what are the Osteoporosis disease causes and prevention
what are the Osteoporosis disease causes and prevention

Overview: हड्डियों को खोखला कर देती है ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी

Osteoporosis Causes & Symptoms: वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे के मौके पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम ने इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के वैश्विक प्रयासों का समर्थन किया। ये एक ऐसी बीमारी है जिसे 'साइलेंट थीफ' कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के बढ़ती है, जिससे लाखों लोग फ्रैक्चर के शिकार हो जाते हैं। इस साल की थीम, 'नाज़ुक हड्डियों को न कहें' है। मैरिंगो अस्पताल का उद्देश्य स्वस्थ हड्डियों और बेहतर क्वालिटी लाइफ के लिए शुरुआती पहचान और सक्रिय उपायों के महत्व के बारे में लोगों को एजुकेट करना है।

Osteoporosis Causes & Symptoms (World Osteoporosis Day): वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे के मौके पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम ने इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के वैश्विक प्रयासों का समर्थन किया। ये एक ऐसी बीमारी है जिसे ‘साइलेंट थीफ’ कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के बढ़ती है, जिससे लाखों लोग फ्रैक्चर के शिकार हो जाते हैं। इस साल की थीम, ‘नाज़ुक हड्डियों को न कहें’ है। मैरिंगो अस्पताल का उद्देश्य स्वस्थ हड्डियों और बेहतर क्वालिटी लाइफ के लिए शुरुआती पहचान और सक्रिय उपायों के महत्व के बारे में लोगों को एजुकेट करना है।

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वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे कब है?

When is World Osteoporosis Day?

वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे हर साल 20 अक्टूबर को मनाया जाता है, और इसका मकसद ऑस्टियोपोरोसिस पर ध्यान केंद्रित करने और सभी उम्र के लोगों को अपनी हड्डियों को महत्व देने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम में हड्डी विभाग का नेतृत्व डॉक्टर हेमंत शर्मा करते हैं जो हड्डी विभाग, जॉइंट रिप्लेसमेंट व स्पाइन सर्जरी के चेयरमैन हैं, जबकि डॉक्टर राजेश वर्मा ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट व स्पाइन सर्जरी विभाग के डायरेक्टर हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के आकंड़े

ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसा समस्या जिससे दुनिया भर में करीब 200 मिलियन लोग प्रभावित हैं। मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को इसका ज्यादा रिस्क होता है। हालांकि, पुरुष भी इसकी चपेट में आने से बचते नहीं हैं, इसलिए सभी लोगों को कमजोर हड्डियों से जुड़े रिस्क के बारे में समझना जरूरी है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रैक्चर से व्यक्ति की आजादी छिन जाती है, दिव्यांगता और मृत्यु दर में वृद्धि हो सकती है, ऐसे में इस बीमारी से रोकथाम और इसका शुरुआती स्टेज पर मैनेजमेंट जरूरी हो जाता है।

कितना कैल्शियम है जरूरी

Calcium
How much calcium is necessary?

वैसे तो ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या एडल्ट लोगों में होती है, लेकिन इसका आधार अक्सर बचपन में होता है। यही कारण है कि डॉक्टर लोगों से बच्चों और नवजातों को सही मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी देने की बात कहते हैं। बच्चे की ग्रोथ के दौरान कैल्शियम का अवशोषण सबसे अधिक होता है, जो लगभग 75% तक होता है, जबकि बड़े होने पर हम कुल कैल्शियम सेवन का केवल 20 से 40% ही अवशोषित कर पाते हैं।

ऐसे में शरीर में विटामिन डी की कमी से ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज के इलाज में न केवल कैल्शियम सप्लीमेंटेशन बल्कि विटामिन डी सप्लीमेंटेशन भी होना चाहिए। बोन मास की मात्रा लगभग 60% होती है इसलिए अगर मां को ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर होता है, तो बेटी को भी ऑस्टियोपोरोसिस होने का रिस्क रहता है।

एक्सपर्ट की राय

ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट व स्पाइन सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉक्टर हेमंत शर्मा ने बताया, ”हड्डियों की हेल्थ को प्राथमिकता देना सभी डॉक्टरों और अस्पतालों की जिम्मेदारी है। हर साल दुनिया भर में 37 मिलियन से ज्यादा फ्रैक्चर के साथ, ऑस्टियोपोरोसिस दुनियाभर में लोगों की सेहत पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ भी डालता है। कई अस्पतालों ने पोस्ट-फ्रैक्चर केयर सेवाओं सहित कई तरीकों से हड्डियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है। ऐसे अस्पतालों में 50 से ज्यादा आयु के लोगों की हड्डी टूट जाने पर उसका विशेषज्ञ द्वारा मूल्यांकन किया जाता है और ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज किया जाता है ताकि बार-बार होने वाले और संभावित रूप से जानलेवा फ्रैक्चर को रोका जा सके।

कैसे करें ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम?

World Osteoporosis Day
How to prevent osteoporosis?

