अब बस वह समय आ गया है, जब मौसम में ठंडक शुरू हो चुकी है। इस ठंडेपन के साथ उत्तर और पश्चिमी भारत में लोग जहां नवरात्रि की तैयारी शुरू कर देते हैं, वहीं पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये दोनों त्योहार 9 दिन के लिए मनाए जाते हैं लेकिन इन दोनों के रीति रिवाज काफी अलग हैं। इस आर्टिकल में हम नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बीच के अंतर को जानने की कोशिश करेंगे। 

दुर्गा पूजा और नवरात्रि के बीच का अंतर

  • नवरात्रि को 9 दिन के लिए सेलिब्रेट किया जाता है और 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर दुर्गा पूजा को 10 दिनों के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। 
  • नवरात्रि में दुर्गा मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन रावण के ऊपर राम की विजय को सेलिब्रेट किया जाता है। दुर्गा पूजा में राक्षस महिषासुर के ऊपर दुर्गा मां की विजय को सेलिब्रेट किया जाता है। 
  • नवरात्रि में जहां भक्त 9 दिनों के लिए अंडे, मीट, प्याज और लहसुन जैसी चीजें नहीं खाते हैं। जबकि दुर्गा पूजा में बंगाली नॉन वेजीटेरियन डिशेज चाव से खाते हैं। बंगाली लोगों के लिए दुर्गा पूजा इंजॉय करने और परंपरागत बंगाली डिशेज को इंजॉय करने के लिए है। 
  • दुर्गा पूजा में पहले दिन को महालया कहा जाता है, जब दुर्गा मां और महिषासुर के बीच में संग्राम शुरू हुआ था।  वहीं दूसरी ओर नवरात्रि की शुरुआत दुर्गा मां के पहले अवतार शैलपुत्री की पूजा करने के साथ होती है।
  • दुर्गा पूजा की समाप्ति सिंदूर खेला के साथ होती है, जब शादीशुदा महिलाएं एक-दूसरे पर सिंदूर लगाती हैं और इसके बाद ही देवी दुर्गा की मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।
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  • मूर्ति विसर्जन के बाद लोग एक- दूसरे को विजयादशमी की बधाइयां देते हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, नवरात्रि की समाप्ति दशहरा के साथ होती है, जिस दिन रामलीला का आयोजन किया जाता है और रावण के ऊपर भगवान राम के विजय को याद किया जाता है।  

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