Narendra Kumar Verma
Editorial Review by NK Verma

Editorial Review: नये वर्ष की शुरुआत पढ़ने, सोचने और स्वयं से जुड़ने के संकल्प के साथ करें। नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।
डिजिटल दौर ने बहुत कुछ आसान कर दिया है, पर सच कहें तो इसी सुविधा के साथ पढ़ने की आदत कहीं पीछे छूटती जा रही है। छोटे-छोटे संदेश, त्वरित जानकारियां और लगातार बदलती स्क्रीन, इनके बीच किताब के साथ बैठने का समय कम होता गया है। नया साल इस आदत को फिर से अपनाने का अच्छा अवसर है। इसी सोच के साथ एक सुखद सूचना भी साझा करना चाहेंगे कि 10 से 18 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला आयोजित हो रहा है। यदि संभव हो, तो वहां जरूर जाएं। किताबों की खुशबू, लेखकों से संवाद और विचारों की विविधता, यह अनुभव अपने
आप में ऊर्जा से भर देता है।

अब बात करें इस अंक की। जीवन के कुछ ऐसे विषय यहां शामिल हैं, जिनसे हम या हमारे आसपास के लोग किसी न किसी रूप में जुड़ते हैं। गर्भावस्था और उसके बाद का समय केवल शारीरिक बदलाव नहीं लाता, बल्कि सोच और जिम्मेदारियों को भी नया रूप देता है। डॉक्टर से बातचीत पर आधारित लेख इन पहलुओं को सहज ढंग से सामने रखते हैं। इसी क्रम में एंडोमेट्रियोसिस पर केंद्रित
सामग्री उस स्थिति को समझने में मदद करती है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

विटामिन डी पर चर्चा आज के समय की जरूरत को दर्शाती है, जहां धूप पास होते हुए भी शरीर उससे वंचित रह जाता है। लेख पढ़ते हुए यह बात खुद से जुड़ी लगती है। पर्वों की बात करें, तो मकर संक्रांति
और लोहड़ी मौसम के बदलाव के साथ मन में भी ताजगी भर देती हैं। वहीं गंगा स्नान से जुड़ा लेख आस्था, परंपरा और आत्ममंथन को एक साथ जोड़ता है। इन सभी विषयों को पढ़ते समय कहीं न कहीं अपना अनुभव, अपनी सोच और अपनी दिनचर्या याद आती है। यही कारण है कि इन्हें समय निकालकर देखना उपयोगी रहेगा।

धन्यवाद।

आपका…
नरेन्द्र कुमार वर्मा
nk@dpb.in