कोरोना काल में हम सभी ने अच्छी सेहत के महत्व को बेहद ही बारीकी से समझा है। इस न्यू नार्मल की दुनिया में हर व्यक्ति की पहली प्राथमिकता खुद को और अपने परिवार को निरोगी रखना है। यूं तो इसके लिए कई रास्ते अपनाए जा सकते हैं, लेकिन योगाभ्यास उनमें शायद सबसे अच्छा और सबसे बेहतर उपाय है। ऐसा इसलिए भी है कि यह एक तरीका है, जो आपको तन से ही नहीं, बल्कि मन से भी स्वस्थ करता है। साथ ही किसी भी स्वास्थ्य समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। इतना ही नहीं, जिम या वेट लिफ्टिंग आदि बच्चे नहीं कर सकते तो इस स्थिति में भी योगाभ्यास करना एक बेहतर ऑप्शन है। इसे आप पूरे परिवार के साथ कर सकते हैं और घर पर रहते हुए भी परिवार के हर सदस्य को फिट व निरोगी बना सकते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही आसनों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप अपने बच्चों से लेकर पार्टनर व माता-पिता के साथ बेहद आसानी से कर सकते हैं और हर किसी की सेहत का ख्याल रख सकते हैं, साथ ही अपने रिश्तों को भी बेहतर बना सकते हैं-

सबसे पहले सूक्ष्म व्यायाम

यह सबसे पहला व जरूरी स्टेप है। अक्सर देखने में आता है कि लोग सीधे योगासनों का अभ्यास शुरू कर देते हैं। जबकि आपको वास्तव में ऐसा नहीं करना चाहिए। जिस तरह आप कार्डियो एक्सरसाइज करने या फिर अन्य एक्सरसाइज करने से पहले वार्म अप करते हैं, ठीक उसी तरह योगाभ्यास से पहले पूरे परिवार के साथ मिलकर सूक्ष्म व्यायाम करें। यह सूक्ष्म व्यायाम आप सभी सदस्यों की बॉडी को वार्मअप करेंगे, जिससे आप योगासनों का अभ्यास भी अच्छे तरीके से कर पाएंगे और इससे आपमें से किसी को चोट लगने की संभावना भी नहीं होगी। आप कुछ आसान सूक्ष्म व्यायाम कर सकते हैं। जैसे शुरूआत गर्दन की रोटेशन से करें, उसके बाद शरीर के हर अंग जैसे कंधों से लेकर पैरों के पंजों तक के लिए कोई ना कोई सूक्ष्म व्यायाम अवश्य करें।

ताड़ासन से शुरूआत

योगाभ्यास ताड़ासन से शुरू करें। यह योगासन हर उम्र में अच्छा माना जाता है और इसे करना भी बेहद आसान है। खासतौर से, बच्चे अगर इस आसन का अभ्यास करते हैं तो इससे उनकी हाइट बढ़ती है। वहीं बूढ़े व्यक्तियों द्वारा इसका अभ्यास करने से उनका पॉश्चर बेहतर होता है। महिलाओं को कमर दर्द में राहत मिलती है। साथ ही यह एकाग्रता को भी बढ़ाता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों को कंधे की सीध में फैलाएं और फिर उपर की ओर उठाएं। ध्यान रखें कि इस स्थिति में आपके हाथ उपर की ओर तने हुए हों और आपके एड़ी भी जमीन से उपर हों। लेकिन अगर किसी को घुटनों की शिकायत है, तो उसके तलवे जमीन पर ही होने चाहिए। इसके बाद, पंजों पर बल देते हुए शरीर को उपर की ओर खींचे। इस दौरान शरीर का सारा भार पंजों पर ही हो। कुछ क्षण इस अवस्था में रूकें, उसके बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं। आप सभी अपनी क्षमतानुसार कम से कम दस बार इसका अभ्यास अवश्य करें।

वृक्षासन से मिलेगा लाभ

ताड़ासन के बाद अगर वृक्षासन का अभ्यास किया जाए तो बहुत अधिक लाभ मिलता है। यह आप सभी के शरीर के बैलेंस को बेहतर बनाता है। वहीं बच्चों की इस आसन से एकाग्रता बढ़ती है, जिसके कारण उन्हें पढ़ाई में इसका लाभ मिलता है। इस आसन को करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। उसके बाद आप एक पैर को मोड़ते हुए दूसरे पैर के घुटनों पर रखें और अपने हाथों को उपर ले जाते हुए नमस्कार मुद्रा में रखें। कुछ क्षण इसी अवस्था में रूकें और फिर सामान्य अवस्था में लौट आएं। इसके बाद दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। आप बारी-बारी से दोनों पैरों से इस आसन का अभ्यास करें। अगर आपको शुरूआत में एक पैर पर खड़े रहने में समस्या हो रही है तो आप दीवार का सहारा लेते हुए इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार

