गृहलक्ष्मी की कहानियां: वो आज अनुभा के पास लौट रहा था। उसे यकीन था कि अनुभा आज भी उससे प्यार करती होगी क्योंकि वो भी तो उससे अभी भी प्यार करता था । और सोच रहा था, “अनुभा ने शादी नहीं की, जिसका मतलब है कि वो उसका आज भी इंतज़ार कर रही है। उससे प्यार करती है।”अनुभा कॉलेज में दो साल पहले उसकी सहपाठी, प्रेयसी और मंगेतर भी थी। लेकिन दो साल पहले वो अनुभा से संबंध तोड़ चुका था, जब वो एक सड़क हादसे में अपाहिज हो गई थी और खूबसूरती खो चुकी थी ।
अनुभा ने दरवाजा खोला तो वो बोला,“चौंक गई ना मुझे देखकर !” “ मुझे मालूम था तुम आज भी मेरा इंतज़ार कर रही हो। मुझसे प्यार करती हो।”
अनुभा मुस्कराई और बोली ,“ हां!मैं प्यार करती थी और ऐतबार भी करती थी। आज से दो साल पहले मुझे भी यही लगता था कि किसी रिश्ते के लिए प्यार और ऐतबार ही काफी होता है ।”
“ लेकिन ऐसा नहीं है ,ऐतबार होता है कि दूसरा रिश्ता निभाएगा।”
वह अनुभा के मुँह को ताक रहा था, निरुत्तर सा। अनुभा सच ही तो बोल रही थी और सुनने के सिवा उसके पास कोई चारा नहीं था।
“ हर रिश्ता अपने साथ एक जिम्मेदारी लेकर आता है। ज़िम्मेदारी माने सुख के साथ साथ दुःख में भी साथ साथ रहना।”
“ एक साथी दूसरे साथी का कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी खयाल रखता है। उसको हौसला देता है।”
“ तुमने मुझे उस वक्त छोड़ दिया मुझे जब तुम्हारे साथ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी ।”
“मैं चलने फिरने से लाचार हो गई थी,चोटों के निशान ने मेरे चेहरे की खूबसूरती छीन ली।”
“और जिस खूबसूरत चेहरे पे तुम गज़लें लिखते थे तुम्हें वो देखना भी गंवारा नहीं था।”
आज मैं जब फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो गई हूं, ‘चेहरे के दाग धुंधला गए हैं तो तुम्हारा प्यार फिर से जाग गया! “
“ प्यार है तो प्यार रहेगा , लेकिन प्यार के रिश्ते निभाने पड़ते हैं । जिम्मेदारी से उन्हें मजबूत किया जाता है।”
अनुभा मुस्कुरा कर बोलती जा रही थी और वह सिर झुकाकर अपराधबोध से चुपचाप खड़ा था ।
“तुम्हारा प्यार तो ताश के पत्तों के महल जैसा था, एक पत्ता हिला और सारा महल ढह गया।
किसी भी रिश्ते की नींव जिम्मेदारी से ही मजबूत होती है। अब तुम लौट जाओ”
“ हां! अगर जिंदगी में दोबारा किसी और से प्यार का रिश्ता बनाना हो तो उसे जिम्मेदारी से निभाकर मजबूत ज़रूर करना।”
“ मैं एक दोस्त के नाते बस मशवरा दे सकती हूँ लेकिन साथी नहीं बन सकती।”
दरवाजा खुल चुका था। वह चुपचाप सिर झुकाकर दरवाजे की ओर बढ़ने लगा।
रिश्ते बनाने आसान है लेकिन निभाने एक जिम्मेदारी है। जीवन का एक बड़ा और खरा सच वो भी जान और समझ चुका था।
