अयोध्या नगरी भारत के प्राचीन नगरों में से है। हिंदू पौराणिक मान्याताओं के अनुसार सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अंवतिका और द्वारका को शामिल किया गया है। ये सभी सातों मोक्षदायिनी और पवित्र नगरियां यानी पुरियां हैं। चार वेदों में अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर माना है। अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था। अयोध्या नगरी सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है। इस पावन नगरी में ऐसे बहुत से धार्मिक दार्शनिक स्थल है, जिनके दर्शनों के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। आइए जानते हैं इन धार्मिक स्थानों का महत्व और इतिहास। सबसे पहले शुरू करते हैं सरयू नदी से, पुराणों में वर्णित है कि सरयू नदी भगवान विष्णु के नेत्रों से प्रकट हुई है। सरयू नदी का अपना एक अलग इतिहास है, जो अयोध्या के निकट बहने वाली प्राचीन नदियों में से एक है। आइए जानते हैं सरयू समेत अन्य स्थानों के बारे में
सरयू नदी
भारत की प्राचीन नदियों में उत्तर प्रदेश के अयोध्या के निकट बहने वाली नदी के रूप में सरयू को देखा जाता है। उत्तर में हिमालय के कैलाश मानसरोवर से इसका उद्गम माना जाता है, जो किसी प्राकृतिक या भौगोलिक कारणों से बाद में वहां से लुप्त हो जाती हैं। रामायण के अनुसार भगवान राम ने इसी नदी में जल समाधि ली थी। सरयू नदी का उद्गम उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से हुआ है। बहराइच से निकलकर यह नदी गोंडा से होती हुई अयोध्या तक जाती है।
कालेराम मंदिर 
यह मंदिर श्री अयोध्या के सिद्धस्थानों में प्रसिद्ध है हजारों रामभक्त नित्य दर्शन एवं उपासना कर अपनी मनौतियों को पूर्ण करते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां संपूर्ण श्रीरामपंचायत एक ही शालिग्राम शिला में हैं, जो अन्यत्र दुर्लभ है। मध्य में रामजी, उनके वामांग में किशोरी जी, उनके वामांग में भरतलालजी रामजी के दक्षिण लक्ष्मण जी, उनके दक्षिण शत्रुहनलाल जी, श्रीरामपंचायतन राज्याभिषेक का दर्शन है। लखनलाल जी के हाथ में छत्र का दण्ड हैं, शत्रुघ्नलाल जी के हाथ में चंवर एवं भरतलाल जी के हाथ में पंखा, श्री चरणों में सेवाभाव में दक्षिण मुखी श्रीहनुमान जी महाराज विराजमान है। खुले विग्रह का दर्शन वर्ष में 2 दिन ही होता है संवत्सर का प्रथम दिन एवं रामनवमी के दिन। वर्ष भर मंदिर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
नागेश्वरनाथ मंदिर 
अयोध्या में राम मंदिर के अलावा भगवान शिव का भी एक भव्य मंदिर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश ने कराया था. ऐसा कहा जाता है कि जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थे, तब उनका बाजूबंद खो गया था। कुश का बाजूबंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुश से प्रेम हो गया। कुश ने नाग कन्या के लिए ही यह मंदिर बनवाया था। 
मणि पर्वत 
मणि पर्वत से भी कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेकर आ रहे थे तो उसका एक हिस्सा अयोध्या में गिर गया था। उस हिस्से को ही मणि पर्वत के नाम से जाना जाता है।
कनक भवन
कनक भवन को सोने का घर नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान राम और सीता की सोने के मुकुट वाली मूर्तियां हैं। यह काफी भव्य और सुंदर महल है। माना जाता है कि विवाह के उपरांत माता कौशल्या ने भगवान राम की पत्नी सीता को यह मुंह दिखाई में दिया था।
दशरथ भवन
शहर के मध्य में स्थित दशरथ भवन वह जगह है जहां भगवान राम के पिता और अयोध्या के राजा दशरथ का निवास था। यह एक भव्य महल है, जिसको देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है।
सीता की रसोई
वास्तव में सीता की रसोई कोई रसोई घर नहीं है बल्कि यह एक मंदिर है। माना जाता है कि सीता की रसोई यहीं पर थी। मंदिर के एक कोने में पुराने रसोई घर का एक मॉडल है जहां प्राचीन, बर्तन आदि का नमूना है। मंदिर परिसर के दूसरे किनारे में चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न एवं उनकी पत्नियों की मूर्तियां हैं।
त्रेता के ठाकुर
त्रेता के ठाकुर अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान राम की मूर्तियों को रखा गया है जो प्राचीन समय में काले रेत के पत्थरों से उकेरी गई थीं। इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह वही जगह है जहां पर श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था। अगर आप अयोध्या की यात्रा करने के लिए जा रहे हैं तो आपको इस पवित्र मंदिर के दर्शन के लिए जरुर जाना चाहिए।
मोती महल
मोती महल फैजाबाद में अयोध्या शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक बेहद आकर्षक संरचना है जिसे लोकप्रिय रूप से ‘पर्ल पैलेस’ के रूप में जाना जाता है। इस महल का निर्माण 1743 ई में किया गया था जो नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी रानी बेगम उन्मतुजोहरा बानू का घर था। मोती महल मुगल वास्तुकला में एक बेहतरीन नमूना है और इसे देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। अगर आप अयोध्या के पास घूमने की किसी अच्छी जगह की तलाश में हैं, तो आपको मोती महल देखने के लिए जरुर जाना चाहिए। 
दन्तधावन कुंड
अयोध्या नगरी के बीचोंबीच हनुमानगढ़ी इलाके में ही एक बड़ा-सा कुंड है, जो दन्तधावन कुंड नाम से जाना जाता है। इसे ही राम दतौन भी कहते हैं। कहा जाता है कि श्रीराम इसी कुंड के जल से सुबह अपने दांतों की सफाई करते थे।
राजा दशरथ का महल
राजा दशरथ का महल भी बहुत प्राचीन और भव्य है। इसके परिसर में काफी संख्या में जमा होकर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते रहते हैं। 
छोटी देवकली और बड़ी देवकली 
उपरोक्त के अलावा दो देवी स्थान भी हमारे अयोध्या मे बहुत प्रसिद्ध है। जिनहे हम छोटी देवकली और बड़ी देवकली के नाम से जानते है। छोटी देवकली के बारे मे मान्यता है कि ये माता सीता की कुलदेवी है और माता सीता के विवाह के पश्चात ये माता सीता के साथ अयोध्या आ गई थी। और इनके लिए यहां दिव्य मंदिर का निर्माण किया गया। ये स्थान नयाघाट से हनुमान गढ़ी के मध्य मे पड़ता है। बड़ी देवकली माता को भगवान श्री राम की कुल देवी के रूप मे मान्यता प्रपट है। ये अयोध्या के बाहरी क्षेत्र मे मौजूद है। 
नंदीग्राम भरतकुंड
अयोध्या जिले के एकदम आखिरी क्षोर पर स्थित श्री भरतकुंड की आध्यात्मिक महिमा बहुत अधिक है। मान्यता है प्रभु श्री राम के वनवास के उपरांत को उनके भाई भरत जब उनके खड़ाऊँ लेकर आए तो उन्होने भी राजपाट छोडकर सन्यास धरण किया और अयोध्या के बाहरी क्षेत्र नंदीग्राम मे 14 वर्षों तक ताप साधना की और राम के आने का इंतजार किया आज उसे हम भरतकुंड के नाम से जानते है।
यह भी पढ़े 

राम मंदिर की बनावट क्यों है खास, बनने के बाद दिखेगा ऐसा