Overview: बच्चे को वीडियो से नहीं बल्कि नानी मां के ये गुण सिखाएं
बच्चों को दादी-नानी से मिलने वाले महत्वपूर्ण जीवन सबकों पर ध्यान देना चाहिए। ये सबक बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाकर सकारात्मक बनाते हैं।
Boosting Child Confidence: नानी-दादी का बच्चों के साथ एक अनोखा रिश्ता होता है। उनकी समझ, स्नेह और खुशी बच्चों के जीवन में विशेष रंग भरती है। जब माता-पिता व्यस्त होते हैं, तो दादी-नानी ही उनका ख्याल रखती हैं। वे बच्चों की बात सुनते हैं, सलाह देते हैं और मुश्किल समय में साथ देते हैं। यह रिश्ता बच्चों के भावनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण है साथ ही उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। कई बार बच्चे अपने माता-पिता की तुलना में नानी के साथ अधिक सहज और सुरक्षित महसूस करते हैं। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेादारी है कि वह बच्चों को नानी के ऐसे खास गुण सिखाएं जो न केवल उनके भविष्य को सुधारें बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाने में मदद करें। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
नैतिकता और शिष्टाचार

दादी-नानी बच्चों में मजबूत मूल्य प्रणाली विकसित करते हैं। आज के युग में, जहां लोग भौतिक सफलता और व्यस्तता में डूबे रहते हैं, बच्चे अक्सर अपने मूल्यों को भूल जाते हैं और नैतिकता से समझौता कर लेते हैं। नए युग में लोग अपने से बड़ों का आदर और सम्मान करना भूलते जा रहे हैं। पेरेंट्स को उनके माता-पिता द्वारा सिखाए गए शिष्टाचार बच्चों को जरूर सिखाने चाहिए। ताकि वह परिवार के साथ एक जुटकर होकर चलें।
शौक होना जरूरी है
आपने अक्सर देखा होगा कि दादी-नानी घर में अचार, पापड़ और तरह-तरह के व्यंजन बनाती हैं। वह ये काम खुशी से और अपने शौक पूरे करने के लिए करती हैं। शौक का महत्व अक्सर कम आंका जाता है। अपने पसंदीदा कार्य के लिए समय निकालना तनाव कम करता है, मन को तरोताजा करता है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाता है। दादी-नानी से बच्चों को बागवानी, खाना पकाने या पेंटिंग जैसी गतिविधियों जरूर सीखनी चाहिए।
धैर्य रखना
जीवन हमेशा योजना के अनुसार नहीं चलता। यह अप्रत्याशित और चुनौतियों से भरा है। बच्चों को धैर्य का अभ्यास करना सिखाना चाहिए। दादा-दादी धैर्य से अपने सभी रोल निभाते आते हैं। वे बच्चों के गलत व्यवहार या स्वास्थ्य समस्याओं में शांत रहकर उदाहरण पेश करते हैं। धैर्य सिखाने से बच्चे बड़े होकर शांत, विचारशील और विश्लेषणात्मक बनते हैं।
परिवार को अहमियत
परिवार कठिन समय में सहारा देता है और खुशियों को दोगुना करता है। यंगस्टर्स अक्सर दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, लेकिन परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है। यह मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। बच्चे दादी-नानी से परिवार को एकजुट होकर रखने का गुण सीख सकते हैं। इससे बच्चे में लीडरशिप क्वालिटी डेवलप हो सकती है।
गलतियां करना ठीक है

जीवन एक मौका है। डर और चिंताएं हमें रोक नहीं सकतीं। बच्चों को सफलता के साथ-साथ असफलता से निपटने का गुण भी सिखाना चाहिए। दादा-दादी अपने जीवन के अनुभव से बच्चों को यह सिखाते हैं कि गलतियां करना ठीक है लेकिन उससे सीखना जरूरी है।
जीवन की कद्र करें
जीवन एक उपहार ही तरह खास है। हर पल का आनंद लेना और आभार व्यक्त करना सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। नानी बच्चों को जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को महत्व देना सिखाती हैं। ये गुण बच्चे को कठिन परिस्थिति से लड़ने की हिम्मत देगा।
अपनी जड़ों से जुड़े रहें
अपनी जड़ों से जुड़ना आपको अपनी पहचान देता है। दादी-नानी बच्चों को परिवार की परंपराओं और इतिहास के बारे में बताते हैं, जो उनकी आत्म-जागरूकता और गर्व को बढ़ाता है। जैसे नानी अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़ी रहती हैं वैसे ही बच्चों को भी इनसे जुड़ने का प्रयास करना चाहिए।
