early puberty problems
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आमतौर पर डाइट कोक जैसे पेय पदार्थों, लाइट योगर्ट और च्युइंग गम को चीनी के विकल्पों के रूप में देखा जाता है। माता-पिता भी सोचते हैं कि ये सभी चीजें हेल्दी हैं, क्योंकि इनमें कम कैलोरी और जीरो शुगर होती है। लेकिन असल में ये आपके बच्चों के लिए बड़ा खतरा हैं।

Early Puberty Problems: फिट रहने के लिए डाइट कोक पीना, फेस पतला करने के लिए च्यूइंग गम चबाना, हेल्थ के​ लिए फ्लेवर्ड योगर्ट खाना आजकल के बच्चों की आदत है। माता-पिता भी सोचते हैं कि ये सभी चीजें हेल्दी हैं, क्योंकि इनमें कम कैलोरी और जीरो शुगर होती है। लेकिन असल में ये आपके बच्चों के लिए बड़ा खतरा हैं। ये सभी उन्हें समय से पहला बड़ा कर रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध ने पेरेंट्स को सावधान किया है।

कई जानलेवा रोगों का कारण

डाइट कोक जैसे पेय पदार्थों को चीनी के विकल्पों के रूप में देखा जाता है।
Beverages such as Diet Coke are seen as sugar alternatives.

आमतौर पर डाइट कोक जैसे पेय पदार्थों, लाइट योगर्ट और च्युइंग गम को चीनी के विकल्पों के रूप में देखा जाता है। लेकिन ताइवान के विशेषज्ञों के अनुसार मिठास के लिए इनमें काम लिए जाने वाले एस्पार्टेम जैसे विकल्प खतरनाक हैं। ये बच्चों में न सिर्फ समय से पहले हार्मोनल बदलाव कर रहे हैं, बल्कि लंबे समय तक इनके उपयोग से कैंसर और हृदय संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं।

कच्ची उम्र में प्यूबर्टी का कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर से भरपूर खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से बच्चों ने प्यूबर्टी ट्रिगर हो सकती है। आमतौर पर बच्चियों में यह आठ साल से पहले आने लगी है। वहीं बच्चों में नौ साल की उम्र से पहले ही प्यूबर्टी आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा शर्करा का सेवन बच्चों के लिए खतरनाक है।

1400 किशोरों पर अध्ययन

इस अध्ययन में 1400 से ज्यादा ताइवानी किशोरों को शामिल किया गया।
This study included more than 1,400 Taiwanese adolescents.

सैन फ्रांसिस्को में एंडोक्राइन सोसाइटी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत यह अध्ययन हर पेरेेंट के लिए जरूरी है। ताइपे मेडिकल यूनिवर्सिटी में पोषण एवं स्वास्थ्य विज्ञान के विशेषज्ञ और अध्ययन के सह-लेखक डॉ. यांग-चिंग चेन का कहना है कि यह अध्ययन आधुनिक आहार संबंधी आदतों, खासतौर पर स्वीटनर के सेवन की ओर ध्यान खींचता है। इस अध्ययन में 1400 से ज्यादा ताइवानी किशोरों को शामिल किया गया। जिनमें से 481 में समय से पहले प्यूबर्टी दिखी। इस दौरान किशोरों में आर्टिफिशियल स्वीटनर सुक्रालोज और प्यूबर्टी के बीच गहरा कनेक्शन मिला। किशोरियों में प्यूबर्टी हिट होेने का कारण रेगुलर चीनी के साथ ही ग्लाइसीराइजिन और एस्पार्टेम को पाया गया। कई मामलों में आनुवंशिक प्रभाव भी नजर आए।

ये अंतर समझना जरूरी

शोधकर्ता के अनुसार सुक्रालोज भी सामान्य सुक्रोज टेबल शुगर से ही बनता है। लेकिन इसे रासायनिक रूप ऐसे बदला जाता है कि इसमें कैलोरी नहीं होती। वहीं ग्लाइसीराइजिन मुलेठी की जड़ों से बनने वाला नेचुरल स्वीटनर है। विशेषज्ञों के शोध के अनुसार कुछ स्वीटनर प्यूबर्टी से संबंधित हार्मोन के स्राव को भी प्रभावित कर सकते हैं। ये केमिकल मस्तिष्क में कोशिकाओं के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं आंतों में बैक्टीरिया की संरचना में बदलाव होने की भी आशंका रहती है।

डब्ल्यूएचओ ने भी चेताया

साल 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने डाइट कोक जैसे पेय पदार्थों में पाए जाने वाले एस्पार्टेम को ‘कैंसरकारी’ बताया था। हालांकि उस समय संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा था कि यह केवल उन लोगों के लिए खतरा है, जो इसका सेवन करते हैं।

बच्चियों के लिए बड़ा खतरा

एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार जिन बच्चियों का मासिक धर्म 13 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाता है, उनमें टाइप 2 डायबिटीज और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। वहीं लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जिन लड़कियों का मासिक धर्म कम उम्र में शुरू हो जाता है, उनमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इससे मोटापे, हार्मोनल बदलाव जैसी समस्याएं होने की भी आशंका रहती है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...