Child identity development 3-7 years parenting mistakes
Child identity development 3-7 years parenting mistakes

बच्चों की ग्रोथ के लिए बदलें अपनी पैरेंटिंग स्टाइल

बच्चों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और खुश बनाने के लिए पैरेंट्स को अपने व्यवहार में छोटे लेकिन असरदार बदलाव लाने की जरूरत है। इन 7 पॉजिटिव पैरेंटिंग टिप्स से बच्चे भावनात्मक रूप से मजबूत बनते हैं और जीवन की कहानी खुद लिखने का हौसला पाते हैं।

Small Parenting Changes: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सफल, आत्मविश्वासी और खुश रहे, लेकिन कई बार हमारा व्यवहार ही उनकी ग्रोथ को रोक देता है। आज के बच्चे ज्यादा समझदार, संवेदनशील और भावनात्मक रूप से जागरूक हैं, इसलिए उन्हें पुराने सख्ती वाले तरीकों से नहीं, बल्कि सकारात्मक, बातचीत पर आधारित सपोर्टिव पैरेंटिंग की जरूरत होती है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अपनी पहचान खुद बनाए, खुले दिल से सोचे और अपनी जिंदगी की कहानी खुद लिखे, तो ऐसा करने के लिए पहले आपको अपने व्यवहार में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाने होंगे।

छोटे-छोटे बदलाव भी बच्चों के आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और भावनात्मक मजबूती परकाफी सकारात्मक असर डालते हैं।

Listen more, judge less.
Connection first, correction next

बच्चे को हर वक्त नियंत्रित करने की कोशिश उनकी क्रिएटिविटी और निर्णय लेने की क्षमता को कम करते हैं। इसके बजाय उन्हें विकल्प दें, सुझाव दें और सही-गलत समझने में मदद करें। जब बच्चा खुद निर्णय लेता है, तो उसमें जिम्मेदारी और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।

नकारात्मक शब्द बच्चे को भावनाएं दबाने की आदत पर मजबूर करते हैं। इसके बजाय उन्हें हमेशा सकारात्मक शब्दों में समझाएं और उनकी भावनाओं की कद्र करें और ध्यान से उनकी परेशानियां सुनें। जब बच्चा सुना और समझा हुआ महसूस करता है, तो वह अंदर से मजबूत महसूस करता है।

तुलना बच्चों का आत्मविश्वास तोड़ने का सबसे आसान तरीका है। हर बच्चा अपनी पहचान, क्षमता और अपनी स्पीड के साथ आगे बढ़ता है। तुलना के बजाय अपना फोकस इस पर रखिए कि बच्चा कल से आज कितना बेहतर हुआ है। यही आत्मिश्वास बढ़ाने का का असली पैमाना है।

हम अक्सर बच्चों को रिजल्ट के लिए सराहते हैं जैसे अच्छे नंबर, ट्रॉफी, जीत। लेकिन अगर आप उसके प्रयास की तारीफ करेंगे तो बच्चा सीख जाएगा कि सीखना और मेहनत करना ज़्यादा मायने रखता है। यही सोच जीवन में लचीलापन और स्थिरता लाती है।

Parent with patience, not pressure.
Guide gently, love deeply

बच्चे को हर मुश्किल से बचाना उसे कमजोर बनाता है। उसे छोटे-छोटे अनुभव खुद महसूस करने दें,चुनौतियों का सामना, गलतियाँ करना, खुद सीखना ये सब बातें जब बच्चा अपने अनुभवों से सीखता है, तो वह वास्तविक दुनिया के लिए बेहतर तैयार होता है।

आज पैरेंट्स बच्चों को अच्छी स्कूलिंग, क्लासेज़, गैजेट्स सब देते हैं। लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्वालिटी टाइम और आपकी अटेंशन की। दिन में काम से काम 20 मिनट बिना फोन, बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के बच्चे के साथ बिताएंगे,तो वह भावनात्मक रूप से सुरक्षित और खुश महसूस करेगा।

कई बार हम बच्चों को पढ़ाने-समझाने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें सुनना ही भूल जाते हैं। बच्चे को बोलने दें, अपनी बात कहने दें, उन्हें बीच-बीच में न टोकें।जब आप उसकी बात सुनते हैं, तो वह सीखता है कि उसकी राय की भी काफी अहमियत  है। यही भावना उसे जीवन में आत्मविश्वासी बनाती है।

Celebrate effort, not perfection.
Teach by example, not commands

पैरेंटिंग नियंत्रण से नहीं, सहयोग और समझ से चलती है। यही कारण हैं अगर आप अपने व्यवहार में ये बदलाव लाएंगे, तो आपका बच्चा न सिर्फ मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि अपने जीवन की कहानी खुद लिखने का हौसला भी पाएगा। यही हैं असली सकारात्मक पेरेंटिंग का रूल, जहाँ बच्चा सिर्फ बड़ा नहीं होता, बल्कि विकसित और परिपक़्व  होता है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...