आमतौर पर ऑस्टियोपोरोसिस का पता पहले फ्रैक्चर के बाद चलता है, लेकिन तब तक हड्डियों का काफी नुकसान हो चुका होता है। ऐसे में जरूरी है कि लगातार बोन डेंसिटी टेस्टिंग कराई जाए, खासकर 50 से ज्यादा उम्र के लोग ऐसा जरूर करें। किसी भी समस्या से बचने के लिए रोकथाम बेहद महत्वपूर्ण होता है, लाइफस्टाइल में कुछ सामान्य बदलाव, प्रॉपर न्यूट्रिशन, रेगुलर एक्सरसाइज और अर्ली मेडिकल इंटरवेंशन फ्रैक्चर के रिस्क को काफी कम कर सकते हैं।”

ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान कैसे करें?

ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट व स्पाइन सर्जरी विभाग में डायरेक्टर डॉक्टर राजेश वर्मा ने बताया, ”हड्डियों की सेहत बहुत ही अनमोल है। स्वस्थ हड्डियां हमारी सेहत, गतिशीलता और स्वतंत्रता का मूल आधार हैं। सभी उम्र के लोगों को हड्डियों के लिए स्वस्थ पोषण, नियमित वजन उठाने वाली शारीरिक एक्टिविटी और स्मोकिंग जैसी गलत आदतों से बचकर ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम करनी चाहिए। ऑस्टियोपोरोसिस एक गंभीर खतरा है जिसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं।

ऐसे में हर व्यक्ति को अपने रिस्क को समझना चाहिए, हड्डियों की हेल्थ को हार्ट की तरह ही प्राथमिकता देनी चाहिए, रिस्क फैक्टर्स की पहचान होने पर ऑस्टियोपोरोसिस स्क्रीनिंग या टेस्ट कराना चाहिए और तय दवाओं का सेवन करना चाहिए। इन रणनीतियों के जरिए हम ऑस्टियोपोरोसिस केयर को बेहतर बना सकते हैं, और उम्र बढ़ने के साथ अपनी गतिशीलता व स्वतंत्रता की रक्षा कर सकते हैं।”

किसे होता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा?

protein deficiency
Who is at risk of osteoporosis?

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम में वाइस प्रेसिडेंट व फैसिलिटी डायरेक्टर डॉक्टर सौरभ लाल ने कहा, ”जो लोग स्वस्थ लाइफस्टाइल का पालन नहीं करते उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस होने का रिस्क रहता है। यानी जो लोग पर्याप्त पोषण नहीं लेते, फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, शराब का ज्यादा सेवन करते हैं, कैफीन और स्मोकिंग करते हैं उन्हें खतरा ज्यादा है। हालांकि, कभी-कभी ऑस्टियोपोरोसिस का विकास सिर्फ जेनेटिक या लाइफस्टाइल का मामला नहीं होता है। हमारे पास ऐसे मरीज़ हैं जिन्हें किसी अन्य गंभीर बीमारी या दवा के इस्तेमाल के परिणामस्वरूप ऑस्टियोपोरोसिस हुआ है। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित लोगों के लिए समय पर एडवांस इलाज मुहैया कराता है।”

ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज

ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए शुरुआती उपायों में रेगुलर चेकअप शामिल है। खासकर 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग या जिनके परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस की हिस्ट्री रही है, उन्हें मजबूत हड्डियों के आवश्यक उचित पोषण को बनाए रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाना जरूरी है। वजन उठाने वाली और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए, इससे हड्डियों के नुकसान को धीमा करने में मदद मिल सकती है। अपने रूटीन में ऐसे काम न करें जो हड्डियों के स्वास्थ्य पर गलत असर डालते हैं। जिन लोगों में ज्यादा रिस्क होता है उनके लिए हड्डियों को मजबूत करने और फ्रैक्चर को रोकने के लिए दवाओं से भी लाभ हो सकता है।

क्या कहती है रिसर्च

वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे सर्वे से फ्रैक्चर के बाद की खराब देखभाल और हड्डियों के स्वास्थ्य की उपेक्षा का पता चलता है। इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन (IOF) के सर्वेक्षण से पता चला है कि टूटी हुई हड्डियां लगभग हर दो में से एक महिला को प्रभावित करती हैं। यह सर्वे पांच देशों की 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र की 7000 से ज्यादा महिलाओं पर किया गया। यह अनुमान लगाया गया है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र की 3 में से 1 महिला और 5 में से 1 पुरुष को अपनी लाइफ में ऑस्टियोपोरोसिस से संबंधित फ्रैक्चर होते हैं। ग्लोबल लेवल पर, ऑस्टियोपोरोसिस के कारण सालाना 8.9 मिलियन फ्रैक्चर होते हैं, यानी हर तीन सेकंड में एक फ्रैक्चर होता है।

कूल्हे के फ्रैक्चर के बाद एक साल के अंदर 20% मरीजों की मौत हो जाती है, जबकि 30% स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाते हैं। भारत में ऑस्टियोपोरोसिस एक आम समस्या है, अनुमान है कि इससे प्रभावित लोगों की संख्या 61 मिलियन है, 50 वर्ष से ज्यादा उम्र की 20% महिलाओं में ये समस्या है। यह बीमारी पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में पहले होती है, और यहां स्क्रीनिंग और इलाज के बारे में जानकारी का अभाव है।

मेरा नाम निक्की कुमारी है। मैं पिछले 2 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मैंने अब तक कई बड़े मीडिया हाउस के साथ फ्रीलांसर के तौर पर काम किया है। मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मुझे...