navratri fasting

नवरात्रि के नौ दिन हर भक्त के लिए बेहद खास दिन होते हैं। इन दिनों लोग व्रत रखकर मां की आराधना व भक्ति करते हैं। वैसे व्रत रखने का अपना एक आध्यात्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यह सेहत के लिहाज से भी काफी अच्छा होता है। आमतौर पर, यह माना जाता है कि व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम एक दिन व्रत को रखना ही चाहिए। इससे बॉडी को डिटॉक्स होने का मौका मिलता है। इस तरह, अगर नवरात्रि के नौ दिनों में अगर व्रत रखा जाए तो इससे ना केवल बॉडी के टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं, बल्कि आपको वजन कम करने का मौकी भी मिलता है।

हालांकि, यह केवल तभी संभव है, जब व्रत को सही तरह से रखा जाए। अमूमन देखने में आता है कि ज्यादातर लोग नवरात्रि व्रत के दौरान अन्न को भले ही त्याग देते हैं, लेकिन बहुत अधिक ऑयली व हैवी फूड खाते हैं, जिससे उन्हें लाभ कम और हानि अधिक होती है। इतना ही नहीं, कुछ लोगों का वजन तो मात्र नौ दिनों में ही एक से तीन किलो तक बढ़ जाता है। यकीनन आप ऐसा कभी भी नहीं चाहेंगी। आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आपको नवरात्रि व्रत के दौरान नहीं दोहराना चाहिए-

नाश्ते में पैकेज्ड आइटम खाना

नवरात्रि आते ही मार्केट में व्रत के चिप्स से लेकर बिस्कुट, नमकीन, पापड़ आदि पैकेज्ड आइटम मिलने लग जाते हैं। इससे आपको एक नहीं, बल्कि कई नुकसान होते हैं। सबसे पहला तो यह आपके पॉकेट पर असर डालता दूसरा यह आपकी सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। वहीं, इनमें किस तरह के तेल व आइटम का इस्तेमाल किया जाता है, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसलिए यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। वहीं, पैकेज्ड आइटम में सेंधा नमक व ऑयल का अधिक इस्तेमाल किया जाता है, जो आपका वजन बढ़ा सकते हैं।

हेल्दी स्नैक्स में क्या बनाएं

अगर आपको नमकीन आदि खाना अच्छा लगता है, तो आप घर पर मखाने व अन्य ड्राई फ्रूट्स को भूनकर व मसाले मिलाकर व्रत के लिए एक अच्छा स्नैक्स तैयार कर सकती हैं।

बहुत अधिक ऑयली फूड खाना

नवरात्रि के दिनों में लोग कुट्टू का आटा आदि का इस्तेमाल करते हैं, जो वैसे भी काफी हैवी होता है। इसमें भी अधिकतर लोग कुट्टू के आटे की पकौड़ियां या फिर सब्जी के साथ पूरी खाना पसंद करते हैं, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। इसको पचाने में आपके शरीर को काफी मेहनत करनी पड़ती है, जिसके कारण आपको लंबे समय तक पेट फूलने या ब्लोटिंग समस्या हो जाती है। इतना ही नहीं, इन फूड्स को डीप फ्राई किया जाता है, जिससे आपका कैलोरी काउंट काफी अधिक बढ़ जाता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है।

ब्लोटिंग समस्या से कैसे बचें

अगर आप कुट्टू के आटे से कोई डिश बना रही हैं, तो उसे डीप फ्राई करने से बचें। मसलन, आप कुट्टू के आटे की पूरी बनाने की जगह पर उसका ढोसा बनाएं, क्योंकि उसमें तेल बहुत कम लगता है। इसी तरह, आलू को फ्राई करके चाट बनाने की जगह आप उसे उबालकर बना सकती हैं। साथ में अपनी डाइट में दही को अवश्य शामिल करें। यह प्रो-बायोटिक होती है, जो आपके पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करेगी।

सब्जियों का सेवन कम करना

यह भी एक आम गलती है, जो अक्सर नवरात्रि व्रत के दौरान लोग करते हैं। अक्सर लोग व्रत में सब्जियों में केवल आलू का सेवन करते हैं, जिसके कारण आपके शरीर को सभी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। आपको बता दें कि नवरात्रि व्रत में सादा नमक व अन्न खाने का परहेज होता है, सब्जियों का नहीं।

व्रत में कैलोरी कंट्रोल कैसे करें

फल व सब्जियों को अधिक से अधिक मात्रा में खाएं। आप फलों की चाट या वेजिटेबल सूप बना सकती हैं। इससे आप कैलोरी ज्यादा लेने से बच जाएंगी। साथ ही आपकी बॉडी अधिक एनर्जेटिक भी रहेगी।

मीठे का अधिक सेवन करना

अमूमन यह देखा जाता है कि नवरात्रि व्रत के दौरान लोगों को मीठा खाने की बहुत अधिक क्रेविंग होती है, इसलिए लोग व्रत के दिनो में हलवा, साबूदाना की खीर, मखाने की खीर व बर्फी आदि खाना पसंद करते हैं। इससे उनकी क्रेविंग तो भले ही शांत हो जाए, लेकिन कैलोरी काउंट बढ़ जाता है। साथ ही बॉडी में शुगर लेवल भी बढ़ता है, जिससे वेट बढ़ने लग जाता है।

मीठे खाने का मन करे तो क्यो करें

अगर आपको नवरात्रि व्रत में मीठा खाने का बार-बार मन करता है, तो जहां तक संभव हो आप चीनी से दूर रहें। आप नैचुरल आइटम्स से शुगर क्रेविंग को शांत करने का प्रयास करें। मसलन, अगर आपको मीठा खाने का मन हो रहा है, तो आप बस एक खजूर खा लें। आपकी क्रेविंग शांत हो जाएगी। इसी तरह, आप फलों व फलों के रस के जरिए शुगर क्रेविंग को दूर करें। इसके अलावा, चीनी के स्थान पर गुड़ का सेवन करें।

मिड मील्स

नवरात्रि व्रत में लोग बार-बार खाने से बचते हैं, इसलिए वह सुबह नाश्ता करते हैं और उसके बाद लंच टाइम में ही खाते हैं। वह अपनी दो मुख्य मील्स के बीच मिड मील्स को इग्नोर करते हैं। जिसके कारण उनका मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और फिर उनकी बॉडी को खाना पचाने में परेशानी होती है। साथ ही मेटाबॉलिज्म स्लो होने पर वजन कम करने में भी परेशानी होती है। साथ ही जब आप मिड मील्स को इग्नोर करती हैं, तो इससे आपको मुख्य मील के दौरान अधिक भूख लगती है, जिससे आप आवश्यकता से अधिक खाती हैं। हालांकि, आपको यह भी समझना चाहिए कि आपकी बॉडी एक मील के दौरान उतनी ही कैलोरी कंज्यूम करती हैं, जितनी उसे जरूरत है। अतिरिक्त कैलोरी आपकी बॉडी में फैट के रूप में स्टोर हो जाती है और कमर का घेरा बढ़ने लगता है।

मिड डे मील्स में क्या खाएं

मेन मील्स के बीच में मिड मील्स अवश्य लें। साथ ही इस बात पर भी ध्यान दें कि आप क्या खा रही हैं। मसलन, मिड मील्स में आप कोई एक फल, दही, लस्सी या खीरे का रायता आदि बनाकर ले सकती हैं।

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