यह दोनों आसन आपकी बॉडी के लिए वार्मअप की तरह काम करेंगे। इसके बाद आप बच्चों सहित पूरे परिवार के साथ सूर्य नमस्कार का कम से कम 10-15 बार अभ्यास करें। इसे करने में ना केवल आपको मजा आएगा। बल्कि सूर्य नमस्कार करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे आपका फुल बॉडी वर्कआउट हो जाता है। सूर्य नमस्कार आपके शरीर के हर अंग को किसी ना किसी रूप में लाभ पहुंचाता ही है। इसमें 12 आसनों का एक सेट किया जाता है और जब बारह आसन एक क्रम में किए जाते हैं, तो शरीर की लगभग हर समस्या दूर हो जाती है। सूर्य नमस्कार करने का क्रम कुछ इस प्रकार है-

प्रणामासन-इसके लिए सर्वप्रथम छाती को चौड़ा और मेरूदंड को खींचें। एड़ियां मिली हुई हो और दोनों हाथ छाती के मध्य में नमस्कार की स्थिति में जुड़े हो और गर्दन तनी हुई व नजर सामने हो। अब आराम से श्वास लें और इस मुद्रा में केवल कुछ क्षण ही रूकें।

हस्तउत्तानासन-अब सांस को धीरे से अंदर खींचते हुए हाथों को उपर की ओर ले जाएं और हथेलियों को मिलाएं रखें। अब जितना ज्यादा हो सके, कमर को पीछे की ओर मोड़ते हुए अर्धचन्द्राकार बनाएं। जितनी देर संभव हो, श्वास को रोकने का प्रयास करें। यह आसन फेफड़ों के लिए काफी अच्छा माना जाता है।

पादहस्तासन-अब श्वास छोड़ते हुए व कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकडें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें। अब दोनों पैरों को मजबूती से पकड़कर सीधा रखें और नीचे झुकने की कोशिश करें।

अश्वसंचालन आसन– अब श्वास भरते हुए दोनों हाथों को मैट पर रखें और नितंबों को नीचे करें। सीधे पैर को खींचते हुए जितना ज्यादा हो सके, पीछे की ओर रखें। अब पैर को सीधा मैट के उपर रखें और वजन पंजों पर रखें। आप चाहें तो घुटना मोड़कर भी मैट पर रख सकते हैं। अब उपर देखते हुए गर्दन पर खिंचाव को महसूस करें। यह बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार है।

संतोलासान-धीरे-धीरे श्वास छोड़ें और उल्टे पैर को पीछे लेकर जाएं। इस दौरान हाथों को सीधा कंधों की चौड़ाई के बराबर मैट पर रखें।  अब कूल्हे की तरफ से स्वयं को उपर उठाएं। इस पोज में आपका शरीर उल्टे वी के समान दिखाई देगा। इस समय आपका पेट अंदर व कसा हुआ हो और नाभि अंदर मेरूदंड की तरफ खिंची हुई हो। यह आसन पेट को मजबूत बनाता है।

अष्टांग नमस्कार-श्वास को रोकते समय दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़ें। अब दोनों घुटनों व छाती को मैट पर लगाएं। दोनों कोहनियों को छाती के नजदीक लाएं। अब छाती, दोनों हथेलियां, पंजे, और घुटने जमीन पर छूने चाहिए और शेष अंग हवा में हों।

भुंजगासन-सबसे पहले मैट पर उल्टे होकर लेते जाएं। अब श्वास लेते हुए कोहनियों को कसें। अब छाती को उपर की ओर उठाएं व कंधों को पीछे की तरफ कसें। लेकिन घुटनों व पंजों को मैट पर देखें। आपकी दृष्टि उपर की ओर होनी चाहिए।

पर्वतासन-धीरे से श्वास छोड़ते हुए पंजों को अंदर करें, कमर को उपर की ओर उठाएं और हथेलियों, पंजों को मैट पर रखें। निश्चित करें कि एड़ियां मैट पर रहें। ठुड्डी को नीचे की ओर करें।

अश्वसंचालन आसन– श्वास भरते हुए दाएं पैर को आगे दोनों हाथों के बीच में लाएं। बाएं पैर को पीछे पंजे पर ही रहने दें व घुटनों को नीचे मैट पर रख लें। दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें और जांघ को मैट के समानांतर रखें। अपने हाथों को सीधे मैट पर रखें। सिर व कमर को उपर की ओर उठाएं ताकि आप उपर की ओर देख सकें।

पादहस्तासन-अब श्वास छोड़ते हुए व कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकडें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें। अब दोनों पैरों को मजबूती से पकड़कर सीधा रखें और नीचे झुकने की कोशिश करें।

