Overview:योग करते समय इन 3 गलतियों से बचें: रुजुता दिवेकर ने समझाया कब और क्यों होती है सबसे बड़ी चूक
यह स्टोरी मशहूर न्यूट्रिशन और फिटनेस एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर के अनुभव पर आधारित है। वे बताती हैं कि योग में अक्सर लोग तीन बड़ी गलतियाँ कर देते हैं – शरीर को ज़रूरत से ज़्यादा खींचना, वॉर्म-अप और कूल-डाउन छोड़ देना, और योग को केवल शारीरिक व्यायाम मान लेना। उनका कहना है कि अगर सांस पर ध्यान, प्राणायाम और मन की जागरूकता साथ में हो तो ही योग का असली लाभ मिलता है।
Common Yoga Mistakes: आजकल ज़्यादातर लोग अपनी लाइफस्टाइल में फिट रहने के लिए योग करना पसंद करते हैं। सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और आसन हमारे शरीर को ताकत देते हैं और मन को शांति पहुँचाते हैं। लेकिन कई बार हम छोटी-छोटी गलतियाँ कर बैठते हैं, जो हमारी प्रैक्टिस को कमज़ोर बना देती हैं।
फेमस न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसे कॉमन मिस्टेक्स बताए हैं, जो लोग योग करते समय अक्सर करते हैं। योग हमारी अंदरूनी शक्ति को जगाने का तरीका है। अगर सही ढंग से किया जाए तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद है।
रुजुता का कहना है कि अगर आपके पास पूरा समय नहीं है, तो भी योग छोड़ना नहीं चाहिए। चाहे आप 12 सूर्य नमस्कार न कर पाएं, 6 करें या सिर्फ 3 ही करें, लेकिन लगातार अभ्यास ज़रूरी है। साथ ही, उन्होंने संतुलन, प्राणायाम और ध्यान को भी जरूरी हिस्सा बताया है। चलिए जानते हैं उनके बताए कुछ आसान लेकिन ज़रूरी टिप्स।
योग की शुरुआत हमेशा संतुलन के साथ करें

रुजुता दिवेकर कहती हैं कि योग शुरू करते समय केवल एक ही साइड से आसन करना सही नही है। अक्सर लोग राइट साईड से शुरुआत करते हैं और लेफ्ट साईड को कम समय देते हैं। इससे शरीर का बैलेंस बिगड़ जाता है और एक साइड कमज़ोर महसूस होने लगती है। योग का असली मकसद बॉडी और माइंड को बराबर संतुलन में लाना है। इसलिए, चाहे आप पद्मासन में बैठें या सूर्य नमस्कार करें, हमेशा ध्यान रखें कि दोनों साइड बराबर काम करें। ऐसा करने से शरीर की एनर्जी सही ढंग से फ्लो करेगी और मन को भी शांति मिलेगी।
समय कम हो तो भी योग छोड़ें नही

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर पूरा समय नहीं मिला तो योग करने का कोई मतलब नही। लेकिन रुजुता मानती हैं कि योग कितना किया, उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप करते रहें। अगर आप रोज़ 12 सूर्य नमस्कार नहीं कर पा रहे, तो 6 करें। और 6 भी नहीं तो सिर्फ 3 ही सही। लेकिन अभ्यास पूरी तरह छोड़ना नही चाहिए। थोड़े से समय में किया गया सही योग भी शरीर को एनर्जी देता है और पूरे दिन ताज़गी बनाए रखता है।
केवल प्राणायाम या केवल आसन न करें
योग में प्राणायाम और आसन दोनों का मेल बहुत ज़रूरी है। अगर आप रोज़ सिर्फ प्राणायाम ही करते हैं और आसन को छोड़ देते हैं, तो यह अधूरा है। उसी तरह, अगर आप केवल आसन करते हैं और प्राणायाम को कभी नहीं करते, तो योग का असली फायदा नहीं मिलेगा। रुजुता कहती हैं कि कम से कम महीने में एक-दो बार प्राणायाम को अपनी प्रैक्टिस में ज़रूर शामिल करें। यह बॉडी और माइंड दोनों के लिए बेहद ज़रूरी है।
योग को केवल दिखावे के लिए न करें
आजकल सोशल मीडिया पर लोग योगासन की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हैं। कई बार लोग दूसरों को देखकर मुश्किल आसन करने लगते हैं। लेकिन योग का मकसद काम्पिटिशन नही, बल्कि अपनी भीतरी शक्ति को पहचानना है। अगर आप ज़बरदस्ती कठिन आसन करेंगे, तो चोट लग सकती है या शरीर में खिंचाव हो सकता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार आसन करें और धीरे-धीरे प्रैक्टिस को बेहतर बनाएं।
शरीर और मन दोनों का ध्यान रखें
योग सिर्फ शरीर को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए नही है, बल्कि यह मन को भी शांत करने का तरीका है। अगर आप बिना ध्यान और सांस पर फोकस किए सिर्फ आसन करेंगे, तो यह केवल एक्सरसाइज़ बनकर रह जाएगा। योग का असली असर तभी दिखता है जब आप सांस को नियंत्रित करते हैं और मन को प्रेजेंट मोमेंटमें लाते हैं। इसलिए हर आसन करते समय गहरी सांस लें और खुद को रिलैक्स महसूस करें। यही योग की असली खूबसूरती है।
शिव राजवंशी एक योग और अध्यात्म से जुड़े प्रैक्टिशनर हैं। वे सालों से योग, प्राणायाम और मेडिटेशन को लोगों तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि योग सिर्फ शरीर को फिट रखने का तरीका नही है, बल्कि ये मन और आत्मा को भी संतुलन देता है। अपनी सीख और अनुभव से वे लोगों को बताते हैं कि कैसे छोटी-छोटी गलतियों से बचकर योग का असली फायदा लिया जा सकता है। शिव राजवंशी कहते हैं कि असली योग सिर्फ आसन करने का नाम नहीं है। इसमें शरीर के पोस्चर, साँसों पर कंट्रोल और मन को शांत रखना।
पहली गलती होती है अपने शरीर पर ज़्यादा ज़ोर डालना। कई लोग जल्दी-जल्दी मुश्किल आसन सीखना चाहते हैं या दूसरों को देखकर खुद को पुश दे देते हैं। इससे शरीर में खिंचाव आ सकता है, जोड़ों में दर्द हो सकता है और धीरे-धीरे योग करने का मन भी उचटने लगता है।
दूसरी गलती है वार्म-अप और कूल-डाउन को भूल जाना। योग शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करना और बाद में उसे आराम देना बहुत ज़रूरी है। अगर ये स्टेप छोड़ दें, तो शरीर में अकड़न, दर्द और फ्लेक्सिबिलिटी कम होने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं।
तीसरी बड़ी गलती है योग को सिर्फ एक्सरसाइज़ समझ लेना। अगर इसमें साँसों की सही तकनीक (प्राणायाम) और ध्यान (माइंडफुलनेस) को न शामिल करें, तो योग का असली मज़ा ही चला जाता है। तब ये बस एक और वर्कआउट बनकर रह जाता है।
