अयोध्या के इन घाटों पर लगती है आस्था की डुबकी: Ayodhya Ghats
Ayodhya Ghats

Ayodhya Ghats: रामलला की धरती अयोध्या बहुत से मायनों में खास है। इस शहर की खास बात है कि इस शहर में रहने वाले ही नहीं बल्कि हर भारतीय के मन में इस शहर के प्रति एक आस्था और लगाव है। ऐसा हो भी क्यों न? आखिर यह पावन धरती रामलला की जो है। अपना वनवास पूरा कर भगवान राम यहीं लौटे थे। अगर आप इस शहर में प्रवेश करेंगे तो आपको यहां की हवाओं में एक आस्था और हिंदुत्व नजर आएगा। लेकिन आपको बता दें कि यह शहर सिर्फ अपने राममंदिर के लिए नहीं बल्कि अपने घाटों के लिए भी प्रसिद्ध है। तो जानते हैं कि रामलला की नगरी अयोध्या के किन घाटों पर लगती है आस्था की डुबकी। यहां सरयू नदी के किनारे 14 घाट हैं। इसमें अगर प्रमुख घाट की बात करें तो नया घाट, गुप्तार घाट, कैकयी घाट, कौशल्या घाट, लक्ष्मण घाट और पापमोचन घाट प्रमुख हैं।

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गुप्तार घाट

सरयू नदी के तट पर स्थित यह घाट अयोध्या के महत्वपूर्ण घाटों में से एक है। यहां बहुत से मंदिर भी है। इस घाट की शाम की आरती बहुत प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यही वो घाट है जहां भगवान राम ने बैकुंठ के लिए जल समाधी ली थी।

राम की पैडी

Ram ki Pauri
Ayodhya Ghats-Ram ki Pauri

यह घाटों की श्रृंखला है। यहां पर हिंदू धर्म को मानने वाले आस्था की डुबकी लगाने जरुर पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता हे कि इस घाट में डुबकी लगाने मात्र से ही सारे पाप धुल जाते हैं। विशेषरुप से इस घाट की खूबसूरती देखते ही बनती है। इस घाट को पापमोचन घाट भी कहा जाता है।

राम घाट

यह घाट जन्म भूमि से कुछ किमी की दूरी पर स्थित है। इस घाट को स्वर्गद्वार भी कहा जाता है। माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां भगवान राम, देवी सीता और भगवान लक्ष्मण ने संत गोस्वामी तुलसीदास के साथ विस्तृत बातचीत की थी। यही एक बड़ी वजह है कि यह लोगों के दिल और दिमाग में एक खास जगह रखता है। यहां आप सीढ़ियों पर ऐसे ही खाली बैठ जाएं। आपको अपने मन में बहुत शांति महसूस होगा। इस घाट पर बोटिंग की सुविधा भी मौजूद है।

लक्ष्मण घाट

Laxman Ghat
Laxman Ghat

यह वो घाट है जहां भगवान राम से असीम प्रेम करने वाले उनके भाई लक्ष्मण ने अपने प्राण त्यागे थे। अगर आप इस घाट पर बैठेंगे तो आपको महसूस होगा कि लक्ष्मण जी की विरासत आज भी यहां सांस ले रही है। इस घाट को समाधि के नाम से भी जाना जाता है। पूर्णिमा को छोड़कर यहां दूसरे दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ रहती है।