Endometriosis Treatment: एंडोमेट्रियोसिस क्या है और कारण एवं लक्षण के बारे में आप जान चुके हैं। अब इस बीमारी पर हम आपको डॉक्टर्स का पहलू और इलाज के बारे में जानकारी देंगे।
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एंडोमेट्रियोसिस पर डॉक्टर्स का पहलू

एनडीएमसी मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट जनरल सर्जन और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. श्रुति पांडे का कहना है कि सबसे पहले आपको यह समझना जरूरी है एंडोमेट्रियोसिस होता कब है? आमतौर पर यह बीमारी जब महिलाओं को पहली बार पीरियड्स आते हैं तब से लेकर मेनोपॉज तक कभी भी हो सकती है। इस बीमारी के होने का सबसे संकेत पीरियड्स के दौरान नॉर्मल फ्लो में ब्लॉकेज होना है जिसे आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। दूसरा, ब्लीडिंग से पहले महिलाओं को बहुत ज्यादा दर्द होना इसका दूसरा लक्षण है। तीसरा, पीरियड्स आने से 5-6 दिन पहले पेट या पेल्विक फ्लोर में बहुत ज्यादा दर्द होना या पीरियड्स खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक दर्द होना भी एक संकेत है। डॉक्टर ने बताया कि यह दर्द 6 से 8 महीने तक लगातार रह सकता है जिसे आमतौर पर मरीज नजरअंदाज कर देते हैं और वह कभी पेनकिलर लेते हैं तो कभी दूसरी दवाइयों से इसका ट्रीटमेंट करते हैं।
यह होता क्यों है? इस बारे में डॉ. श्रुति ने बताया यूट्रेस की लाइनिंग के टिशूज जब पेट के अंदर या पेट के किसी भी अन्य हिस्से में या इंटेस्टाइन में जाकर डवलप होने लगते हैं तो पीरियड्स के समय ब्लीडिंग बाहर होने के साथ-साथ पेट के अंदर भी होने लगती है, इससे पेट में बहुत ज्यादा दर्द होता है और पेट में खून जमा होने लगता है। इतना ही नहीं, पीरियड्स के दौरान संभोग करना भी एंडोमेट्रियोसिस के होने का एक कारण हो सकता है।
डॉ. श्रुति ने यह भी बताया कि सही समय पर डायग्नोज ना होने पर कई बार टीबी की दवा भी शुरू कर हो जाती है, जबकि वजह एंडोमेट्रियोसिस होती है। कई बार अल्ट्रासाउंड में यह डायग्नोज नहीं हो पाता। ऐसे में जब क्रॉनिक कंडीशन हो जाती है तो आखिर में लेप्रोस्कोपी की जाती है और यह लेप्रोस्कोपी पीरियड्स के दौरान ही की जाती है जिससे कि ब्लीडिंग शरीर के अंदर किस-किस हिस्से में हो रही है उसे देखकर इलाज किया जा सके। उन्होंने कहा, इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि भविष्य में इससे इंटेस्टाइन में भी प्रॉब्लम हो सकती है, इनफर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में जब भी लोअर एब्डोमेन या पेल्विक पेन हो तो सबसे पहले गाइनेकोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। अगर एंडोमेट्रियोसिस शुरुआती अवस्था में है तो दवाओं, एक्सरसाइज के साथ ही डाइट से कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन यदि यह क्रॉनिक हो जाता है तो इसके लिए सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ती है।

खराड़ी, पुणे स्थित, ब्लॉसम वूमेन क्लिनिक की गायनोकॉलोजिस्ट और ऑब्सिट्रेशन डॉ. दीपाली पटेल ने एंडोमेट्रियोसिस के बारे में ये कहा कि पीरियड्स के दौरान लगभग 40% महिलाओं को पेट में दर्द होता है। साथ ही जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा क्रॉनिक पेन होता है तो उनमें से भी 40% महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या हो सकती है जो कि बाद में हार्मोनल से लेकर ब्लैडर और बाउल मूवमेंट, यहां तक की पेशाब की नली तक को इफ्केट कर सकती है। ऐसे में इस बीमारी को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए और किसी भी तरह का पीरियड्स से संबंधित दर्द है या पेल्विक फ्लोर में दर्द है तो महिलाओं को बिना देर किए तुरंत गाइनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
पुणे स्थित, डीवाई पाटिल हॉस्पिटल की प्रैक्टिशनर डॉ. आस्था सिंघल का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें यूट्रेस की लाइनिंग, यूट्रेस के बाहर कहीं ओर मौजूद होती है, जैसे – अंडाशय या कहीं भी। हालांकि इसका कारण अब तक ज्ञात नहीं है। एंडोमेट्रियोसिस मासिक धर्म शुरू होने से लेकर मेनोपॉज के बाद तक कभी भी हो सकता है। इसके होने पर रोगी को पेट में गंभीर दर्द होता है, अनियमित मासिक चक्र, अत्यधिक रक्तस्राव और पेट का फूलना जैसी समस्या हो सकती है। इसका इलाज कुछ मौखिक दवाओं के साथ किया जा सकता है और यदि यह गंभीर है तो सर्जरी द्वारा भी इलाज किया जा सकता है।
खराड़ी, पुणे स्थित, फिटवेल फिजियोथेरेपी क्लीनिक की फाउंडर और वन हेल्थ मल्टीस्पेशलिटी क्लीनिक की सीनियर फिजियोथेरेपी और पेल्विक फ्लोर रिहैब स्पेशलिस्ट डॉ. ऋचा पुरोहित का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के दौरान फिजियोथेरेपी भी मददगार हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को फिजियोथेरेपी के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। डॉ. ऋचा का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस के दौरान लोअर एब्डोमिनल और पेल्विक फ्लोर मसल्स में बहुत दर्द होता है। पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के साथ ब्लैडर और बॉउल मूवमेंट भी प्रभावित होते हैं। साथ ही शरीर में बहुत थकान रहती है। इसके अलावा फर्टिलिटी की समस्या भी कुछ मामलों में देखने के मिलती है और हार्मोंस में भी काफी बदलाव होते हैं। साथ ही संभोग के दौरान भी महिलाओं को दर्द होता है। ऐसे में कुछ टेक्निक्स, एक्सरसाइज और मशीनों के जरिए ना सिर्फ पेल्विक फ्लोर की मसल्स को रिलैक्स किया जाता है बल्कि पेल्विक फ्लोर की मसल्स में आने वाली टेंशन को भी दूर किया जाता है। इसमें ब्रीदिंग टेक्निक और डाइट भी बहुत महत्वपूर्ण होती है जो कि एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को मैनेज करने में मदद करती है। यहां ये ध्यान रखना जरूरी है कि एंडोमेट्रियोसिस का फिजियोथेरेपी में इलाज नहीं है लेकिन उसके लक्षणों को नियंत्रित करने में फिजियोथेरेपी बहुत मददगार साबित हो सकता है।
एंडोमेट्रियोसिस का निदान

