Bone Pain Treatment: हड्डी शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, ये जितनी ज्यादा मजबूत रहेंगी आप उतने ही ज्यादा स्वास्थ्य और फिट रहेंगे। हमारी हड्डियां रातों-रात कमजोर नहीं होती। यह प्रक्रिया सालों-साल चलती है। डॉक्टरों का मानना है कि 15-25 वर्ष तक की उम्र में हड्डियों का मास यानी द्रव्यमान पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है। ऐसे में बचपन और युवावस्था के समय का खान-पान, पोषण, जीवनशैली और व्यायाम आगे चल कर हड्डियों की सेहत को निर्धारित करने वाले कारक बनते हैं।
क्यों होता है हड्डियों में दर्द?
हमारी हड्डियां कैल्शियम, फास्फोरस, प्रोटीन के अलावा कई तरह के मिनरल से मिल कर बनी होती हैं। अनियमित जीवनशैली की वजह से ये मिनरल खत्म होने लगते हैं, जिससे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और धीरे-धीरे वे घिसने और कमजोर होने लगती हैं। कई बार यह कमजोरी इतनी होती है कि मामूली चोट पर भी फ्रैक्चर हो जाता है।
हड्डियों के दर्द का कारण, हड्डियों का दर्द चोट या दूसरी परिस्थितियों के कारण होता है, जैसे-
- आधुनिक जीवनशैली और कंप्यूटर पर लगातार निर्भरता के कारण युवाओं में हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
- सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य मीठे पेयों के सेवन के चलते बच्चों और किशोरों में कैल्शियम की कमी होने लगती है। नतीजन हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
- हड्डियों को रक्त की आपूर्ति में अवरोध
- हड्डियों में संक्रमण
- ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर)
- हड्डियों में खनिज की कमी
- अधिक श्रम
- जिन बच्चों ने अभी चलना सीखा हो, उनकी हड्डियां टूटना
कौन से टेस्ट हैं जरूरी?
डॉक्टरों के अनुसार 30 साल की उम्र के बाद हर पांच वर्ष में एक बार विटामिन डी, कैल्शियम फास्फोटेस, व एल्कलाइन फास्फोटेस का टेस्ट कराना चाहिए।
आहार से करें उपचार

आमतौर पर लोग हड्डियों को मजबूत रखने के लिए विटामिन सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, जबकि हम रोज के आहार से ही अपनी हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं। हड्डियों को मजबूत और सेहतमंद बनाए रखने के लिए खास पोषण की जरूरत होती है। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन डी जरूरी हैं, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन मैग्नीशियम, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी और ‘के’ भी हड्डियों के लिए जरूरी हैं। हड्डियों को मजबूत रखने का सबसे अच्छा उपाय रोज दूध पीना है। मगर यदि आपको दूध पीना पसंद नहीं है, तो इन चीजों के सेवन से भी हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है।
दूध– दूध हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कैल्शियम का समृद्ध स्रोत है। कुछ दूध उत्पादकों द्वारा दूध में विटामिन डी मिलाया जाता है जो कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ावा देता है। एक वयस्क शरीर को कम से कम 1000 मि.ग्रा. कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसके लिए रोज 600 मि.ली. दूध या दूध से बने उत्पादों का सेवन करना चाहिए।
सादा दही-दूध की तरह दही भी कैल्शियम से भरपूर है और कुछ उत्पादक इसमें विटामिन डी मिलाते हैं जो कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक होता है। दही प्रोटीन का एक स्रोत है जो शरीर में ऊतकों का निर्माण और मरम्मत में मदद करता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां– पालक और गोभी की तरह हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन सी और सेलेनियम खनिज होता है। सेलेनियम में एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं जो हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य का समर्थन करने के लिए मदद करता है।
