क्यों बढ़ जाता है डायबिटीज में एनीमिया का जोखिम
डायबिटीज एक गंभीर समस्या है। ऐसा माना गया है कि डायबिटीज में एनीमिया का जोखिम बढ़ सकता है, जानिए इसके बारे में विस्तार से।
Connection between Diabetes and Anemia: डायबिटीज आजकल एक सामान्य बीमारी बनती जा रही है, जिसका प्रभाव हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है। यही नहीं, यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। बच्चे भी आजकल इस परेशानी का शिकार हो रहे हैं। अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि इससे एनीमिया होने का जोखिम बहुत अधिक हो सकता है। अगर बात की जाए एनीमिया की, तो एनीमिया वो कंडिशन है जो तब होती है जब हमारे शरीर में ब्लड सामान्य से कम हेल्दी रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करता है। अगर किसी को एनीमिया है, तो उनके शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं मिलता है। जिससे रोगी कमजोर और थका हुआ महसूस करता है। ऐसा पाया गया है कि डायबिटीज और एनीमिया के बीच में लिंक है। आइए जानें कि क्यों बढ़ जाता है डायबिटीज में एनीमिया का जोखिम?
डायबिटीज में एनीमिया का जोखिम बढ़ने का कारण
डायबिटीज एनीमिया का कारण नहीं बनती है और न ही एनीमिया के कारण डायबिटीज होता है। लेकिन, फिर भी यह दोनों एक दूसरे से संबंधित हैं। एक स्टडी के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज एनीमिया का कारण बन सकती है। इसलिए, डायबिटीज से पीड़ित लोगों और विशेष रूप से डायबिटीज-रिलेटेड कॉम्प्लीकेशन्स से पीड़ित लोगों में, एनीमिया होना अन्य लोगों की तुलना में आम है। जानते हैं इसके बारे में।

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डायबिटीज कॉम्प्लीकेशन्स और एनीमिया
एक स्टडी के मुताबिक डायबिटीज से पीड़ित उन लोगों में एनीमिया एक सामान्य कम्प्लीकेशन हो सकता है, जिन्हें क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या है। क्योंकि डैमेज हुई या फैल हुई किडनी उन हॉर्मोन्स को प्रोड्यूज नहीं कर पाती है, जो बोन मैरो को यह संकेत देते हैं कि शरीर को कार्य करने के लिए अधिक रेड ब्लड सेल्स की आवश्यकता है। किडनी डिजीज की शुरुआती स्टेज के लक्षण कई बार नजर नहीं आते हैं। लेकिन, अगर आपको एनीमिया या डायबिटीज दोनों हैं, तो यह किडनी के सही से काम न करने का संकेत हो सकता है। यही नहीं, हेल्दी रेड ब्लड सेल्स की कमी उन लोगों में किडनी, हार्ट और आर्टरी हेल्थ को बदतर बना सकती है, जो पहले से ही डायबिटीज से पीड़ित हैं।
डायबिटीज की दवाईयां और एनीमिया
कुछ डायबिटीज की दवाईयां प्रोटीन हीमोग्लोबिन के लेवल को कम कर सकती है, जो ब्लड के माध्यम से ऑक्सीजन ले जाने के लिए आवश्यक है। यह डायबिटीज की दवाईयां एनीमिया के डेवलप होने का जोखिम बढ़ा सकती हैं। यह मेडिसिन्स इस प्रकार हैं:
- मेटफोर्मिन
- फाइब्रॉएड
- एंजियोटेंसिन कंवर्टिंग एंजाइम इन्हिबिटर्स
- थियाजोलिडाइनायड्स
ब्लड लॉस के कारण भी एनीमिया होने का जोखिम बढ़ जाता है। अगर आपको डायबिटीज है और आप किडनी डायलिसिस से पीड़ित हैं, तो आपको एनीमिया होने का रिस्क भी अधिक हो सकता है। इसलिए इस बारे में डॉक्टर से बात करना न भूलें।

यह तो आप जान ही गए होंगे कि डायबिटीज और एनीमिया दोनों एक दूसरे से कनेक्टेड हैं, हालांकि इन दोनों में से कोई भी कंडिशन दूसरी कंडिशन का सीधेतौर कारण नहीं बनती है। डायबिटीज से जुड़ी कॉम्प्लीकेशन्स जैसे किडनी डिजीज या फेलियर और ब्लड वेसल्स में समस्या एनीमिया का कारण हो सकता है। यही नहीं, कुछ दवाईयां भी इसकी वजह बन सकती हैं। एनीमिया के कारण डायबिटीज मैनेजमेंट अधिक चुनौतीभरा हो सकता है। यानी, इसके कारण ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकती है या डायबिटीज की कॉम्प्लीकेशन्स बदतर हो सकती हैं। हालांकि, एनेमिया का सप्लीमेंट्स, सही खानपान या मेडिकेशन में बदलाव से इलाज संभव है।
