बाजार में हजारों किस्म की ऊन उपलब्ध है, मगर अच्छे किस्म की ऊन वही खरीद सकता है, जिसे यह पता हो कि अच्छी ऊन कौन सी है और किस उम्र के लिए किस प्रकार की उन खरीदनी चाहिए। तो आइए जाने कि किस प्रकार की ऊन उम्दा किस्म की है-

  • बड़े उम्र वालों के लिए हल्के व बच्चों के लिए गहरे व चटकीले शेड ही सुंदर लगते हैं। महिलाओं के लिए उनके कपड़ों से मेल खाते ही बनाने सही रहते हैं।
  • बुनाई के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी की सलाइयां इस्तेमाल करें। पौनी फैंटम आदि की सलाइयां सही रहती हैं।  
  • जब भी बुनाई करें ऊन के गोलों को हमेशा पोलीथिन में रखें। इससे उन गंदा नहीं होता।
  • नवजात शिशुओं के लिए हमेशा काले-पीले हरे, नीले रंग न लेकर बेबी कलर ही खरीदें।
  • बच्चों के लिए हमेशा चमकदार, चटकीले रंग की ऊन ही खरीदें तथा बच्चों के स्वेटर हमेशा 2-3 रंग की उन लगाकर ही बनाएं।
  • युवाओं के लिए व बच्चों के लिए हमेशा ऊन के नाप से थोड़े बड़े स्वेटर ही बनाएं, क्योंकि वह जल्दी बढ़ते हैं।

ऊन खरीदते समय इन बातों का खास ध्यान रखें

बुनाई कला की पहली क्लास में ऊन के बारे में तो आपको पूरी जानकारी मिल गई। अब दूसरी क्लास में हम बताते हैं कि ऊन खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें और किस तरह से ऊन खरीदें।

  • ऊन खरीदते समय पहनने वाले की आयु, रंग और लिंग आदि का ध्यान रखकर ही ऊन खरीदें। इसी तरह कम उम्र की लड़कियों व महिलाओं की उम्र का ध्यान रख कर शेड खरीदें। 
  • नवजात शिशुओं के लिए बाबा वूल ही खरीदें, जो मुलायम व हल्की हो। फर वाली ऊन का प्रयोग ना करें। 
  • ऊन को हमेशा दिन में शोरूम से बाहर आकर ही देखें, क्योंकि शोरूम की रोशनी में शेड में हल्का अंतर मालूम नहीं पड़ता। पर जब स्वेटर बनाने पर वह अंतर सामने आता है। 
  • हमेशा अच्छी क्वालिटी की ऊन का चुनाव करें। कभी भी सस्ती किस्म की ऊन न खरीदें। ऊन को छूकर देखें, अगर ऊन चुभती है तो कभी भी न खरीदें। हमेशा हाथों को मुलायम लगने वाली ऊन खरीदें। 
  • ऊन जितनी हल्की होगी उतनी ही अच्छी होगी। हल्के वजन वाली ऊन मुलायम होती है। ऊन का गोला हमेशा ढीला लपेटें। कसकर गोला बनाने से ऊन चमक खो देती है और ऊन की नमी भी कम हो जाती है।
  • बुनाई शुरू करने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धों लें और हाथ सुखाकर ही अच्छी तरह से बुनना शुरू करें, वरना हाथों पर लगी गंदगी, चिकनाई स्वेटर को रंगहीन बना देती है

एक अच्छा स्वेटर कैसे बुनें और कैसे समझे बुनाई पैटर्न की भाषा

महिलाएं जब रेडीमेड स्वेटर को देखती हैं तो सोचती हैं कि हमारे स्वेटर इतने सफाई से क्यों नहीं बनते। अगर वे स्वेटर बुनते समय इन बातों का ध्यान रखें तो उनके बुने हुए स्वेटर भी रेडीमेड स्वेटर के जैसे बेहतरीन बन सकते हैं-

