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पुरंजन – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय में पुरंजन नामक एक अत्यंत यशस्वी और पराक्रमी राजा हुआ । उसका अविज्ञात नामक एक मित्र था । उसके कर्म बड़े ही रहस्यपूर्ण थे । फिर भी उन दोनों मित्रों में बड़ा प्रेमभाव था । एक दिन पुरंजन ने हिमालय के दक्षिण क्षेत्र में नौ द्वारों वाला एक भव्य नगर […]

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राजा अवीक्षित – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन काल में बलाश्व नामक एक प्रसिद्ध राजा हुए । एक बार शत्रु राजाओं ने मिलकर उनके नगर को घेर लिया । शत्रुओं के आक्रमण से बलाश्व बड़े क्रोधित हुए । तब वे हाथों को मुख के आगे रखकर जोर-जोर से साँस लेने लगे । फिर तो उनके मुख की वायु से […]

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पुरूरवा – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: चन्द्रमा के पुत्र बुध ने वैवस्वत मनु की पुत्री इला से विवाह किया, जिससे उन्हें पुरूरवा नामक एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ । पुरूरवा बड़े विद्वान और दानवीर थे । एक बार की बात है, स्वर्ग में देवराज इन्द्र की सभा लगी हुई थी । देवगण अपने-अपने असिन पर विराजमान थे । […]

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कश्यप को शाप – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है-महर्षि कश्यप एक विशाल यज्ञ का आयोजन कर रहे थे । इस यज्ञ को सम्पन्न कराने के लिए वे वरुण देव के पास गए और उनसे एक दिव्य गाय प्रदान करने की प्रार्थना की । मुनि का यज्ञ पूर्ण कराने के उद्देश्य से वरुणदेव ने कश्यप ऋषि को […]

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पृषध्र – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: वैवस्वत मनु ने पुत्र की कामना से भगवान् विष्णु को प्रसन्न करने का निश्चय किया और यमुना नदी के तट पर सौ वर्षों तक कठोर तपस्या की । उनकी तपस्या से भगवान् विष्णु साक्षात् प्रकट हुए और बोले – “वत्स ! तुम्हारी तपस्या से मैं अति प्रसन्न हूँ । माँगो तुम्हें क्या […]

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बलरामजी का विवाह – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: वैवस्वत मनु के पुत्र महाराजा शर्याति के वंश में रैवत नामक एक प्रसिद्ध राजा हुए । वे बड़े वीर, धर्मात्मा, दानी, दयालु, पराक्रमी और प्रजाप्रिय राजा थे । उनका एक नाम ककुद्मी भी था । पिता के ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण उन्हें कुशस्थली (द्वारिका) का राज्य मिला । वे धर्मपूर्वक राज्य-संचालन […]

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साधु वणिक – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन काल में चन्द्रचूड़ नामक एक बुद्धिमान, सत्यवक्ता और जितेन्द्रिय राजा था । धार्मिक कार्यों और दान-पुण्य में उसके समान अन्य कोई न था । वह नित्य मंदिर जाता और वहाँ अनेक निर्धनों को दान-दक्षिणा देकर उनके कष्टों का अंत करता था । राज्य में उसकी जय-जयकार होती थी । चन्द्रचूड़ की […]

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हयग्रीव अवतार – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: प्राचीन समय की बात है, भगवान् विष्णु को दस हजार वर्षों तक दैत्यों से निरंतर युद्ध करना पड़ा । युद्ध की समाप्ति पर वे अपने निवास वैकुण्ठ लोक में गए और पद्मासन लगाकर बैठ गए । उनके धनुष की डोरी चढ़ी हुई थी । लीलावश उन्हें गहरी नींद आ गई और अपने […]

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कंस वध – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha: द्वापर युग की बात है-पापकर्म इतने बढ़ गए कि पृथ्वी उनके बोझ तले दबकर छटपटाने लगी । उसे असीम कष्ट हो रहा था । भयभीत होकर वह गाय के रूप में आंसू बहाती हुई ब्रह्माजी और देवगण के साथ वैकुण्ठ लोक पहुँची और श्रद्धापूर्वक भगवान् विष्णु की स्तुति की । उनकी स्तुति […]

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परीक्षित को शाप – पुराणों की कथाएं

Bhagwan Vishnu Katha:एक बार की बात है-अभिमन्यू के पुत्र राजा परीक्षित शिकार खेलने वन में गए । वहाँ मृगों का पीछा करते हुए वे थक गए । उन्हें प्यास लगने लगी । वे जलाशय ढूँढने लगे, किंतु जब उन्हें कहीं भी जल नहीं मिला, तब वे निकट के एक आश्रम में चले गए । वह […]

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