Grammy Awards 2025: 67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में भारतीय मूल की अमेरिकी बिजनेस वुमन और संगीतकार चंद्रिका टंडन को बड़ी उपलब्धि मिली है। उनकी एल्बम ‘त्रिवेणी’ को ‘बेस्ट न्यू एज, एम्बिएंट ऑर चैंट एल्बम’ श्रेणी में ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस एल्बम की खासियत यह है कि इसमें प्राचीन वैदिक मंत्रों को विश्व संगीत के साथ मिलाकर एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव दिया गया है। चंद्रिका इसे ‘आंतरिक उपचार’ (Inner Healing) मानती हैं, और इसके सात म्यूजिक ट्रैक ध्यान (मेडिटेशन) की यात्रा पर ले जाती हैं। इस एल्बम में उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी बांसुरी वादक वाउटर केलरमैन और जापानी सेलिस्ट इरु मात्सुमोतो के साथ काम किया।
कहां हुई संगीत की शुरुवात
चंद्रिका टंडन का जन्म चेन्नई के एक पारंपरिक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। वह प्रसिद्ध बिजनेस लीडर और पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन इंद्रा नूई की बड़ी बहन हैं। उनके परिवार में कर्नाटक संगीत, सामवेद और वैदिक मंत्रों की पढ़ाई की परंपरा रही है। बचपन से ही संगीत उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा शुभ्रा गुहा और गिरीश वज़लवार से ली।
कैसी रही शुरुआती शिक्षा
चंद्रिका ने अपनी उच्च शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से की और बाद में IIM अहमदाबाद से मास्टर्स डिग्री हासिल की। उन्होंने मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म McKinsey में काम किया और पहली भारतीय-अमेरिकी महिला पार्टनर बनीं। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में टंडन कैपिटल एसोसिएट्स की स्थापना की, जो कंपनियों के री-स्ट्रक्चरिंग का काम करती है।
समाज सेवा के लिए भी जानी जाती है
चंद्रिका और उनके पति रंजन टंडन समाज सेवा के लिए भी जाने जाते हैं। 2015 में, उन्होंने न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग को 100 मिलियन डॉलर दान किए। उनका मानना है कि शिक्षा और संगीत दोनों ही लोगों के जीवन को बदल सकते हैं।
पहले भी मिल चुका है चंद्रिका को ग्रैमी नॉमिनेशन
यह पहली बार नहीं है जब चंद्रिका के संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली हो। 2010 में, उनके एल्बम ‘ओम नमो नारायण: सोल कॉल’ को भी ग्रैमी के लिए नामांकित किया गया था। इस बार, ‘त्रिवेणी’ की जीत ने भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर फिर से सम्मान दिलाया है।
