दूसरा दिन-

– ऊन खरीदते समय पहनने वाले की आयु, रंग और लिंग आदि का ध्यान रखकर ही ऊन खरीदें। बड़े उम्र वालों के लिए हल्के व बच्चों के लिए गहरे व चटकीले शेड ही संदर लगते हैं। इसी तरह कम उम्र की लड़कियों व महिलाओं की उम्र का ध्यान रख कर शेड खरीदें। 
– नवजात शिशुओं के लिए बाबा वूल ही खरीदें, जो मुलायम व हल्की हो। फर वाली ऊन का प्रयोग ना करें। 
-ऊन को हमेशा दिन में शोरूम से बाहर आकर ही देखें क्योंकि शोरूम की रोशनी में शेड में हल्का अंतर मालूम नहीं पड़ता। पर जब स्वेटर बनाने पर वह अंतर सामने आता है। 
– हमेषा अच्छी क्वालिटी की ऊन का चुनाव करें। कभी भी सस्ती किस्म की ऊन न खरीदें। ऊन को छूकर देखें, अगर ऊन चुभती है तो कभी भी न खरीदें। हमेशा हाथों को मुलायम लगने वाली ऊन खरीदें। 

 

 

 -ऊन जितनी हल्की होगी उतनी ही अच्छी होगी। हल्के वजन वाली ऊन लंगी व मुलायम होती है। ऊन का गोला हमेशा ढीला लपेटें। कसकर गोला बनाने से ऊन चमक खो देती है और ऊन की नमी भी कम हो जाती है। 

-बुनाई शुरू करने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धों लें और हाथ सुखाकर ही अच्छी तरह से बुनना शुरू करें, वरना हाथों पर लगी गंदगी, चिकनाई स्वेटर को रंगहीन बना देती है