ऊन का सफर –
चलिए पहली क्लास में आपको बताते हैं कि ऊन के सफर के बारे में। ताकि आपको पता चल सके कि जिस ऊन के स्वेटर आप पहनती हैं आखिर वो कहां से आते हैं। ऊन भेड़ की देन है। इसकी ऊन का विभिन्न परिधानों के रूप में इस्तेमाल आज से शुरू नहीं हुआ है बल्कि दस हजार साल पहले से विश्व की विभिन्न आदि जातियो और राष्ट्रों द्वारा किया जा रहा है। उनके वस्त्र रेगिस्तान की बधुओं से लेकर ग्रीनलैंड के एस्कीमों तक पहनते है। ऊन की कोई सानी नहीं है। यदि ऊन के वस्त्र सही तरीके से तैयार किए जाएं तो पैदा होते बच्चों से लेकर पर्वतारोहियों के लिए न केवल आरामदायक होते हैं बल्कि व्यवहारिक भी होते हैं। ऊन सारी दुनिया में प्रयोग की जाती है। सारी दुनिया के वैज्ञानिक ऊन के गुणों को ध्यान में रखकर इसकी हुबहु नकल करने में जुटे हुए हैं। पर अभी तक इसमें पूरी तरह से सफल नहीं हो पाएं है। 
भेड़ों की नई नस्लें हैं प्राचीन काल के फीनिषियन्स मषीनों नस्ल की भेड़ को स्पेन में 1000 से 90000 बी‐सी‐में लेकर गए थें। इस समय उच्च क्वालिटी की ऊन पैदा करने वाली जितनी भी भेड़े हैं उनकी पूर्वज कभी मशीनों भेड़ें ही हुआ करती थी। ब्रिटेन में अंग्रेजों ने अपनी स्वथ्य नस्लवाली भेड़ेां के साथ क्रॅास ब्रीड़ करना कर बेहतरीन ऊन वाली भेड़े तैयार कर ली। इसकी वजह से ब्रिटेन ने विश्व के ऊन उद्योग में अग्रणी स्थान बना लिया है। कपड़ा मिलों के विकास की वजह से उत्पादन दर बढ़ ही है, साथ ही ब्रिटिश सम्राज वाले देशों में भेड़ पालन शुरू किया गया। आस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में भी मशीनों भेड़ के परिणाम अच्छे आएं हैं।