Gehrayee
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Summary : गहराई की निर्देशक ने झेला है अपार दुख

फिल्म के रिलीज होते ही उनके फोन बजने लगे थे, फिर धीरे-धीरे जीवन के खास लोग उनसे छूटने लगे...

Gehrayee Movie: 1980 में एक ऐसी हॉरर थ्रिलर फिल्म आई थी जिसने लोगों को हिला कर रख दिया था। इस फिल्म का नाम था ‘गहराई’। इस फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे, अनंत नाग, श्रीराम लागू और इंद्राणी मुखर्जी जैसे दिग्गज कलाकार थे। अमरीश पुरी का एक छोटा लेकिन यादगार रोल भी था। इस फिल्म की कहानी जितनी डरावनी थी, उससे जुड़ी हकीकत उससे भी अधिक रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

फिल्म की डायरेक्टर अरुणा राजे थी, जिन्होंने छह राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। अरुणा ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में फिल्म से जुड़ा ऐसा खुलासा किया जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। अरुणा बताती हैं कि जब वह बेंगलुरु में अपने परिवार के साथ रहती थीं, तो उनके घर के बगीचे में रोज कुछ अजीब चीजें मिलती थीं… जैसे हल्दी और कुमकुम लगे हुए नींबू वगैरह। उन्हें बाद में पता चला कि ये काले जादू से जुड़ी चीजें हैं और अक्सर राजनीतिक लोगों के आसपास ऐसी गतिविधियां होती हैं।

Gehrayee Movie-black magic
black magic

इसी अनुभव से प्रेरित होकर अरुणा ने ‘गहराई’ बनाने की ठानी। उन्होंने अपने पति विकास देसाई और मशहूर लेखक विजय तेंडुलकर के साथ मिलकर इस कहानी पर काम करना शुरू किया। रिसर्च के दौरान उन्होंने कई तांत्रिकों और ओझाओं से मुलाकात की और असल जिंदगी की कई हैरान कर देने वाली कहानियां सुनीं। एक किस्सा जो फिल्म में भी झलकता है, वो एक कैथोलिक लड़की का है, जिसे एक मुस्लिम लड़की की आत्मा ने अपने वश में कर लिया था। हैरानी की बात ये थी कि वो लड़की, जो उर्दू बिल्कुल नहीं जानती थी, आत्मा के आने के बाद शायरी और कव्वालियां कहने लगती थी। अरुणा कहती हैं, “ये सुनकर रूह कांप जाती थी, लेकिन उसी डर और रहस्य में तो कहानी थी।”

जब फिल्म पर काम शुरू हुआ, तभी से अरुणा और उनकी टीम को तगड़ी चेतावनियां मिलने लगीं। बहुत से लोगों ने कहा, “इसमें मत पड़ो, ये चीज़ें ठीक नहीं होतीं। इसका अंजाम बुरा होगा।” लेकिन अरुणा को लगा, “हम तो बस एक कहानी कह रहे हैं, कुछ नया और दिलचस्प।” उन्होंने इन चेतावनियों को हल्के में लिया… पर शायद उन्हें नहीं लेना चाहिए था।

फिल्म बनने के कुछ साल बाद अरुणा की ज़िंदगी में कई दुःखद हादसे हुए। सबसे पहले उनका तलाक हुआ और फिर उन्होंने अपनी 9 साल की बेटी को कैंसर से खो दिया। अरुणा अब मानती हैं कि “शायद हमसे कुछ ऐसा हो गया जिसे नहीं छेड़ना चाहिए था। हम समझ नहीं पाए कि हम क्या कर रहे हैं।”

‘गहरायी’ जब रिलीज़ हुई, तो लोगों की प्रतिक्रियाएं सिर्फ तारीफ़ों तक सीमित नहीं थीं। अरुणा बताती हैं, “हमें सैकड़ों फोन कॉल्स आए। लोग कहने लगे – खाना खराब हो गया, घर में अजीब हरकतें हो रही हैं, डर लगने लगा है… कुछ करो। कुछ लोग तो तांत्रिकों के नंबर भी मांगने लगे।” लेकिन अरुणा और उनकी टीम खुद तय नहीं कर पा रहे थे कि कौन असली तांत्रिक है और कौन धोखेबाज।

जब अजय देवगन की ‘शैतान’ जैसी फिल्में फिर से ब्लैक मैजिक की दुनिया को दिखा रही हैं, तो ‘गहरायी’ जैसी फिल्म को याद करना ज़रूरी हो जाता है क्योंकि ये फिल्म सिर्फ एक डरावनी कहानी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक असली, परेशान करने वाली सच्चाई छिपी थी।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...