Words today build confidence tomorrow.
Encouragement creates strong children.

Summary: शब्दों से डर नहीं, हौसला दें।

माता-पिता के शब्द बच्चे के आत्मविश्वास की नींव रखते हैं या उसे कमजोर कर सकते हैं। जानिए 6 जरूरी बातें, जिनका ध्यान रखकर आप अपने बच्चे को आत्मविश्वासी और मजबूत बना सकते हैं।

Child Confidence with Words: माता-पिता के बोले गए शब्द बच्चों के कानों तक ही नहीं जाते बल्कि वे सीधे उनके दिल और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। यही शब्द आगे चलकर उनकी सोच, आत्मविश्वास और खुद की पहचान बनाते हैं। बच्चे की खुद की छवि ही तय करती है कि वह दुनिया से कैसे जुड़ता है। कई बार अनजाने में कहे गए माता-पिता के कठोर शब्द बच्चे के मन पर गहरी छाप छोड़ देते हैं, या तो उसे मजबूत बनाते हैं या अंदर से तोड़ देते हैं। इसलिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि बच्चों से बात करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाए। माता-पिता के शब्द बच्चों के लिए आईने की तरह होते हैं, जिनमें वे खुद को देखते हैं। अगर आईना सकारात्मक होगा, तो बच्चा भी खुद को सकारात्मक रूप

में देखेगा। इसलिए अपने शब्दों को सोच-समझकर चुनें, क्योंकि यही शब्द आपके बच्चे का भविष्य तय करते हैं।

Your words shape a child’s confidence.
Speak wisely, children listen deeply.

दुसरे का बच्चा कितना अच्छा है , इस तरह के वाक्य बच्चे को हीन भावना की तरफ ले जाते हैं। तुलना बच्चे के मन में यह भावना भर देती है कि वह अपने आप में अधूरा है। इसके बजाय उसकी कोशिशों की सराहना करें। तुमने पूरी कोशिश की है, जैसे शब्द बच्चे को अपने प्रयासों पर भरोसा करना सिखाते हैं।

गलती पर डांटना या ताने मारना बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर करता है। बच्चे यह मानने लगते हैं कि गलती करना बुरा है, जबकि असल में गलती सीखने का ही एक हिस्सा है। सरल शब्दों में यह संदेश दें कि “गलती से हम सीखते हैं,ताकि बच्चा आगे बढ़ने से न डरे।

तुम बहुत आलसी हो या तुमसे कुछ नहीं होगा जैसे शब्द बच्चे की पहचान बन जाते हैं। बच्चा वही बनना शुरू कर देता है जो उसे कहा जाता है। व्यवहार पर बात करें, व्यक्तित्व पर नहीं। बच्चे को उसके व्यवहार के बारे में सकारात्मक बदलाव करने के लिए प्यार से समझाएं, जरुरत पड़े तो कोई अच्छा उदाहरण दें।

जब बच्चा रोता है या गुस्से में अपनी भावनाएँ ज़ाहिर करता है और हम तुरंत कह देते हैं, इसमें रोने जैसी क्या बात है, तो अनजाने में हम उसकी भावनाओं को छोटा साबित कर देते हैं। बच्चे को यह महसूस होने लगता है कि उसकी तकलीफ़ मायने नहीं रखती। धीरे-धीरे वह अपनी भावनाएँ दबाना सीख जाता है।

Choose words that empower, not break.
Confidence begins with kind words.

नकारात्मक शब्द बच्चे के कोमल मन पर गहरा असर डालते हैं। ऐसे शब्द धीरे-धीरे उसके अंदर डर, असुरक्षा और असफलता का भाव पैदा कर देते हैं, जिससे उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। बार-बार नकारात्मक भाषा सुनने से बच्चा खुद पर संदेह करने लगता है।

सिर्फ बोलना ही नहीं, बच्चे की बात ध्यान से सुनना भी उसका आत्मविश्वास बढ़ाता है। जब बच्चा महसूस करता है कि उसकी बातों को महत्व दिया जा रहा है, तो वह खुद को महत्वपूर्ण समझने लगता है। यह एहसास उसके आत्मसम्मान की मजबूत नींव बनता है।

माता-पिता की भाषा बच्चे की अंदरूनी आवाज़ बन जाती है। जिसे वह जीवन भर खुद से बात करने में इस्तेमाल करता है। उनके द्वारा की गई आलोचना बच्चे को खुद पर शक करना सिखाती है, जबकि सराहना उसे आगे बढ़ने की हिम्मत देती है। तुलना किए गए शब्द बच्चे में हीन भावना पैदा करते हैं, वहीं प्रोत्साहन उसे अपनी अलग पहचान स्वीकार करना सिखाता है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...