  • बार्डर हमेशा 10 या 11 नं. की सलाई पर ही बनाएं, क्योंकि बार्डर से ही स्वेटर की शोभा होती है।
  • बार्डर को हमेशा डबल करके ही फं. डालें। इससे बार्डर कसा-कसा होगा।
  • स्वेटर एक ही व्यक्ति के हाथ से बुना जाना चाहिए। 2 लोगों के हाथों से बुने स्वेटर में सफाई नहीं आती।
  • स्वेटर बुनते हुए अगर बीच में कभी उठना भी पड़े तो सलाई को पूरी करके ही उठें, 2 सलाइयों में कभी भी फं. न छोड़े। ऐसा करने स्वेटर में छेद हो जाता है। 
  • सफेद या लाइट रंग के ऊन से स्वेटर बुनते समय ऊन को निटिंग बैग में ही रखें और बुनाई शुरू करने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लें।
  • दो रंग की ऊन से स्वेटर बुनें तो जितने फं. आप साधारण स्वेटर में डालती हैं, उनसे 10-12 फं. ज्यादा डालें।
  • जो बुनाई ज्यादा खुलती है उसमें 10-12 फं. कम और जो ज्यादा खुलती नहीं है उसमें 10-12 फं. ज्यादा डालें।
  • ऊन का कोई भी परिधान बुनते समय हर सलाई में पहला फं. सी. बुने इससे गले की छटाई में सफाई आएगी।
  • ‘वी’ गला घटाते समय गले का फं. घटाने के बाद किनारे के 2 फं. सी. बुनें। इससे गले की छटाई में सफाई आएगी।
  • गोल गला घटाते समय गले के फं. घटाने हैं, उन्हें बंद न करें, बल्कि बिना बुने ही रहने दें। जब गले के बॉर्डर के फं. उठाने हों तो छोड़े हुए फं. को 10 नं. की सलाई में डालें, इनके बीच 2 से फं. उठाती जाएं। 

बुनाई पैटर्न की भाषा को कैसे समझे

जब आप बुनाई सीखना शुरू कर रहे हैं, तो यह जानना मुश्किल हो सकता है कि किसी भी बुनाई पैटर्न कैसे समझा जाए। कोई पैटर्न बुनने से पहले उसे बनाने की तकनीक को पूरी तरह पढ़ें। इससे आपको परिधान के अन्तिम रूप और उसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक का पता चल जाएगा। अधिकतर डिज़ाइनों में नीचे दिए घटक शामिल होते हैं-

नाप/आकार

डिज़ाइनों में वयस्कों के लिए छाती का नाप इंचों या सेंटीमीटर में और बच्चों का नाप उम्र के हिसाब से दिया होता है। फिर भी यदि दिखाई गई पोशाक आपकी आवश्यकता से बड़ी या छोटी हो तो डाले गए फंदों को घटा अथवा बढ़ा कर उसे छोटा अथवा बड़ा किया जा सकता है।

सामग्री

यार्न की मात्रा, सलाइयों, बटन आदि सहित पोशाक के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री शामिल होती है।

खिंचाव

डिज़ाइन के निर्माण में खिंचाव बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, जो पोशाक के सही माप को निर्धारित करता है। यदि आप पोशाक का नाप बिल्कुल सही चाहते हैं, तो प्रति वर्ग सेंमी./इंच में डिज़ाइन में बताए गए फंदे ही आने चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि दिया गया खिंचाव 25 फंदे & 30 पंक्तियां=10&10 सेंमी. 8 नं. की सलाइयों पर स्टाकिंग स्टिच में बुनते हुए, उसे 8 नं. की सलाइयों से उसी प्रकार बनाने की कोशिश करें। 

कहे गये फंदों से ज्यादा फंदे डालें (इस मामले में 25 फंदे) और निर्धारित सलाइयों (8 नं. की) का इस्तेमाल करते हुए कुछ और पंक्तियां बुनें। यह काम स्टॉ.स्टि. में बुन कर बंद कर दें। बुने गये भाग को समतल स्थान पर रख कर निर्धारित फंदे गिन कर दोनों ओर एक-एक पिन लगा दें। इन दोनों पिनों के बीच की दूरी 10 सेमी. होनी चाहिए। यदि यह ज्यादा है तो आपके हाथ का खिंचाव डिज़ाइनर के हाथ के खिंचाव से ज्यादा है। छोटी सलाइयां लगाकर दोबारा बुनें। ज़रूरत पड़ने पर तब तक दोहराएं, जब तक खिंचाव सही न हो जाए। पंक्तियों के लिए भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

बुनाई संकेत चिन्ह

सं.- सलाई, फं.-फंदे/फंदा, सी.-सीधा, उ.-उल्टा, सेमी.-सेंटीमीटर, मी.-मीटर, नं.-नंबर, लं.-लम्बा या लम्बाई, स्टा.स्टि.-स्टाकिंग स्टिच (1 सलाई सीधी, 1 सलाई उल्टी) क्रॉ.स्टि.-क्रॉस स्टिच, गा.स्टि.-गार्टर स्टिच, प्रत्येक सलाई में सभी फं. उल्टे, सिं.रि.-सिंगल रिब (हर सलाई में 1 फंदा सीधा 1 फंदा उल्टा), ड.क्रो.-डबल क्रोशिया, ट्रे.- ट्रेबल (क्रोशिया बनाते समय एक लूप में से धागे को तीन बार निकालना), चे.-चेन, स्लि.स्टि.-स्लिप स्टिच, स्टि.हो.-स्टिच होल्डर, मॉ.स्टि.-मॉस स्टिच, ध.अ.क.-धागा आगे करके। 

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