summary; नानी और नमिता ने बदला दक्ष का स्वभाव
जिद्दी और चिड़चिड़े स्वभाव वाले दक्ष को उसकी नानी और नमिता आंटी ने प्यार और अनुशासन से संवारा। 'गुड बॉय चार्ट' की मदद से दक्ष में आया सकारात्मक बदलाव, जो हर माँ के लिए प्रेरणा है।
Short Story in Hindi: निधि का 5 साल का बेटा दक्ष हर बात पर जिद करता था। उसे खिलौना चाहिए तो अभी चाहिए, खाना नहीं खाना तो किसी की एक नहीं सुनता। हर बार निधि को उसकी जिद के आगे झुकना पड़ता था। धीरे-धीरे दक्ष का स्वभाव चिड़चिड़ा होता जा रहा था। वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता, रोता-चिल्लाता और किसी से भी ढंग से बात नहीं करता। हर बात के लिए निधि उसे खूब मनाती, दुलारती, तब जाकर वो उसकी बात मानता।
करीब दो साल से निधि अपने मायके नहीं गई थी। इस बार उसने गर्मी की छुट्टियों में माँ के पास जाने का फैसला किया और ट्रेन के टिकट भी करवा लिए। नानी को अपने नाती से मिलने की बहुत खुशी थी। एक दो दिन तो दक्ष की जिद और चिड़चिड़ापन उसकी नानी ने सफर की थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन तीसरे दिन जब दक्ष ने सुबह नाश्ता करने से मना कर दिया, फिर टीवी के रिमोट के लिए ज़ोर से रोने लगा, तो नानी ने गंभीरता से सोचना शुरू किया कि आखिर बच्चा इतना चिड़चिड़ा क्यों होता जा रहा है।
अगले ही दिन नानी यानी निधि की माँ ने अपनी पक्की सहेली नमिता को बुलाया, जो एक रिटायर्ड प्राइमरी स्कूल टीचर थी और बच्चों के मनोविज्ञान में गहरी रुचि रखती थीं। नमिता ने बड़े ध्यान से सारी बातें सुनीं और कुछ सोचने लगीं।
नमिता ने सुझाव दिया कि दक्ष को प्यार की ज़रूरत है, लेकिन साथ ही उसे अनुशासन भी सिखाना ज़रूरी है। हर बार उसकी जिद मानना उसे ये सिखा रहा है कि वो जैसा चाहे वैसा कर सकता है। बच्चा ध्यान खींचना चाहता है।

दूसरे दिन से ही नानी और नमिता ने मिशन दक्ष पर काम शुरू कर दिया। उन्होंने दक्ष के लिए एक ‘गुड बॉय चार्ट’ बनाया। हर अच्छे काम पर उसे एक स्टार दिया जाता, जैसे समय पर खाना खाना, बिना रोए कपड़े पहनना, या दूसरों से प्यार से बात करना। 10 स्टार पर उसे उसकी मनपसंद कहानी की किताब या पार्क में झूला झुलाने का वादा किया गया।

शुरू-शुरू में दक्ष थोड़ा झल्लाया, लेकिन जब उसने देखा कि बिना रोए अगर वह ब्रश कर लेता है तो उसे एक स्टार मिलता है, और वो स्टार एक रंग बिरंगे बोर्ड पर चिपकाए जाते हैं, तो उसे भी इसमें मज़ा आने लगा। धीरे-धीरे उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। अब वो कोशिश करता कि वो बिना जिद किए बातें माने, ताकि उसे स्टार मिले।
नानी उसे हर स्टार के साथ यह भी समझातीं कि देखो, जब तुम अच्छे बच्चे बनते हो तो सबको अच्छा लगता है और तुम्हें भी खुशी होती है।
एक हफ्ते में ही दक्ष के स्वभाव में काफी बदलाव दिखने लगा। वो अब छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करता था। अगर उसे कुछ चाहिए भी होता, तो वह शांति से कहता, नानी, मुझे ये चाहिए, लेकिन अगर मैं अच्छा बच्चा बनूंगा तो मिलेगा, है ना?
निधि को भी यह तरीका बहुत पसंद आया। उसने महसूस किया कि उसकी एक गलती थी , हर बार केवल दुलार देना और बच्चे की हर जिद को मान लेना। नमिता और माँ ने न सिर्फ दक्ष को सुधारा बल्कि निधि को भी समझाया कि प्यार और अनुशासन दोनों एक साथ जरूरी हैं।
जब छुट्टियाँ खत्म हुईं और निधि वापस अपने घर लौटी, तो उसके साथ एक बदला हुआ दक्ष था – मुस्कुराता हुआ, शांत और समझदार।