2019 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, कुछ स्थितियों में, एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों की शुरुआत से निदान तक 4 से 11 साल लग सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस को डायग्नोज करना बहुत मुश्किल होता है इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी फैमिली हिस्ट्री को जानते हैं और उसके बाद ही आपके अगर कोई लंबे समय तक लक्षण है, उन पर फोकस करते हैं। इसके अलावा कुछ टेस्ट करवाएं जाते हैं। जैसे-
पेल्विक एग्जामिन- डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा के अंदर जांचने के लिए एक स्पेक्युलम और लाइट का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही गर्भाशय के पीछे सिस्ट या स्कार के लिए पेट को मैन्युअल रूप से भी जांचा जाता है।
अल्ट्रासाउंड- डॉक्टर ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड या पेट के अल्ट्रासाउंड कर सकते हैं। ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड में, आपकी योनि में एक उपकरण डाला जाता है। दोनों तरह के अल्ट्रासाउंड प्रजनन अंगों की फिल्म बनाते हैं, जो डॉक्टर को एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े सिस्ट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा एक सीटी स्कैन, या एक एमआरआई भी करवाया जा सकता है। लेकिन वे बीमारी को पहचानने में बहुत अधिक प्रभावी नहीं हैं।
लेप्रोस्कोपी- एंडोमेट्रियोसिस को सुनिश्चित करने का एकमात्र सटीक तरीका छोटी सी सर्जरी द्वारा लैप्रोस्कोपी की जाती है। एक बार निदान हो जाने पर, उसी प्रक्रिया में शरीर के अंगों में मौजूद टिश्यूज को हटाया जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस का इलाज
एंडोमेट्रियोसिस का इलाज इसकी स्टेज पर निर्भर करता है। ये 4 तरह की होती हैं। मिनिमल, माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर। इसके अलावा इलाज के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। जैसे –
- महिला की उम्र
- लक्षणों की गंभीरता
- भविष्य में गर्भधारण की योजना
- कई बार प्रजनन संबंधी समस्याओं में सुधार लाने के मुताबिक इलाज होता है।
- कई बार दर्द को नियंत्रित करने के लिए दवाई या सर्जरी का उपयोग होता है।
सबसे पहले तो एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाई दी जाती है और उनके साथ ही हार्मोन थेरेपी दी जाती है। यह दवाई ओवर-द- काउंटर भी हो सकती हैं और नॉन स्टेरॉयडल एंटी इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स भी हो सकती हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर एंडोमेट्रियोसिस के लिए सर्जरी की सिफारिश भी कर सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस में दर्द से राहत पाने के लिए सर्जरी एक प्रभावशाली तरीका है।
निष्कर्ष

- यह तो आप समझ गए हैं कि महिलाओं को होने वाला एंडोमेट्रियोसिस कितना खतरनाक है। यह ना सिर्फ महिलाओं की गर्भधारण करने में परेशानियां खड़ी करता है बल्कि इनफर्टिलिटी का भी कारण बनता है। इसकी वजह से महिलाओं को लंबे समय तक पेट में दर्द, कमर में दर्द और पेल्विक फ्लोर में भी दर्द हो सकता है। यहां तक की संभोग करने के दौरान भी दर्द का सामना करना पड़ सकता है। इतनी ही नहीं, ये ओवेरियन कैंसर और एडेनोकार्सिनोमा कैंसर का कारण भी बन सकता है। लेप्रोस्कोपी द्वारा एंडोमेट्रियोसिस का सटीक डायग्नोज किया जा सकता है। यदि आपको शुरुआत में ही कुछ लक्षण दिखाई देते हैं तो आपके ओवर-द-काउंटर दवा लिए बिना और खुद से पेन किलर लेने के बजाय गाइनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक एंडोमेट्रियोसिस रहने से शरीर के अन्य अंगों जैसे इंटेस्टाइन को भी डैमेज हो सकता है। डॉक्टर श्रुति पांडे की मानें तो, एंडोमेट्रियोसिस को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, फिर चाहे कितने ही लंबे समय से यह आपको हो। लेकिन एंडोमेट्रियोसिस का इलाज इसकी स्टेज और लक्षणों पर निर्भर करता है। सर्जरी इसका पुख्ता इलाज है लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह दोबारा ना हो, यह समस्या दोबारा भी हो सकती है।
