Summary: बच्चों में आलोचना को सकारात्मक लेना सिखाएं, इससे होगा उनका फायदा
बच्चों को आलोचना को समझना और स्वीकारना सिखाकर उनके आत्मविश्वास और सुधार क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
Teach Kids Positive Criticism: कोई भी व्यक्ति हर काम को परफेक्ट नहीं कर सकता और ना ही सभी की नजरों में वह एक काम को परफेक्ट कर सकता है। किसी भी काम में कमी बताने का मतलब हमेशा गलती दिखाना नहीं होता, बल्कि उसका अर्थ उस सुधार की तरफ इशारा करना होता है जिससे वह ओर बेहतर किया जा सकता है। कोई भी बच्चा आलोचना को कैसे लेता है, यह समझना बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी है। बच्चा किस तरह अपने आलोचना को एक गलती के तौर पर देखने की बजाए, एक सुधार के अवसर के रूप में देख सकता है इसकी बात आज हम इस लेख में करेंगे।
आलोचना और नकारात्मकता में फर्क
आपका बच्चा अपनी आलोचना को सकारात्मक लें, इसके लिए जरूरी है कि वह आलोचना और नकारात्मकता में फर्क को समझे। ऊपरी तौर पर एक बच्चे को आलोचना और नकारात्मकता सामान लगा सकते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों में एक समझ पैदा करें, जिससे बच्चा दोनों में होने वाले फर्क को समझ सके।

माता-पिता अपने बच्चों को बता सकते हैं, आलोचना आपकी सुधार और विकास के लिए होता है। आलोचना करने वाला व्यक्ति सकारात्मक तरीके से न सिर्फ आपको आपकी गलतियां बताता है, बल्कि सुधार के लिए भी सुझाव भी देता है।
जबकि नकारात्मकता में व्यक्ति नकारात्मक शब्दों के साथ आपके पूरे कार्य को गलत कहता है। वह आपको किसी तरह की सुधार की संभावना भी नहीं दिखता है।
आप अपने बच्चों को उदाहरण देकर भी इस बात को समझ सकते हैं। जैसे,
अगर तुम्हारे स्कूल में तुम्हारे अध्यापक किसी लेख की जांच करने के बाद कहें, तुमने बहुत अच्छे से विषय को समझ कर लिखा है, लेकिन कुछ बिंदुओं पर तुम और बेहतर कर सकते हो। इस स्थिति में अध्यापक आपकी आलोचना कर रहा है। साथ ही आपको सुधार की संभावना के भी दे रहा है।
दूसरी तरफ आपका अध्यापक सीधे तौर पर आपसे कहे, यह क्या बकवास लेख है। तुम्हें विषय का कोई ज्ञान नहीं है, तुम नहीं कर सकते। यह सब वाक्य नकारात्मकता की तरफ इशारा करते हैं।
आलोचना आप पर हमला नहीं है
अपने बच्चों को इस बात की जानकारी दें आपके दोस्त, माता-पिता, अध्यापक या घर के बड़ों द्वारा की गई आलोचना आपके व्यक्तित्व पर हमला नहीं है। वह आपको नीचा नहीं दिखाना चाहते, बल्कि वह आपको और बेहतर करते हुए देखना चाहते हैं।
बच्चों को कहें, अगर तुम अपनी आलोचना को खुद की बुराई की तरह लेकर क्रोधित होते हो तो तुम खुद अपने विकास में बाधा का काम करते हो। अपनी आलोचना को अपनी सफलता की कुंजी की तरह देखो अपने आप में सुधार करने के एक कदम की तरह आलोचना को समझो।
माता-पिता की भूमिका
किसी भी बच्चे के विकास में माता-पिता का अहम रोल है। माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों की गलतियों को छुपा कर हर समय उन्हें परफेक्ट ना कहें, बल्कि संतुलित और सकारात्मक ढंग से उन्हें उनकी गलतियां बताएं। उन्हें ना सिर्फ उनकी गलतियों के बारे में बताएं, बल्कि किस तरह वह इसमें सुधार कर सकते हैं इसकी जानकारी भी उन्हें दें।
माता-पिता स्वयं भी अपनी आलोचना पर नकारात्मक प्रतिक्रिया देने की बजाय खुले दिल से स्वीकार करें। बच्चा माता-पिता को देखकर उनका अनुसरण करता है। अपनी आलोचना को स्वीकार कर, उसमें सुधार करके आप अपने बच्चों के लिए उदाहरण बनते हैं।