अंजीर– अंजीर में वे मिनरल्स और विटामिंस होते हैं, जो हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी हैं। एक कप अंजीर में करीब 180 मिलीग्राम कैल्शियम के अतिरिक्त विटामिन सी और ‘केÓ भी होता है। ताजा अंजीर में कैलोरी कम होती है और फाइबर ज्यादा। इसलिए दो अंजीर रोजाना खाएं।
पालक– इसमें कैल्शियम के अलावा विटामिन ए, सी और के होता है। आयरन भी खूब होता है। इसमें कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है।
संतरे का रस– संतरे में विटामिन सी भरपूर होता है, जो कोलेजन बनने के लिए जरूरी होता है और हड्डियों की सेहत बनाये रखने में योगदान देता है। संतरा विटामिन ए का भी अच्छा स्रोत होता है, जो हड्डियों के विकास और कोशिकाओं के बढ़ने में मदद करता है।
जैतून का तेल– हाल ही में हुए शोध में सामने आया है कि जैतून के तेल में बने भोजन के साथ एक फल का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं तथा जैतून के तेल के सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस में कमी आती है।
अन्य सलाह
- कैल्शियम मिश्रित अनाज में उच्च मात्रा में तंतु होते हैं और शक्कर कम होती है। एक कप पाश्चराइज्ड दूध हड्डीयों और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्त्वों के दैनिक मूल्य प्रदान करता है।
- प्रोटीन हड्डियों के लिए उपयुक्त कोलेजन फाइबर के उत्पादन में मदद करता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। मुर्गी, मछली, कम चरबी या चरबी मुक्त डेयरी खाद्य पदार्थ, सुखा मेवा खाएं।
- ऐसे फल और सब्जियां चुने जिनके रंग इन्द्रधनुष के रंगों के समान हो जैसे हरा, लाल, नारंगी, नीला और पीला। इसलिए संतरा, ककड़ी, गाजर, स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी खाएं। फल और सब्जियां और उनमें शामिल खनिज नीचे दिए गए हैं।
मैग्नीशियम– पालक, भिंडी, टमाटर, आलू, बीट, रतालू और किशमिश
पोटैशियम– किशमिश, आलू, टमाटर, पालक, रतालू, पपीता, संतरा और केला
विटामिन सी– अनानास, अंगूर, स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली, पपीता और संतरा
विटामिन क-पालक

- नमक कम मात्रा में खाएं। ज्यादा नमक हड्डियों को भंगुर कर सकता है।
- शराब, चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का कम मात्रा में सेवन करें।
- अपना वजन काबू में रखें। तेज गति में वजन घटाने के पीछे न लगें जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
अन्य सुझाव
सही खान-पान से तो हड्डिïयां मजबूत बनती ही हैं पर और भी कई सरल उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने को तंदरुस्त और हड्डिïयों को मजबूत रख सकते हैं क्या है वो उपाय आइए जानते हैं।
बचपन से ही लें कैल्शियम

आजकल देखा गया है कि स्कूल जाने वाले और पढ़ाई करने वाले बच्चे बिल्कुल भी दूध पीना पसंद नहीं करते, जिस वजह से उनकी हड्डियां भविष्य में जल्दी खराब हो सकती हैं साथ ही बिगड़ती जीवनशैली, जंक फूड, बढ़ता वजन, घटती आउट डोर एक्टिविटी का असर बच्चों में भी देखने को मिलता है। बच्चों में हड्डी की कमजोरी को रिकेट्स कहते हैं, जबकि बड़ों में इसे ऑस्टियोमैलेशिया व ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। बच्चों में रिकेट्स विटामिन डी, कैल्शियम की कमी तथा पूर्ण रूप से सूर्य की किरणें न मिल पाने के कारण होता है। इसके अलावा आंतों द्वारा भोजन का अपर्याप्त अवशोषण, फास्फोरस की कमी तथा गुर्दो व जिगर के रोग भी रिकेट्स का कारण हो सकते हैं। प्राय: छह माह से दो वर्ष की उम्र में यह रोग अधिक होता है। इससे बच्चों की लम्बाई भी कम हो जाती है।
क्या करें..