हस्तउत्तानासन-श्वास भरते हुए दोनों हाथों को एक साथ उपर की ओर लेकर जाएं। जितना ज्यादा हो सके, कमर के निचले हिस्से को आगे की ओर तथा उपरी हिस्से को पीछे की ओर लेकर जाएं। जैसे ही आप हाथों को अपने सिर के उपर से पीछे की ओर लेकर जाएंगे।

प्रणामासन-अंत में श्वास छोड़ते व कमर को सीधा करते हुए हाथों को अपनी छाती के पास नमस्कार मुद्रा में लेकर आएं। कुछ क्षण इसी देर में रूकें।

 

प्राणायाम का अभ्यास

अगर आप यह चाहते हैं कि आपके परिवार का हर सदस्य सिर्फ बाहरी तौर पर ही नहीं, बल्कि भीतरी रूप में भी स्वस्थ रहे तो योगासनों के बाद प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें। विभिन्न प्राणायाम आपके शरीर के हीलिंग प्रोसेस को स्पीडअप करते हैं। मन को शांति देते हैं, जिससे तनाव व चिड़चिड़ेपन की समस्या कम होती है। साथ ही आपकी याददाश्त व ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता भी बेहतर होती है, जो बच्चों से लेकर व्यस्क यहां तक कि बूढ़े व्यक्ति के लिए भी लाभदायक है। प्राणायाम का सबसे बेहतर लाभ यह है कि इन्हें करना बेहद ही आसान है तो हर उम्र का व्यक्ति इसका अभ्यास बेहद आसानी से कर सकता है।

ओम् चैटिंग से प्रारंभ

प्राणायाम की शुरूआत हमेशा ओम् चैटिंग से की जाती है, जिसे उद्गीथ प्राणायाम भी कहा जाता है। इसके अभ्यास के लिए आप अपनी सुविधानुसार पद्मासन या सुखासन में बैठें। अब आंखें बंद करें और एक गहरी सांस लें और सांस को धीरे-धीरे छोड़ते समय ओम् का उच्चारण करें। आप महसूस करेंगे कि ओम् के उच्चारण के साथ-साथ आपका तनाव भी बाहर निकल रहा है और आप खुद को बहुत अधिक रिलैक्स महसूस कर पा रहे हैं।

कपालभांति प्राणायाम

ओम् चैंटिंग के बाद बारी आती है कपालभांति का अभ्यास करने की। आजकल मोटापा हर घर की समस्या है और उसे दूर करने में कपालभांति प्राणायाम रामबाण की तरह काम करता है। इसके अभ्यास के लिए आप सिद्धासन, पद्मासन, या ध्यान मुद्रा में बैठें। अब शरीर को ढीला छोडे़ं और सांसों को बाहर की तरफ छोडे़। इस अवस्था में आपका पेट अंदर की तरफ जाएगा। ध्यान रखें कि कपालभांति में सांस को अंदर नहीं खींचा जाता, बस बाहर की ओर धकेला जाता है। कुछ लोग इसे उल्टा करते हैं, जिसके कारण उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है। आप अपनी सुविधानुसार इसे 50 से 100 या फिर इससे भी अधिक बार कर सकते हैं।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए आप पहले की ही तरह सिद्धासन, पद्मासन, या ध्यान मुद्रा में बैठें। इसके बाद दाएँ हाथ के अँगूठे से दायीं नासिका बंद कर बायीं नासिका से श्वास को भरें, तीसरी अँगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। फिर दायाँ अँगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें और 1-2 क्षण बाह्य कुंभक करें। फिर दायीं नासिका से श्वास को रोकें, फिर बायीं से धीरे से निकाल दें।

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम आपके मन-मस्तिष्क को शांत करता है। इस प्राणायाम के अभ्या के लिए आप सबसे पहले पद्मासन या सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अपने कंधों के समांतर ले जाये। इसके बाद दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर अपने कानो के पास लायें। अब अपने दोनों हाथों के अंगूठों से अपने दोनों कानो को बंद कर लें। दोनों हाथो की तर्जनी उंगली को माथे पर और मध्यमा , अनामिका और कनिष्का उंगली को आँखों के ऊपर रखें। अब अपने मुंह को बंद कर लें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें। फिर नाक के माध्यम से ही मधुमक्खी जैसी आवाज करते हुए सांस बाहर निकालें। अब इस क्रिया को 5-7 बार दोहरायें।

इन सभी प्राणायाम के अभ्यास के बाद अंत में एक बार फिर से ओम् चैंटिंग करें।

यह भी पढ़ें –सिरदर्द ने कर दिया है बेहाल, इन योगासनों से मिलेगा आराम

हेल्थ सम्बन्धी यह आलेख आपको कैसा लगा ?  अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही  हेल्थ से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें-editor@grehlakshmi.com