अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आकांक्षा बलिगा ने साझा किए अपने विचार
आकांक्षा बलिगा प्लम गुडनेस में डी2सी बिजनेस का नेतृत्व करती हैं।
International Women’s Day Special: डिजिटल की इस दुनिया में अपना मुकाम हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत, लगन और जज्बे के साथ आकांक्षा बलिगा सभी महिलाओं के लिए आज प्रेरणा बन गई है। आकांक्षा प्लम गुडनेस में डी2सी बिजनेस का नेतृत्व करती हैं। डिजिटल और मार्केटिंग के क्षेत्र में 10 सालों का अनुभव रखने वाली आकांक्षा यहां ग्रोथ, रिटेंशन, एक्विजिशन से लेकर कस्टमर एक्सपीरियेंस के सभी पहलुओं पर काम करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आकांक्षा बलिगा ने गृहलक्ष्मी के साथ अपने इस दिलचस्प सफर को साझा किया है और अन्य महिलाओं को अपने सपने साकार करने के लिए प्रेरित किया है।
मैटरनिटी लीव के बाद लौटने के बाद मिला प्रमोशन
आकांक्षा के लिए वह पल बेहद खास और गर्व से भरा था जब उन्हें प्रमोशन मिला था। यह इसलिए ज्यादा खास था क्योंकि वे मैटरनिटी लीव से लौटी थीं और उन्होंने प्रमोट किया गया था। इससे उनका आत्मविश्वास दोगुना हो गया। आकांक्षा ने बताया, ‘वेला प्रोफशनल्स में मैटरनिटी लीव के बाद लीडरशिप टीम में प्रमोट किया गया था और यह मेरे काम को पहचानने का एक प्रमाण था। ऑर्गनाइजेशन को मुझे पर भरोसा था। प्रमोशन के साथ वर्कफोर्स में वापसी करने का एहसास यह अद्वितीय था और इसने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया। मुझे यह एहसास करने में मदद मिली कि महिलाओं को यह सब मिल सकता है।
मदद मांगने से हिचकिचाए नहीं
अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में तालमेल बैठाने का लेकर आकांक्षा का कहना है कि परिवार इसमें मदद कर सकते हैं लेकिन अगर परिवार आपके शहर में नहीं हैं, तो आप अपने रिश्ते और परिवार वहीं बना सकते हैं। ये आपके दोस्त, कलिग्स हो सकते हैं। या आप चाहें तो आप हाउस हेल्प के लिए भी हायर कर सकते हैं। मदद मांगने से कभी हिचकिचाए नहीं। अपने साथी के साथ काम का बोझ साझा करने में क्या दिक्कत है?
खुद के लिए समय निकालें
आपको अपने लिए भी समय निकालना चाहिए। मैं समझती हूं कि सभी महिलाएं ऐसा नहीं कर सकती हैं लेकिन अगर एक मां है और खुश रहना जानती हैं तो आपके बच्चे और परिवार भी खुश रहेंगे। कुछ महिलाएं खुद ही सब कुछ करने का विकल्प चुन सकती हैं और इसमें एक्सेल कर सकती हैं। वहीं कुछ महिलाएं काम को लेकर बैकसीट लेने और व्यक्तिगत जीवन में फोकस करने का विकल्प चुन सकते हैं, जो कि बिल्कुल ठीक भी है। एक व्यक्ति के लिए जो अनिवार्य रूप से सभी के लिए काम करें, यह ज़रूरी नहीं है।
सफलता और असफलता को समझें
जीवन में सफलताओं और असफलताओं के बारे में आकांक्षा का कहना है कि वे भी इससे अछूती नहीं रही हैं। वे कहती हैं, ‘अधिकांश महिलाओं की तरह मुझे भी जीवन में हीनभावना से जूझना पड़ा है। सफलता और निरंतर सफलता की कहानियों ने मुझे इससे छुटकारा दिलाने में मदद की। मुझे लगता है कि सफलता मेरे द्वारा किए गए प्रयास और कड़ी मेहनत के कारण है और इसलिए मैं इसकी हकदार हूं। यह भाग्य या किसी ग्रह की स्थिति के कारण नहीं हैं। असफलताओं से मैंने हमेशा सीख ली है और मां बनने के बाद मुझे असफलताओं का सामना करने के लिए और अधिक दृढ़ बना दिया है। असफल हो जाओ, तो फिर उठो और उसका फिर से सामना करो। यह एक चक्र है।
सकारात्मक रहने की रणनीतियां
खुद को सकारात्मक बनाए रखने के लिए मैं खुद से कहती रहती हूं कि यह एक फेज़ है और यह गुज़र जाएगा और उस परिस्थिति से निकलने के लिए मैं रास्ता तलाशने की कोशिश करती हूं। मैं खुद को यह भी कहती हूं कि अगर मैं यहां तक पहुंच गई हूं, तो मैं अपना रास्ता ढूंढने में सक्षम हो जाऊंगी। चुनौतीपूर्ण स्थिति से ज्यादा, यह इस बारे में हैं कि आप कैसे फिर से कैसे खड़े हो जाते हैं।
लीडरशिप रोल में महिलाएं
महिलाओं के लीडरशिप रोल को लेकर आकांक्षा के अपने विचार हैं। वे कहती हैं मुझे नहीं लगता है कि लीडरशिप रोल्स में महिलाएं ज्यादा आ रही हैं। जितनी आ रही हैं वह पर्याप्त नहीं है। जो महिलाएं इन भूमिकाओं की ओर बढ़ रही हैं, उनके पास एक सपोर्टिव फैमिली है या आपके पास कोई मेंटर है। मेरे मामले में मेरी मां और सास है, जो कि दोनों ही वर्किंग हैं। हालांकि आज ऑर्गनाइजेशन महिलाओं के लीडरशिप रोल को लेकर ज्यादा इन्क्लूसिव हैं।
अवसर खुद बनाने होंगे
आपको अपने अवसर खुद ही बनाने होंगे। आप अवसर के आने का इंतज़ार न करते रहें। सक्रिय होकर तलाशें, पूछे और मेंटर्स से सलाह लें। हर महिला की कहानी अलग है और हर किसी की कहानी से कुछ सीख सकती हैं।
मेरा मानना है कि आपको कम उम्र में खूब अनुभव लेने चाहिए। एक ही पद और विभाग में अटके नहीं रहना चाहिए। अलग-अलग स्किल्स सीखनी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण है ‘काम को पूरा करना’।
जीवन का मूल मंत्र
जिया और जीने दो