- अगर माता-पिता में से किसी को ऑस्टियोपोरोसिस है तो वे अपने बच्चों के पर्याप्त खान-पान और स्वस्थ दिनचर्या पर शुरुआत से ध्यान दें।
- बच्चों को उचित मात्रा में कैल्शियम एवं प्रोटीनयुक्त आहार दें। बढ़ती उम्र में बच्चों को कम से कम 1300 मि.ग्रा. कैल्शियम अवश्य दें।
- बच्चों को घर से बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें।
बिना सलाह न करें व्यायाम
व्यायाम घर में करें या जिम में, अच्छे जानकार की सलाह से ही करें। व्यायाम करना ही काफी नहीं है, सही तरीके से करना अधिक जरूरी है। शारीरिक क्षमताओं को ध्यान में रख कर व्यायाम करें। व्यायाम के साथ सही खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी है।
कूदना है फायदेमंद
मजबूत हड्डियां पाने के लिए लोग पोषक तत्त्व और दवाओं की मदद लेते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ कूदने मात्र से ही आपकी हड्डियां मजबूत हो सकती हैं। हाल में हुए शोध की मानें तो दिन में दो बार, दस बार कूदने को अगर कसरत के तौर पर नियमित किया जाए तो इससे हड्डियां काफी मजबूत होंगी। यह कसरत चलने या जॉगिंग करने की अपेक्षा अधिक फायदेमंद है और इससे हड्डियों के घनत्व में 1.3 प्रतिशत सुधार देखा गया है।
ड्राइविंग के दौरान
- सीट पर बैठते समय घुटने हिप्स के बराबर या थोड़े ऊंचे हों। सीट को स्टेयरिंग के पास रखें, ताकि कमर के लचीलेपन को सपोर्ट मिल सके।
- कमर के निचले हिस्से में सपोर्ट के लिए छोटा तौलिया या लंबर रोल रखें। इतना लेग-बूट स्पेस जरूर हो, जिसमें आराम से घुटने मुड़ सकें और पैर पैडल पर आराम से पहुंच सकें।
कंप्यूटर- लैपटॉप पर काम करते हुए
आधुनिक जीवनशैली और कंप्यूटर पर लगातार निर्भरता के कारण युवाओं में हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए स्क्रीन पर देखने के लिए झुकना न पड़े और न ही गर्दन को जबरन ऊपर उठाना पड़े, कुहनी और हाथ कुर्सी पर रखें, इससे कंधे रिलैक्स्ड रहेंगे।
- कुर्सी लोअर बैक को सपोर्ट करने वाली हो। पैरों के नीचे सपोर्ट के लिए छोटा स्टूल या चौकी रखें। किसी भी मुद्रा में 30 मिनट से ज्यादा लगातार न बैठें। दो घंटे के बाद सीट से अवश्य उठें।
- कुर्सी के पीछे तक बैठें। शरीर का भार दोनों कूल्हों पर बना कर रखें। रोजाना गर्दन की एक्सरसाइज करें।
सिगरेट से करें परहेज

अब तक यही माना जाता था कि सिगरेट पीने से फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है लेकिन हाल ही में हुई रिसर्च में सामने आया है कि धूम्रपान करने वालों में हड्डियां कमजोर होने का खतरा रहता है।
अमेरिकन केमिकल सोसाइटी ने दावा किया है कि सिगरेट पीने वालों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सिगरेट में मौजूद जहरीला तत्त्व हड्डियों को कमजोर नहीं बनाता बल्कि उससे शरीर में बनने वाले दो प्रोटीन इसके लिए जिम्मेदार होते हैं जो अस्थि को कमजोर करने वाली कोशिका ‘ऑस्टियोक्लास्ट’ के निर्माण की गति को काफी तेज कर देते हैं।
