नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। सुबह-सुबह घरों व मंदिरों से आरती और भजन की आवाज गूंजन लग जाती हैं। नवरात्रि के दौरान लोगों का ज्यादा समय पूजा-पाठ में ही गुजरता है। आपको बता दें कि नवरात्रि में पूजा नियमों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। जो लोग इन नियमों का पालन नहीं करते हैं उनकी पूजा सफल नहीं मानी जाती है। इस लेख में हम आपको दिशा संबंधी नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कम जानकारी होने के कारण लोग यह गलती अनजाने में कर जाते हैं।

पूजा किस दिशा में बैठकर करना चाहिए

पूजा करते वक्त लोग अक्सर अपने हिसाब से किसी भी दिशा में बैठ जाते हैं, जोकि गलत है। पूजा करते वक्त ध्यान रहे कि आपका मुख पूर्व दिशा की ओर ही हो। ऐसे करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

दीपक किस दिशा में रखें

दीपक रखने के भी दिशा नियम है। इसके लिए दक्षिण-पूर्व का स्थान सबसे अच्छा माना जाता है। दरअसल दक्षिण-पूर्व अग्नि कोण होता है और इसलिए नवरात्री पूजा में दीप को यहां रखने की सलाह दी जाती है।

नवरात्रि में मूर्ति स्थापना किस दिशा में करें

मूर्ति को कहीं भी रख देना सही नहीं है। मूर्ति के लिए भी एक दिशा निर्धारित है। नवरात्री में अगर आप मूर्ति स्थापित कर रही हैं, तो इसे उत्तर-पूर्व दिशा में ही करें, ताकि आपकी भक्ति पूरी सार्थक हो सके और आप देवी मां का पूरा आशीर्वाद पा सकें।

पूजा आसन किस दिशा में हो

देवी के चरणों पर नजर से मतलब साधक की स्थिति से है। साधक को उस जगह बैठना चाहिए, जहां से उनकी नजर सीधे देवी के चरणों पर पड़े। नवरात्री पूजा में आपको आसन इस जगह रखना होगा कि आपको देवी के पैर ही नजर आएं। ऐसा करने का सही मकसद ये हो सकता है कि आप मां के बराबर में न बैठें बल्कि उनसे कुछ नीचे ही बैठें। इस तरह से भक्त और देवी में बराबरी भी नहीं होगी।

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