने लगे तो नींद, मूड और दिनभर की एनर्जी पर असर डाल सकता है। खासतौर पर पहली और तीसरी तिमाही में कई महिलाएं इस परेशानी का ज़िक्र करती हैं। ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि सिरदर्द क्यों होता है और किन आदतों से इसे सुरक्षित तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।
मदरहुड हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन व गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुजाता उदय राजपूत के अनुसार, हार्मोनल बदलाव, शरीर में बढ़ती ज़रूरतें और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण मिलकर प्रेग्नेंसी में सिरदर्द को बढ़ाते हैं। सही जानकारी और आसान देखभाल से इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हार्मोनल बदलाव- सिर में भारीपन

गर्भावस्था में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन तेज़ी से बढ़ते हैं। इन हार्मोनल बदलावों का असर ब्रेन की ब्लड वेसल्स पर पड़ता है, जिससे कभी-कभी सिर में भारीपन या दर्द महसूस होता है। खासकर प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में शरीर इन नए बदलावों के साथ तालमेल बिठा रहा होता है। इसी दौरान सिरदर्द ज़्यादा देखने को मिलता है। कई महिलाओं को यह दर्द दिन के किसी खास समय पर होता है, तो कुछ को अचानक। अच्छी बात यह है कि जैसे-जैसे शरीर इन हार्मोनल बदलावों का आदी होता है, सिरदर्द की तीव्रता अपने आप कम हो सकती है।
पानी की कमी- हल्की डिहाइड्रेशन भी भारी पड़ती है

गर्भावस्था में शरीर को पहले से ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है, क्योंकि ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है और बेबी के लिए भी फ्लूड चाहिए होता है। कई महिलाएं इस ज़रूरत को समझ नहीं पातीं और कम पानी पीती हैं। हल्की-सी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकती है। लगातार सूखा मुंह, गाढ़ा पेशाब या कम पेशाब आना इसके संकेत हो सकते हैं। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना सिरदर्द से बचाव का सबसे आसान तरीका है।
नींद की कमी- टूटी नींद बढ़ाती है दर्द
प्रेग्नेंसी में पूरी नींद मिलना आसान नहीं होता। बार-बार पेशाब आना, शरीर में दर्द, पेट का बढ़ना और भविष्य को लेकर चिंता—ये सभी नींद में खलल डालते हैं। जब नींद पूरी नहीं होती, तो ब्रेन पर तनाव बढ़ता है और टेंशन हेडेक होने लगता है। यह दर्द अक्सर सिर के दोनों तरफ कसाव जैसा लगता है। रोज़ एक तय समय पर सोने की कोशिश करना, दिन में थोड़ा आराम करना और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाना इस तरह के सिरदर्द में मददगार हो सकता है।
ब्लड शुगर का गिरना
गर्भावस्था में देर से खाना या मील स्किप करना ब्लड शुगर को अचानक गिरा सकता है। इसका असर सीधे सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी के रूप में दिखता है। कई महिलाएं मतली या उल्टी की वजह से ठीक से खा नहीं पातीं, जिससे यह समस्या और बढ़ जाती है। थोड़े-थोड़े समय पर हल्का, पौष्टिक खाना ब्लड शुगर को संतुलित रखता है। यह न सिर्फ सिरदर्द से बचाता है, बल्कि दिनभर की एनर्जी भी बनाए रखता है।
तनाव, कैफीन छोड़ना और साइनस जाम
मानसिक तनाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी प्रेग्नेंसी में सिरदर्द का बड़ा कारण हैं। इसके अलावा, जो महिलाएं अचानक चाय या कॉफी कम कर देती हैं, उन्हें कैफीन विड्रॉल के कारण सिरदर्द हो सकता है। वहीं, गर्भावस्था में नाक बंद रहना या साइनस जाम होना भी आम है, जिससे माथे और आंखों के आसपास दबाव बनता है। ऐसे मामलों में गहरी सांस, हल्की मालिश, भाप लेना और तनाव कम करने वाली एक्टिविटी राहत दे सकती हैं।
प्रेग्नेंसी में सिरदर्द से राहत के लिए डॉक्टर की सलाह
डॉ. सुजाता उदय राजपूत के अनुसार, जहां तक हो सके गर्भावस्था में दवाओं के बजाय सुरक्षित और नेचुरल तरीकों को अपनाना चाहिए। रोज़ 12–15 गिलास पानी पीना, संतुलित आहार लेना और 8–9 घंटे की नींद सिरदर्द को काफी हद तक कम कर सकती है। माथे पर ठंडी पट्टी या गर्दन पर गुनगुना कंप्रेस भी फायदेमंद होता है। हल्की मालिश, प्रेनेटल योग, टहलना और स्क्रीन टाइम कम रखना भी मदद करता है।
हालांकि ज़्यादातर सिरदर्द सामान्य होते हैं, लेकिन अगर दर्द बहुत तेज़ हो, लगातार बना रहे, अचानक शुरू हो या उसके साथ नजर धुंधली होना, सूजन या हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद ज़रूरी है।
