त्योहार यानी खुशियाँ। और खुशियाँ यानी जी भरकर मनपसंद खाना-पीना। इतना तो ठीक है लेकिन यदि यही मनपसंद खाना-पीना शुद्ध न हो तो जी का जंजाल बन सकता है। पेट खराब होना तो आम समस्या है लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी का भी कारण बन सकता है। त्योहारों के सीजन में तो खासतौर पर कुछ खाद्य पदार्थ (दूध, देसी घी, मावा आदि) की शुद्धता का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है।

 मिलावट करने वालों की यूं तो हर मौसम में ही चाँदी होती है लेकिन त्योहार का मौसम तो उनके लिए सबसे बढिया सीजन होता है क्योंकि यही ऐसा वक्त होता है जब सभी लोग अपने-अपने में मग्न होते हैं और सबको अच्छे से अच्छा सामान घर ले जाने की जल्दी भी होती है। दुकानों पर भीड़ होती है इसलिए कोई चाहे तो भी दुकानदार से इस बारे में शिकायत नहीं कर सकता। ऐसे में ज्यादातर सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों पर मिलावट का ग्रहण लग जाता है। त्योहारों में हमारे देश में मिठाई की खास जगह होने की वजह से मिठाई और ऐसा सामान जिससे मिठाई बनती है खास तौर पर प्रभावित होता है। दूध, शहद, मावा, घी, खाद्य तेल इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मिलावट वाले खाद्य को देखकर या खाकर कोई समझ नहीं सकता कि यह शुद्ध नहीं है। मिलावटी खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और लकवा तथा ट्यूमर जैसी अनेक खतरनाक बीमारियाँ भी शरीर को घेर सकती हैं। खाद्य पदार्थों को प्रयोग करने से पहले ही अगर उनकी जाँच कर ली जाए तो बेहतर होगा।आप बीमारियों से बचने के साथ-साथ बिना किसी शंका के त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मना सकते हैं।

खाद्य पदार्थों में करें मिलावट की जाँच

दूध में मिलावट-
दूध में साधारणतया पानी की मिलावट की जाती है। यदि पानी शुद्ध हो तब तो बड़ी बात नहीं है लेकिन यदि पानी की जगह यूरिया, रंग या वाशिंग पाउडर की मिलावट हो तब इसे पीकर या इससे बने खाद्य पदार्थ खाकर अच्छे स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी जल्दी ही बीमार पड़ सकता है। दूध में सामान्यत: पानी, सप्रेटा, स्टार्च की मिलावट हो सकती है। पानी की मिलावट की जाँच लैक्टोमीटर द्वारा की जाती है। इसकी रीडिंग 28 से 34 होनी चाहिए। अगर ये रीडिंग 28 से नीचे जाती है तो पानी की मिलावट प्रमाणित हो जाती है। ऐसे में मिलावट करने वाले लैक्टोमीटर की रीडिंग बढाने के लिए दूध में यूरिया, चीनी, वाशिंग पाउडर, और यहां तक कि ईजी, शैम्पू, रिफाइंड आयल, डिटर्जेंट, सोडा आदि भी मिला देते हैं। इसकी जांच करने के लिए दूध में आयोडीन मिलाकर गरम करें। अगर दूध का रंग नीला हो जाता है तो इसका अर्थ है कि दूध में स्टार्च मिलाया गया है। यूरिया,डिटर्जेंट इत्यादि मिले घटिया दूध की जाँच के लिए दूध में बराबर मात्रा में एल्कोहल मिला कर देखें। अगर यह फट जाता है तो यह दूध घटिया किस्म का है। इसी तरह किसी चिकनी या पॉलिश की गई खड़ी सतह पर दूध की एक बूंद गिराएं। यदि बूंद धीरे-धीरे नीचे गिरे और सफेद निशान छोड़े तो साफ है कि मिलावट नहीं है।

देसी घी या मक्खन में मिलावट-
देसी घी या मक्खन में आमतौर पर चर्बी या वनस्पति घी की मिलावट की जाती है जो स्वास्थ्य संबधी अनेक विकारों को जन्म देती है। देसी घी में मिलावट की जाँच करने के लिए 10 सीसी हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा एक चम्मच चीनी मिलाएं तथा इस मिश्रण में 10 सीसी देसी घी या मक्खन मिलाएं। इसे अच्छी तरह हिलाएं। यदि इस मिश्रण का रंग लाल हो जाता है तो देसी घी या मक्खन में मिलावटी है यदि मिश्रण का रंग नहीं बदलता तो यह एकदम शुद्ध है।

मावा यानी खोये में मिलावट-
दूध को गाढ़ा करके मावा बनता है इसलिए इसको जाँचने के लिए दूध वाले उपाय ही किये जा सकते हैं। यूँ आमतौर पर मावा का भार बढ़ाने के लिए स्टार्च की मिलावट की जाती है। मावा में स्टार्च की उपस्थिति को जांचने के लिए इसकी थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर इस मिश्रण को उबालें। फिर इसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। यदि नीले रंग की परत दिखे, तो साफ है कि उसमें स्टार्च मौजूद है।

 

 खाने का तेल की मिलावट

खाने के तेल में सामान्यतया आर्जीमोन की मिलावट की जाती है जो पेट के लिए काफी हानिकारक होता है। इसको जांचने के लिए तेल के नमूने में गाढ़ा यानी सांद्र नाइट्रिक एसिड मिलाकर मिश्रण को खूब हिलाएं। थोड़ी देर बाद मिश्रण में अगर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई दे, तो यह आर्जीमोन की मौजूदगी का संकेत है।

चांदी के वर्क में मिलावट-
मिठाई पर चढ़े चाँदी के वर्क में एल्युमिनियम धातु की मिलावट की जा सकती है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती। चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट की आसानी से जांच की जा सकती है। चांदी के वर्क को जलाने से वह उतने ही भार की छोटी-सी गेंद के रूप में बदल जाता है, जबकि यदि यह वर्क मिलावटी है तो इसे जलाने के बाद गहरे सलेटी रंग का अवशेष बच जाता है।

केसर-असली या नकली-
केसर में मिलावट नहीं होती, बल्कि पूरी केसर ही बदल दी जाती है। असली और नकली केसर की पहचान बहुत आसानी से की जा सकती है। नकली केसर मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाता है। नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोडऩे लगता है जबकि असली केसर को पानी में घंटों रखने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

मिलावटी पदार्थों से बचने और असली-नकली की पहचान के लिए गृहणियों का जागरूक होना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

खुली खाद्य सामग्री न खरीदें।

सीलबंद या डिब्बाबंद उत्पादों की सील हमेशा चेक करें और मानक प्रमाण चिह्न (एगमार्क, एफ.पी.ओ., हॉलमार्क) देखकर ही खाद्य सामग्री खरीदें।

अगर आप भी इन सभी बातों का ध्यान रखेंगी तो आपके त्योहार सिर्फ इस सीजन में ही नहीं बल्कि पूरे साल आपको खुशियां देते रहेंगे।