Overview: बच्चे की स्लो ग्रोथ से घबराएं नहीं क्लोव्स सिंड्रोम की जांच कराएं, जानें क्या है ये
क्लोव्स सिंड्रोम एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जो PIK3CA जीन उत्परिवर्तन के कारण होता है और वंशानुगत नहीं है।
Symptoms Of Cloves Syndrome: पेरेंट्स अपने बच्चे का उसके जन्म से ही बेहद ख्याल रखते हैं। वह चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ्य रहे और तरक्की करें। लेकिन कई बार शरीर ऐसी बीमारियों को जन्म दे देता है जिसका इलाज करना चुनौतिभरा हो जाता है। जरूरत से ज्यादा लंबे हाथ, त्वचा पर लाल निशान या रीढ़ की हड्डी में वक्रता, ये कोई सामान लक्षण नहीं है। ये एक जन्मजात समस्या है जिसे क्लोव्स सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। क्लोव्स सिंड्रोम एक दुर्लभ बीमारी है जो जन्म के समय ही उत्पन्न होती है। यही वजह है कि लोगों को इस समस्या से जागरुक करने के लिए हर साल 3 अगस्त को क्लोव्स सिंड्रोम अवेयरनेस डे मनाया जाता हैै। ये सिंड्रोम क्या है और इससे निपटने का क्या तरीका है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है क्लोव्स सिंड्रोम

क्लोव्स सिंड्रोम, जिसका पूरा नाम Congenital Lipomatous Overgrowth, Vascular Malformations, Epidermal Nevi and Spinal/Skeletal Anomalies and/or Scoliosis है। ये एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है। क्लोव्स सिंड्रोम एक दुर्लभ बीमारी है जो जन्म के समय ही उत्पन्न होती है। कई बार इसे अन्य सिंड्रोम जैसे Klippel-Trenaunay या Proteus सिंड्रोम समझ लिया जाता है, जिससे निदान में देरी हो सकती है। यह PIK3CA जीन में म्यूटेशन के कारण होता है, जो शरीर की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि को बढ़ावा देता है। यह उत्परिवर्तन वंशानुगत नहीं है, इसलिए यह माता-पिता से बच्चे में नहीं जाता।
क्लोव्स सिंड्रोम के कारण
क्लोव्स सिंड्रोम एक नॉन-हेरिड्रिटी डिसऑर्डर है जो PIK3CA नामक एक जीन के कारण उत्पन्न होता है। इस स्थिति में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ या घट सकती हैं। कुछ मामलों में पर्यावरणीय कारक भी इस सिंड्रोम के ट्रिगर का कारण बन सकते हैं।
क्लोव्स सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण
हाइपरप्लासिया ऑफ फैट: जन्म के समय पीठ, कमर, पेट या नितंबों पर नरम वसायुक्त गांठें दिखाई दे सकती हैं। इनके ऊपर की त्वचा पर लाल-गुलाबी निशान हो सकते हैं।
असामान्यताएं: छाती, हाथ या पैरों में फैली नसें रक्त के थक्के बना सकती हैं, जो फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। लिम्फेटिक एब्नॉर्मलटीज जो पेट, छाती या अंगों में हो सकती हैं।
हाथ-पैरों की असामान्यता: बड़े या असमान हाथ-पैर, उंगलियों के बीच ज्यादा दूरी या असमान अंगों का आकार आम है।
रीढ़ की समस्याएं: रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन, रीढ़ पर दबाव डालने वाली गांठें या टेदर्ड कॉर्ड हो सकता है।
त्वचा के निशान: पोर्ट-वाइन स्टेन, उभरी नसें या भूरे रंग के त्वचा के उभरे हिस्से दिख सकते हैं।
गुर्दे की समस्याएं: एक गुर्दा छोटा या असामान्य हो सकता है। कुछ बच्चों में विल्म्स ट्यूमर का खतरा होता है, जिसके लिए अल्ट्रासाउंड जांच जरूरी है।
क्लोव्स सिंड्रोम को कैसे करें डाइग्नोज

– जन्म के बाद शारीरिक जांच और लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जाता है। हालांकि, इसके लक्षण छोटे हो सकते हैं, इसलिए अनुभवी विशेषज्ञ से जांच जरूरी है।
– फैमिली हिस्ट्री के अनुसार इसकी प्रारंभिक जांच की जा सकती है।
– एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसे इमेजिंग टेस्ट कराएं।
– PIK3CA जीन उत्परिवर्तन की पुष्टि के लिए मॉलिक्यूलर जेनेटिक टेस्ट कराएं।
क्लोव्स सिंड्रोम का उपचार
क्लोव्स सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को रोकने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए पैलियेटिव केयर दी जाती है।
स्क्लेरोथेरेपी: यह गैर-सर्जिकल प्रक्रिया विहिकल डिस्टॉर्शन के आकार को कम करती है।
एम्बोलिजेशन: यह न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया ब्लड विहिकल डिस्टॉर्शन को नियंत्रित करती है।
सर्जरी: हाइपरप्लास्टिक टिशू या गांठों को हटाने के लिए डिबल्किंग सर्जरी की जा सकती है।
आईवीसी फिल्टर: यह डिवाइस रक्त के थक्कों को फेफड़ों तक पहुंचने से रोकता है।
बरतें ये सावधानियां
– क्लोव्स सिंड्रोम के प्रबंधन के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की टीम जरूरी है।
– माता-पिता को बच्चे के लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए।
– सही निदान और समय पर उपचार से बच्चे की जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
