बच्चे को डांटने से पहले जरा सोचकर करें शब्दों का चयन: Smart Parenting Tips
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Smart Parenting Tips: बच्चों को सही राह पर लाने के लिए या फिर उन्हें कोई बात समझाने के लिए अक्सर पेरेंट्स बच्चों को डांट देते हैं। कई बार वे दूसरों के सामने भी उन्हें डांटने से नहीं चूकते। अक्सर माता-पिता को यह बहुत ही सामान्य सी बात लगती है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका बच्चों पर विपरीत असर पड़ता है। वे भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं। साथ ही उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है।  

टूट जाता है उनका आत्मविश्वास

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The words used while scolding leave a lasting impact on a child’s self-esteem.

बरनार्ड सेंटर फॉर टॉडलर डेवलपमेंट के निदेशक और हाउ टॉडलर्स थ्राइव के लेखक डॉ. टोवाह क्लेन का कहना है कि डांटते समय उपयोग किए गए शब्द बच्चों के आत्मसम्मान पर स्थाई असर डाल देते हैं। जिससे आगे चलकर बच्चों का कॉन्फिडेंस ही टूट जाता है। उन्हें तनाव घेरने लगता है। डॉ. क्लेन के अनुसार अक्सर माता-पिता बच्चों को डांट कर चुप करा देते हैं या फिर तेज आवाज में बोलकर उनके विचार जानने की कोशिश ही नहीं करते। इस दौरान शब्दों का ध्यान नहीं रखने से उन्हें जाने अनजाने में शर्मिंदगी होती है। ये उन्हें भावनात्मक रूप से तोड़ देते हैं। ऐसी बातें और शब्द वे भूल नहीं पाते। डॉ. क्लेन ने बताया बच्चों को क्या नहीं बोलें-

तुम ये क्या कर रहे हो, मैं बताता हूं क्या करना है

बच्चों को नए काम सीखने का मौका दें।
Give children a chance to learn new things.

डॉ. क्लेन के अनुसार यह वाक्य किसी भी बच्चे के लिए सही नहीं है। माना कि आप उनकी काम सीखने में मदद करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा वाक्य बोलने से उन्हें महसूस होगा कि वे ये काम कर ही नहीं सकते। सिर्फ बड़े ही जानते हैं कि इसे कैसे करना है। इससे उसका विश्वास कम होगा। इसकी जगह आप बोलें कि अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।

तुम्हें परेशानी क्या है

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Never tell children that they bother you.

यह वाक्य अगर आप प्यार से पूछ रहे हैं तो सही है। लेकिन अगर आप गुस्से में या नाराज होकर बच्चे से ये बोल रहे हैं तो ये परेशानी की बात है। जब आप बच्चे को गुस्से में यह बोलेंगे तो उसे लगेगा कि सच में उसे कोई परेशानी है और उसका विश्वास कम हो जाएगा। वह खुद पर ही संदेह करने लगेगा कि उसमें कोई तो कमी है, जिसके कारण वह कुछ ठीक नहीं कर पा रहा।

तुम कभी कुछ नहीं कर पाओगे

कई बार गुस्से में हम बच्चों को बोल देते हैं कि ऐसे करोगे तो तुम कभी कुछ नहीं कर पाओगे। ये वाक्य बच्चे के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।
Many times in anger we tell the children that if you do like this, you will never be able to do anything. This sentence is most dangerous for the child.

कई बार गुस्से में हम बच्चों को बोल देते हैं कि ऐसे करोगे तो तुम कभी कुछ नहीं कर पाओगे। ये वाक्य बच्चे के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। जब बच्चा ऐसा वाक्य सुनता है तो वो निराश हो जाता है। उसमें नेगेटिविटी आने लगती है। बार-बार यह सुनने से उसका सेल्फ कॉन्फिडेंस ही टूट जाता है। इसलिए हमेशा बोलें, कोई बात नहीं धीरे-धीरे तुम सब सीख जाओगे। बच्चे को कभी नहीं बोलें कि तुम्हें हर बात सौ बार समझानी पड़ती है।

तुम्हारे कारण हमेशा मूड खराब होता है

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कई बार बच्चों की गलतियों से आप परेशान होते हैं और उन्हें बोल देते हैं कि तुम्हारे कारण हमेशा हमारा मूड खराब होता है। जब आप यह वाक्य बोलते हैं उस समय बच्चे का चेहरा देखें, आपको उसपर घोर निराशा और दुख दिखेगा। दरअसल, ये वाक्य उन्हें यह एहसास करवाता है कि वे आपकी परेशानियों का कारण है। ऐसे में वे डिप्रेशन तक में आ सकते हैं।

जरूर तुमने ही कुछ किया होगा

जब भी बच्चे की कोई शिकायत आती है या फिर कोई गड़बड़ होती है तो हम बच्चों को ही इसका जिम्मेदार मान लेते हैं, वो भी उनका पक्ष जाने बिना। ऐसे में बच्चों का कॉन्फिडेंस टूट जाता है। वे सोचते हैं कि आप उनपर​ विश्वास नहीं करते। जिसका उन पर विपरीत असर पड़ता है।

इस तरह के वाक्यों का करें उपयोग

जाहिर सी बात है कि पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चों का भला चाहते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए परेशान रहते हैं।
It is obvious that parents always want the best for their children and are worried about their progress.

जाहिर सी बात है कि पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चों का भला चाहते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए परेशान रहते हैं। शायद यही कारण है कि वे उन्हें डांटते भी हैं, लेकिन इस दौरान सही शब्दों और वाक्यों का चयन जरूरी है। जैसे- अभ्यास से तुम परफेक्ट हो जाओगे, तुम वो सब कर सकते हो जो चाहते हो, तुमने अपनी पूरी कोशिश की आगे और बेहतर करने की कोशिश करना आदि वाक्य उन्हें आपके करीब लाएंगे और उनका आत्मविश्वास बढ़ाएंगे।  

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...