Monkeypox Fever: पिछले कुछ दिनों से देश में मंकी फीवर का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई राज्यों में इस संक्रामक बुखार के मामले तेजी से बढ़े हैं। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में मंकी फीवर के कई मामले सामने आने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस वायरस के तकरीबन 50 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है। इनमें से, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में अब तक सबसे ज्यादा 34 मामले सामने आए। कर्नाटक में मंकी फीवर से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। कर्नाटक के अलावा, महाराष्ट्र और गोवा में भी इस वायरस के मामले रिपोर्ट की गए हैं। इस वायरस के बढ़ते मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने इससे निपटने की तैयारियों में जुट गए हैं।
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क्या है मंकी फीवर

मंकी फीवर को क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) के नाम से भी जाना जाता है। मंकी पाॅक्स वायरस मूलतः एक जूनोसिस डीएनए वायरस है जो सबसे पहले 1958 में एक बंदर में पाया गया था। पशुओं से इंसानों में संक्रमित होने के मामले 1970 में बड़े पैमाने पर आए मामलों से इसकी पुष्टि हुई थी। स्माॅल पाॅक्स या चिकन पाॅक्स की आर्थोडाॅक्स फैमिली से आता है। वैज्ञानिकों ने इसे एक तरह से वायरल संक्रामक इंफेक्शन की श्रेणी में रखा है, जो आमतौर पर जानवरों से इंसान में संक्रमित होता है। मंकी फीवर मनुष्यों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। समय रहते इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
क्या है लक्षण
मंकी पाॅक्स वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 5-10 दिन में इंक्यूबेशन पीरियड में म्यूटेट होता है । संक्रमण आमतौर पर 14-21 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। शुरूआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। इनमें मरीज को अचानक तेज बुखार, सिर में तेज दर्द होना, लिम्फ नोड्स में सूजन, कमर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान उल्टी, दस्त, आंखों में दर्द या सूजन हो सकते हैं। बुखार के साथ स्किन पर रैशेज होने लगते हैं। रैशेज पहले चेहरे पर होते हैं, धीरे-धीरे यह शरीर के दूसरे अंगों खासकर हथेलियों और पैरों के तलवों पर फैल जाते हैं। इनमें खुजली और जलन हो सकती है। रैशेज में कई तरह के बदलाव आते हैं। ये मवाद भरे बड़े-बड़े दानों का रूप लेते हैं। आखिरी शेडिंग स्टेज में इन पर पपड़ी बन जाती है जो अपने आप गिर जाती है। घाव के निशान भी पड़ सकते हैं।
किन्हें है ज्यादा खतरा
फॉरेस्ट एरिया के आसपास रहने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है।
कैसे होता है संक्रमण

मंकी पाॅक्स वायरस एक स्वस्थ व्यक्ति में कई तरह से फैल सकता है-
- संक्रमित व्यक्ति या उसके दानों के फ्ल्यूड के नजदीकी संपर्क में आने पर।
- संक्रमित व्यक्ति के ड्राॅपलेट स्वस्थ व्यक्ति के आंख, नाक या मुंह के रास्ते शरीर में पहुचंकर।
- त्वचा पर लगी चोट के जरिये ब्लड में पहुचंकर।
- सेक्स के माध्यम से।
- संक्रमित जानवरों जैसे- बंदरों, चूहों, गिलहरियों के संपर्क में आने या संक्रमित जानवर के काटने पर।
- संक्रमित व्यक्ति के पर्सनल वस्तुओं को इस्तेमाल करने से जैसे-बिस्तर, कपड़ों, बर्तनों।
कितना है खतरनाक
चूंकि यह वायरस एयर बोर्न नहीं है, संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आनेे पर ही दूसरे व्यक्ति को होता है। इसलिए उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति द्वारा पूरी एहतियात बरती जाए, तो मंकी पाॅक्स वायरस के संक्रमण की संभावना कम रहती है।
आमतौर पर मरीज गंभीर रूप् से बीमार नहीं होते लेकिन कई बार यह संक्रमण घातक भी हो सकता है। अब तक मंकी पाॅक्स के माइल्ड या हल्के मामले ही देखने को मिले हैं। चिकन पाॅक्स की तरह इसके दाने कुछ सप्ताह में अपने आप सही हो जाते हैं। एचआईवी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, कैंसर, डायबिटीज, लिवर जैसी बीमारियों से ग्रस्त इम्यूनो काॅम्प्रोमाइज लोगों में इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण हाई रिस्क श्रेणी में आते हैं। समलैंगिक या गे लोगों में मंकी पाॅक्स के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। अलेकिन कुल मिलाकर संक्रमण से मौत के मामले काफी कम हैं।
क्या है इलाज
अभी तक मंकी पाॅक्स के लिए अलग से कोई वैक्सीन नहीं है। चिकन पाॅक्स से बचाव के लिए लगाई जाने वैक्सीन मंकी पाॅक्स के इलाज में तकरीबन 85 फीसदी कारगर साबित हुई है। इसके अलावा मरीज का सिम्टोमैटिक सपोर्टिव उपचार किया जाता है। पैरासिटामोल जैसी एंटी वायरल दवाइयां दी जाती हैं। अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रहना जरूरी है।
कैसे करें बचाव
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंकी वायरस संक्रमण मानव- संपर्क होने से यह बहुत खतरनाक हो गया है। जिसे देखते हुए पर्सनल प्रोटेक्शन लेनी जरूरी है-मास्क पहनें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, हाथों को बार-बार धोएं या सेनिटाइज करें, संक्रमित मरीज से दूरी बनाकर रखें। किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम, सिर दर्द, बुखार है-उससे समुचित दूरी बनाएं।
(डाॅ मोहसिन वली, जनरल फिजीशियन,नई दिल्ली)
