Osteoporosis: एक लड़की के शरीर में पीरियड्स शुरू होने से लेकर उनके ख़त्म होने तक यानी मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के दौरान बहुत से बदलाव होते हैं। यह बदलाव हर लड़की में अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन मेनोपॉज़ एक बड़ा पड़ाव है। जहां यह प्रजनन अवस्था के अंत का संकेत देता है, वहीं यह शरीर में कई बड़े बदलाव भी लाता है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला बदलाव है-हड्डियों की मजबूती में कमी। मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिसे ‘साइलेंट डिजीज’ भी कहा जाता है।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस?

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां इतनी कमजोर और छिद्रपूर्ण हो जाती हैं कि मामूली सी चोट, छींक या झुकने पर भी फ्रैक्चर होने का डर रहता है। यह मुख्य रूप से कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि फ्रैक्चर होने तक इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे खामोश बीमारी कहा जाता है।
मेनोपॉज़ और हड्डियों का संबंध
हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में ‘एस्ट्रोजन’ हार्मोन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यह हार्मोन हड्डियों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया (bone remodelling) को नियंत्रित करता है । मेनोपॉज़ के दौरान जब शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, तो हड्डियों के नष्ट होने की दर नई हड्डियों के बनने की दर से अधिक हो जाती है । इसी वजह से मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं की हड्डियां तेजी से अपना घनत्व (density) खोने लगती हैं।
स्थिति को समझना: प्रकार, जोखिम और लक्षण
ऑस्टियोपोरोसिस मुख्य रूप से दो रूपों में होता है:
प्राइमरी ऑस्टियोपोरोसिस: इसमें मेनोपॉज़ और उम्र से संबंधित (सेनील) ऑस्टियोपोरोसिस शामिल है।
सेकेंडरी ऑस्टियोपोरोसिस: यह अन्य चिकित्सीय स्थितियों या दवाओं के कारण होता है।
लक्षण और जोखिम:
- यह बीमारी अक्सर फ्रैक्चर होने तक कोई लक्षण नहीं दिखाती। हालांकि, कद का कम होना या झुकी हुई मुद्रा (काइफोसिस) उन्नत बोन लॉस के संकेत हो सकते हैं।
- प्रमुख जोखिम कारकों में मेनोपॉज़, बढ़ती उम्र, और परिवार का इतिहास शामिल है।
- एशियाई और कोकेशियान मूल की महिलाओं में इसका जोखिम अधिक होता है।
- अन्य कारकों में कम वजन, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, कैल्शियम और विटामिन-D की कमी, और गतिहीन जीवनशैली शामिल हैं।
- कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का लंबे समय तक उपयोग और हाइपरथायरायडिज्म जैसी बीमारियां भी जोखिम बढ़ाती हैं।
उच्च जोखिम वाले समूह

- मेनोपॉज़ के बाद वाली महिलाएं: एस्ट्रोजन में गिरावट के कारण ये सबसे अधिक जोखिम में होती हैं।
- प्रारंभिक मेनोपॉज़: जिन महिलाओं को समय से पहले मेनोपॉज़ हुआ हो या ओवरी निकाली गई हो।
- पारिवारिक इतिहास: विशेष रूप से यदि माँ को हिप फ्रैक्चर हुआ हो।
- दवाएं: जो महिलाएं लंबे समय तक स्टेरॉयड या मिर्गी की दवाएं लेती हैं।
प्रबंधन और उपचार: डॉक्टर की सलाह
हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सक्रिय प्रबंधन और स्व-देखभाल आवश्यक है:
कैल्शियम: प्रतिदिन 1000-1200 मिलीग्राम (डेयरी उत्पाद, पत्तेदार सब्जियां) लें।
विटामिन-D: प्रतिदिन 800-1000 IU (धूप, मछली या सप्लीमेंट के माध्यम से) लें।
व्यायाम: नियमित वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे टहलना, जॉगिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
जीवनशैली: धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन सीमित करें।
सुरक्षा: घर के खतरों को दूर कर गिरने से बचें।
निदान और चिकित्सा उपचार: डॉक्टर की सलाह और DEXA स्कैन (हड्डियों के घनत्व की जांच का गोल्ड स्टैंडर्ड) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपचार में ‘बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स’ (हड्डियों के टूटने को धीमा करने के लिए) पहली पंक्ति की चिकित्सा है। कुछ मामलों में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) या डेनोसुमैब और टेरीपैराटाइड जैसी दवाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
स्रोतः डॉ. प्रीति रस्तोगी, निदेशक, प्रसूति एवं स्त्री रोग, मेदांता, गुरुग्राम
